ईंट भट्ठों पर मजदूरी करता मासूम बचपन

गौरव शर्मा

सीतापुर। हमारे देश व प्रदेश की सरकारें मासूम बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करने के लिए ढेर सारी योजनाओं को संचालित कर रही है और इन संचालित योजनाओं में भारी-भरकम बजट देकर रुपयों को पानी की तरह बहाया जाता है इन योजनाओं के द्वारा सरकारों का प्रयास है कि हमारे देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों का अच्छी शिक्षा प्रदान करायी जा सके, जिससे बच्चों के साथ आने वाला भविष्य भी शिक्षित हो सके लेकिन हमारे प्रदेश में ऐसे भी गरीब मासूम बच्चे हैं, जिनका बचपन स्कूलों में न बीत के ईंट भट्ïठों पे बीत रहा है। ऐसा ही मामला सीतापुर शहर कोतवाली क्षेत्र के मुंशीगंज बड़ागाँव रोड पर स्थित एक भट्ठे पर खुले आम मासूम बच्चों के द्वारा बाल मजदूरी करायी जाने का सामने आया लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते ये बदस्तूर जारी है। आप को बता दें कि जनपद के ज्यादा तर भट्ठों पर मासूम बच्चों से बाल मजदूरी करायी जाती है लेकिन प्रशासन मुखदर्शक बनके इस कृत्य पर अंकुश लगाने पर नाकाम साबित हो रहा है।

सीतापुर जनपद में ईंटो का कारोबार करने वाले लगभग 254 ईंट भट्ठे जिला प्रशासन की जानकारी में संचालित हो रहे हैं और इन भट्ठों पर बड़ी संख्या में लोग मजदूरी करके अपनी जीविका चलाते हैं। इन भट्ठों पर किया जाने वाला कार्य बहुत मेहनत भरा होता है । इस विषम गर्मी की चिलचिलाती धूप में घंटो कठोर परिश्रम करके मजदूर अपने परिवार के लिए दो वख्त की रोटी का इन्तजाम करता है। भट्ठों पर काम करने वाले मजदूर पुरुष के साथ साथ महिलायें भी दिन भर काम करती है। इन भट्ठों पर ऐसे मासूम भी काम करते दिखे, जिनकी उम्र 10 वर्ष के आसपास या फिर इससे भी छोटी थी, भट्ठों पर काम करने वाले बाल मजदूरों से हमारी टीम ने बात की तो बच्चों ने बताया परिवार की आर्थिक स्थिति खऱाब होने के कारण इन भट्ठों पर मजदूरी करने के लिए आते हैं और भट्ठा मालिक के द्वारा आसानी से काम दे दिया जाता है।

भट्ठा मालिक हमारे काम के बदले में 70 से 100 रुपये देता है, बदले में हमसे सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक मिटटी और कच्चे ईंटो की ढुलाई और ईंटो की पथाई का काम करवाता है। तब जाकर शाम को हमारी मजदूरी का भुगतान हमे मिलता है । इस पैसे को हम घर ले जाकर परिवार के लोंगो की रोटी का इंतजाम करते हैं। ये सिलसिला रोज सुबह शुरू होता है जो देर शाम तक चलता है। यूं तो हमारी सरकारें बाल मजदूरी को अपराध मानते हुए और उसकी रोकथाम के लिए कड़े कानून भी बना रखे हैं लेकिन इन कानूनों का प्रशासन और भट्ठा मालिकों ने मजाक बना रखा है । हमारे आस-पास ऐसी तमाम जगह मिल जाएंगी, जहां खेलने कूदने पढ़ाई करने वाले मासूम बच्चों का बचपन बाल मजदूरी करने में बीता जा रहा है लेकिन प्रशासन के जिम्मेदार विभाग और ईंट भट्ठा मालिक की सांठ गांठ के चलते खुले आम मासूम बच्चों से मजदूरी करायी जाती है और प्रशासन देख कर भी अनजान बना रहता है।

इस मामले में जिले के श्रम अधिकारी इंदु भूषण से बात की तो उन्होंने बताया कि मामला अत्यन्त गंभीर है और इस मामले को जल्द ही जिला अधिकारी के संज्ञान में डाल कर अपनी टीम के साथ मौके पर दबिश देकर बाल मजदूरी पर रोकथाम लगायी जायेगी, साथ ही दोषी भट्ठा मालिकों पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी।