अतुलनीय: जन्म से नहीं है तुलसी का महत्व

वीर विक्रम बहादुर मिश्र
गोस्वामी तुलसीदास के बारे में पहले तो दीनता की स्थिति में उनसे किसी ने कभी कुछ पूछा नहीं, परंतु बाद में जब उन्हें भगवदीय उपलब्धि हुई तो उन्होंने अपने विषय में बताना उपयुक्त नहीं समझा। क्योंकि जब किसी को भी भगवत्ता का दर्शन हो जाता है तो निज सत्ता का प्रदर्शन लुप्त हो जाता है। किसी शायर ने लिखा कि-
‘ढूंढ़ता तुझको रहा पाया पता तेरा नहीं,
जब पता तेरा लगा तो अब पता मेरा नहीं।’
जो भगवदचिंतन में डूब जाता है उसकी अपनी चिंता समाप्त हो जाती है। फिर वह भगवद्चर्चा में ही लीन हो जाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी का जो साहित्य है वह इसी का प्रमाण है। उन्होंने भगवान राम के गुणानुवाद में कोई कसर नहीं छोड़ी, जबकि अपने विषय में एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने अपने पूरे कुल को पूज्य बना दिया। श्रीमद्रामचरित मानस के उत्तर कांड में उन्होंने जो लिखा वह उन्हीं के लिए सार्थक बन गया-
‘सो कुल पूज्य उमा सुनु जगत पूज्य सुपुनीत।
श्री रघुबीर परायण जेहि नर उपज विनीत’।
गोस्वामी तुलसीदास जी जब कुछ कहने की स्थिति में हुए तो उन्होंने अपने विषय में कुछ कहने की आवश्यकता नहीं समझी। इसी से संशय और भ्रम की स्थिति पैदा हुई। सरकारी पाठ्यपुस्तकों और गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी की जो जीवनी दी गई है, उसमें उनका जन्म बांदा जिले के राजापुर गांव में बताया गया है। सरकारी पाठ्यपुस्तकों और गीताप्रेस की अपनी प्रामाणिकता है, उसे झुठलाया नहीं जा सकता, परंतु दो वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की इंटर व हाईस्कूल के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जा रही हिंदी की दो पुस्तकें संज्ञान में आई थीं जिनमें गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म आजमगढ़ जिले के सूकरखेत में होना लिखा हुआ पाया गया था। इस संदर्भ में कुछ जानकार लोगों ने बोर्ड के अधिकारियों का ध्यान भी आकृष्ट किया था। गीता प्रेस तथा कतिपय अन्य प्रकाशित गोस्वामी जी की जीवनी के संदर्भ में जो वर्णन है वह प्रचलित धारणाओं के आधार पर है। ये धारणाएं गोस्वामी तुलसीदास ने स्वयं अपने विषय में जगह-जगह पर जो संकेत दिए हैं उनसे मेल नहीं खाती हैं। विद्वानों का यह भी मत है कि गोस्वामी जी यदि बांदा के राजापुर के जन्मे होते तो वहां से बीस किलोमीटर की दूरी पर चित्रकूट दिन में जब चाहे तब जा सकते थे। उन्हें विनय पत्रिका में यह कहने की आवश्यकता क्या थी कि-‘अब चित चेतु चित्रकूटहिं चलू’
गोंडा में ‘सूकरखेत’ का राजस्व रिकार्डों में दर्ज होना, सरयू-घाघरा संगम के तट पर पसका में गुरु नरहरिदास की कुटिया और यहां से पांच किमी दूर राजापुर गांव होना क्या दर्शाता है? गोस्वामी जी ने विनय पत्रिका में लिखा कि मैं तो तुम्हारे घर का पैदा हुआ हूं।
‘तुलसी तिहारो घर जायो है घर को’
गोंडा का राजापुर अयोध्या की चौरासी कोसी परिक्रमा की परिधि में आता है। गोंडा के राजापुर को लेकर जो भौगोलिक और साहित्यिक साक्ष्य हैं वे गम्भीरता से विचार करने योग्य हैं। गोंडा के सूकरखेत स्थित राजापुर गांव का तुलसी जन्मस्थली के रूप में शोध कर चुके सनातन धर्म परिषद के अध्यक्ष डा. स्वामी भगवदाचार्य का कहना है कि भ्रम की स्थिति इसलिए है क्योंकि मध्ययुग में तुलसी नाम से चार कवि हुए हैं। मानसकार तुलसी और रत्नावली के पति तुलसी दोनों अलग-अलग हैं। तुलसी ने विनय पत्रिका में ‘व्याह न बरेरवी’ कहकर अपने को अविवाहित बताया है। सोरों के पास नंददास के अग्रज तुलसी और लवकुश कांड छंदावली, घट रामायण के रचयिता तुलसीदास इनसे भिन्न हैं। डा. भगवदाचार्य के अनुसार अकबर भी दो हुए हैं। गोस्वामी तुलसीदास के समकालीन जो अकबर थे वे हुमायूं के बेटे थे। उनका कार्यकाल १५५६ से १६०५ था। एक अकबर द्वितीय भी हुआ जो शाह आलम द्वितीय का पुत्र था। उसका कार्यकाल १८०६ से १८३७ था। गजेटियर लिखने की परम्परा की शुरुआत उसी समय से हुई। डा. भगवदाचार्य शासन से मांग करते हैं कि इस संदर्भ में भ्रम की स्थिति के निवारण के लिए सरकार अपने स्तर से छानबीन कराये ताकि वस्तुस्थिति की स्पष्ट जानकारी लोगों को हो सके।
तुलसी का महत्व इसलिए नहीं है कि वे कहां पैदा हुए? उनका महत्व बढ़ेगा उनके द्वारा सुझाये गये जीवनोपयोगी सूत्रों को आत्मसात करने से। संसार में शांति, खुशहाली लाने के लिए श्रीमदरामचरितमानस अद्भुत ग्रंथ है। कबीर से पूछा गया कि तुमने ईश्वर को देखा, बताओ, वह कैसा है, कबीर ने कहा-
‘मैं का जानूं राम कूं, कहे भी को पतियाय।
हरि जैसा, तैसा रहे, तू हरषि-हरषि गुन गाय’।
तुलसी का रामचरित मानस विश्वशांति की आधारशिला रखता है। रामचरित मानस में वर्णित राम की कहानी इंसान के ब्रह्मï होने की कहानी है। इस ग्रंथ में ङ्क्षहदूवाई, मुसलमानियत, ईसाइयत का सवाल नहीं है, यह ग्रंथ मनुष्य में ईश्वरत्व का संचार करता है। सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक थे अब्दुल रहीम खानखाना, उन्होंने तो गोस्वामी जी के जीवन काल में ही इसे कुरान के समान बताया था।
रामचरित मानस विमल संतन जीवन प्रान
हिंदुआन को वेद सम जमनहि प्रकट कुरान।
तुलसी के रामचरित मानस को मुस्लिम शायर नजीर बनारसी ने सिर आंखों पर लिया और तुलसी द्वारा मानवता में देवत्व निखारने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा-
‘संसार को राम ने संवारा-लेकिन
संसार के राम को संवारा तुमने।
जिस राम को वनवास दिया दशरथ ने
उस राम को पहुंचा दिया घर-घर तुमने।’
इंग्लैंड के विद्वान फादर कामिल बुल्के को तुलसी का आकर्षण इतना भाया कि वे भारत के ही होकर रह गये। उन्होंने स्वयं भी रामकथा पर विशद ग्रंथ लिखा। मलिक मोहम्मद जायसी, महात्मा चिश्ती, डा. शैलेश जैदी, बशीर अहमद मयूख, अब्दुल रशीद खां, मिर्जा हसन नासिर आदि मुस्लिम रामभक्तों की कतार है जो तुलसी के मुरीद हैं।
तुलसी कहां पैदा हुए इसकी जानकारी से ही कल्याण नहीं होगा। कल्याण तब होगा जब तुलसी हर घर की पैदाइश माने जाएंगे। जन-जन तक तुलसी का संदेश पहुंचाने की आवश्यकता है।
‘पाईन केहि गति पतित पावन राम भज सुनु सठमना।’
गोस्वामी तुलसीदासजी ने श्रीमद रामचरितमानस के उत्तरकांड में जीवन को सुखकर और शांतिप्रद बनाने के लिए लोगों से मानस का पठन-पाठन और उसके अवगाहन की सलाह दी। लिखा-
‘यह सुभ संभु उमा संवादा।
सुख-संपादन समन विषादा।।’
गोस्वामी जी ने मानसिक ताप से त्रस्त लोगों को शांति प्रदान करने के लिए यहां तक कहा कि मानस की पांच या सात चौपाइयों को भी यदि लोग ध्यान से धारणा में लेंगे तो वे दीनता और हीनता की परिस्थितियों से मुक्त हो जाएंगे।
‘सत, पंच चौपाई मनोहर, जानि जो नर डर धरै।
दारून अविधा, पंच जनित विकार श्री रघुबर हरै।।’
बड़े दावे के साथ उन्होंने अपने दुष्ट मन को श्री राम के भजन की सलाह दी। ऐसा कौन है जिसे राम के भजन से सद्गति प्राप्त नहीं हुई?
‘पाई न केहि गति पतित पावन राम भज सुनु सठमना।’
जन्मस्थली पर रुकेगी साधुओं की टोली
अयोध्या की शुरू हुई चौरासी कोसी परिक्रमा से जुड़े सैकड़ों साधु-संतों की टोली सूकरखेत स्थित राजापुर गांव स्थित गोस्वामी तुलसीदास मंदिर परिसर में २९ अप्रैल को विश्राम करेगी। तुलसी जन्मभूमि न्यास के पदाधिकारी इंदुप्रकाश शुक्ल, डा. अरुण प्रताप सिंह तथा सांवल प्रसाद चौधरी की देखरेख में संतों के स्वागत की तैयारियां की गई हैं। संतों की टोली रात्रि विश्राम के बाद प्रात:काल प्रस्थान करेगी और जानकी नवमी दिन अयोध्या में चौरासी कोसी यात्रा का समापन होगा।