अखिलेश पहुंचे वाराणसी तो उमड़ पड़ा जनसैलाब

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जब आठ नवम्बर को वाराणसी पहुंचे तो जनता में उनके प्रति असीम आकर्षण और विश्वास दिखाई दिया। बाबतपुर एयरपोर्ट से सरसिया घाट के गोवर्धनधाम तक के 12 किलोमीटर के रास्ते पर लगभग दो दर्जन स्थानों पर उनका भव्य स्वागत हुआ और एक लाख से ज्यादा लोगों से उनका सीधा सम्पर्क हुआ।

अखिलेश के साथ लखनऊ से वाराणसी की यात्रा में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरनमय नंदा और राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी भी साथ थे। मौका था गोवर्धनपूजा का और इसके मुख्य अतिथि थे अखिलेश जी। इन्द्र के प्रकोप से मथुरावासियों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत उठाकर जो चमत्कार किया था आज हजारों वर्ष बाद भी वह घटना आस्था-विश्वास का माध्यम है। वाराणसी में गंगा नदी के किनारे हरिश्चन्द्र घाट-रामनगर ब्रिज के पास सरसिया घाट पर गोवर्धनपूर्जा उत्सव में उपस्थित एक लाख जनसमूह के आकाशभेदी हर हर महादेव के उद्घोष के बीच श्री अखिलेश यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण रक्षा करते हैं। भगवान सबके हैं। उन्होंने मानवता और सद्भाव का संदेश दिया। श्री यादव ने कहा इन्द्र के अहंकार के खिलाफ कृष्ण का विद्रोह, अन्याय के विरूद्ध उनका संघर्ष उनके दिखाए इसी रास्ते पर हमें चलना है। खेद है कि भगवान श्री कृष्ण जी के रास्ते से भटकाने की कोशिशें हो रही हैं। श्रीकृष्ण ने कर्म प्रधान जीवनदर्शन दिया।

नारी के सम्मान की शिक्षा दी। श्रीकृष्ण ने सिद्धांत से न डिगने और निष्ठावान रहने का भी उपदेश दिया। श्रीमद्भगवत गीता में उन्होंने जो शिक्षाएं दी हैं वे कालातीत हैं। आज के प्रबंधनगुरू भी गीता के बताए रास्ते पर चलने का आग्रह करते पाए जाते हैं। बीजेपी को भी भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा को ग्रहण करना चाहिए। अखिलेश ने गोवर्धनपूजा के बाद सम्बोधित करते हुए कहा कि हमें सोचना होगा कि भारत दुनिया के मुकाबले कहां खड़ा हैं? दुनिया में कहीं किसान आत्महत्या नहीं करता है। किसान की किसी को चिंता नहीं। 08 नवम्बर को 02 वर्ष पूर्व हुई नोटबंदी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा इससे अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। बैंक घाटे में चले गए हैं। जो पैसा लेकर विदेश भाग गए वे किसके रिश्तेदार हैं? नौजवानों को रोजगार से वंचित किया जा रहा है। भाजपा लोगों का हक़ और सम्मान छीन रही है। जातीय जनगणना हो जाए तो सबकी आबादी का पता चले तब उसी अनुपात में अधिकार मिलेंगे। जिनकी आबादी कम उनके अधिकार ज्यादा क्यों हों?

अखिलेश ने समाजवादी सरकार की उपलब्धियों की चर्चा में बताया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। छात्र-छात्राओं को 18 लाख लैपटाप बांटे गए। गरीब महिलाओं को समाजवादी पेंशन का लाभ दिया गया। गंभीर रोगों के भी मुफ्त इलाज की व्यवस्था की थी। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का निर्माण, मेट्रो रेल समाजवादी सरकार की देन है। भाजपा सरकार समाजवादी सरकार के कामों का ही उद्घाटन का उद्घाटन और शिलान्यास का शिलान्यास कर रही है। भाजपा राज में अपराध बढ़े हैं। व्यापार चौपट है और भ्रष्टाचार का बोलबाला है।

यादव ने कहा कि लोकतंत्र में वोट ही असली ताकत है। वोट से जो सरकार बनी है, वह वोट से ही संख्या से बाहर जाएगी। जनता को बहकाने में भाजपा वाले माहिर हैं, इनके बहकावे में नहीं आना है। सन् 2019 के चुनाव बहुत महत्वपूर्ण हैं वे राजनीति की अगली दिशा तय करेंगे। राजनीतिक दलों और जनता दोनों के सामने बड़ी चुनौती है कि वे कैसे लोकतंत्र को बचाएं? अखिलेश किसानों और नौजवानों के हालात पर चिंता जताते रहे। भाजपा सरकार जिस तरह किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं दिला पा रही है उससे किसान और ज्यादा कर्जदार होगा। किसान भाजपा सरकार की प्राथमिकता में ही नही रह गया है। उसकी मदद के बजाय भाजपा सरकार का सारा जोर पूंजीपतियों की कर्जमाफी पर है। नोटबंदी से परेशान लोग अपने पैसों के लिए ही भीख मांग रहे हैं। कालाधन तो बाहर से आया नहीं, यहां गरीबों का जमा धन भी लूटकर लोग विदेश भाग गए।

अखिलेश इसके लिए प्रशासनिक अव्यवस्था, प्रबंधन की अकुशलता और राजनीतिक इच्छाशक्ति को ही दोषी मानते हैं। भाजपा राज में महिलाओं और बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ी है। व्यापारियों की लूट और हत्या की घटनाओं में वृद्धि हुई है। अपराधी बेखौफ हैं और पुलिस बल किम् कर्तव्यविमूढ की स्थिति में है। भाजपा सरकार संकीर्ण मानसिकता के साथ व्यवहार कर रही है। उसकी सोच बहुत निम्नस्तरीय है। वे मानते हैं कि मन छोटा नहीं होना चाहिए, दिल बड़ा होना चाहिए। सपनों को तोड़ना नहीं चाहिए।

राजेन्द्र चौधरी ने वाराणसी से लखनऊ लौटकर कहा कि जब वे वरूणा नदी के पास से गुजर रहे थे, अखिलेश ने कहा कि अगर पुनः अवसर मिल जाता तो वरूणा नदी जैसी छोटी नदियां भी साफ हो जाती। इनकी सफाई के बिना गंगा-यमुना साफ नहीं हो सकती। वाराणसी में अखिलेश के काफिले के साथ हजारों की भीड़ भी दौड़ रही थी। एयरपोर्ट से गोवर्धनधाम के रास्ते पर जगह-जगह उनके स्वागत में पुरूष-महिलाएं घरों की छतों से पुष्पवर्षा कर रहे थे। कई जगह तो ढोल-नगाड़े के साथ स्वागतकर्ता खड़े थे। नौजवानों में तो बहुत ज्यादा उत्साह था।

चौधरी का कहना है कि जनता में भाजपा के प्रति इतना ज्यादा आक्रोश दिख रहा है कि सन् 1977 की याद आ रही है। इस बार लोकसभा के चुनाव जन आन्दोलन बनने का आभास देते हैं। जनता की उमड़ती भीड, उसका लहराता हुआ जोश और अखिलेश यादव जिंदाबाद से सैकड़ों की संख्या में उद्घोष का संकेत है कि परिवर्तन की हवा बहने लगी है। देश को अब नए नेतृत्व की दरकार है। जनता जाग रही है। स्पष्ट है कि जनता का रूझान अब समाजवादी पार्टी और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर है। जनता का भरोसा उन पर है क्योंकि यह सभी मानते है कि विकास का विश्वास उन पर ही किया जा सकता है। भाजपा जातिवादी राजनीति करती है। समाजवादी पार्टी समता और सद्भाव की राजनीति करती हैं।