…अब बुलंदशहर शांत लेकिन परिजनों के दिलों में गुस्से का तूफान

लखनऊ। एक दिन पहले राजधानी नई दिल्ली से तकरीबन 60 किमी दूर भड़की जातीय हिंसा पर यूपी सरकार ने करीब-करीब काबू पा लिया है। आज दिन भर पूरे क्षेत्र में शांति का माहौल रहा। केवल मृतकों के परिजनों ने सरकार के सामने अपनी मांग रखकर इस मुद्दे को सुर्खियों में बनाए रखा। हिंसा में मारे गए इंस्पेक्टर की पत्नी रजनी ने सुबोध के आरोपी कातिल को उनके हवाले करने की राज्य सरकार से मांग की है। वहीं बुलंदशहर के डीएम अनुज झा कहते हैं कि आज हालात पूरी तरह से सामान्य है। घटना पर काबू पा लिया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू हो चुकी है, कई और लोग पुलिस के निशाने पर हैं, जल्द ही केस को सुलझा लिया जाएगा।

इसी बीच इंस्पेक्टर सुबोध के पार्थिव शरीर को राजकीय सम्मान के साथ उनके गृह जनपद एटा में अंतिम विदाई दी गई। वहीं दूसरे मृतक सुमित के परिजनों को जिला प्रशासन से पांच लाख का मुआवजा देने की घोषणा की, जबकि उनके परिजन 50 लाख मुआवजा और बड़े बेटे को पुलिस में दारोगा की नौकरी की मांग कर रहे हैं।

खबरों के अनुसार अब तक पुलिस की छह टीमों ने केवल पांच लोगों की गिरफ्तारी की है। पुलिस ने इस केस में 27 लोगों को नामजद किया है, जिनके खिलाफ 17 धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। इस मुकदमें में पुलिस 50-60 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया है। फिलहाल पकड़े गए पांच आरोपियों में से एक योगेश को बजरंगदल का सदस्य बताया जा रहा है। एडीजी मेरठ जोन का कहना है कि पकड़े गए आरोपी चमन, वीरेंद्र और आशीष चौहान का सम्बन्ध किसी भी दल या संगठन से नहीं है। पकड़े गए तीन आरोपी 14 दिन के न्यायिक रिमांड पर रखे गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबोध की अंत्येष्टि से पहले अपनी मांगों को लेकर अड़े परिवार की जिद के सामने गोरखपुर के कार्यक्रम में व्यस्त सीएम आदित्यनाथ ने अलीगंज के विधायक सत्यपाल सिंह राठौड़ से बात की। उन्होंने शहीद स्मारक बनाने और इंटर कॉलेज की मांगें मान लीं। गोकशी के शक में हुई हिंसा मामले में पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की हैं। पहली एफआईआर स्लॉटर हाउस पर और दूसरी हिंसा को लेकर। यूपी के एडीजी (कानून-व्यवस्था) आनंद कुमार कहते हैं कि अब तक चार लोगों की गिरफ्तारी हुई है। मैं संगठनों के बारे में कुछ नहीं कह सकता, लेकिन हिंसा का मुख्य आरोपी योगेश अब तक गिरफ्तार नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाइक ने इस घटना की निंदा की और कहा कि इस मामले की गम्भीरता से जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

एक खबरिया चैनल की रिपोर्ट के अनुसार खेत मालिक राजकुमार की पत्नी रेनू कहती हैं कि भीड़ ही ट्रॉली लेकर आई और उसमें अवशेष डाले और कहा कि हम थाने जाकर जाम करते हैं। हमने इस पर मना किया और कहा कि हम माहौल खराब नहीं करना चाहते, लेकिन भीड़ नहीं मानी। जब उनसे पूछा गया कि हिंसा करने वाले लोग कौन थे तो उन्होंने कहा- ‘हम नहीं बता सकते कि भीड़ में कौन लोग थे।’

बुलंदशहर में हिंसा और इंस्पेक्टर की हत्या पर मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भेजा है। आयोग ने चार सप्ताह में मुख्य सचिव और डीजीपी से बुलंदशहर हिंसा पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और जवाब मांगा है कि हिंसा फैलाने वालों पर क्या कार्रवाई हुई। साथ ही सवाल किया कि पीड़ित परिवारों के सरकार ने क्या मदद की है। खबरों के अनुसार सीएम आदित्यनाथ गोरखपुर के कार्यक्रम को बीच में छोड़कर जल्द ही राजधानी पहुंचने वाले हैं और एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। सूत्रों का दावा है कि उनकी बैठक में मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक, एडीजी कानून-व्यवस्था के अलावा और भी जिम्मेदार अफसर होंगे।