उत्तम प्रदेशः एसपी के गनर पर रेप का आरोप

अजय भदौरिया

फतेहपुर। मार्च 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर महंत आदित्यनाथ ने पहली तेजी पुलिस पर ही दिखाई थी। वह ताबड़तोड़ राजधानी लखनऊ की कोतवाली पहुंच गए थे और महिला पुलिस की परेशानियों से रूबरू हुए थे। उसी मुख्यमंत्री के राज्य में एक महिला पुलिस अधीक्षक के गनर पर बलात्कार का आरोप लगाती है तो यूपी की मित्र पुलिस उसकी बात नहीं सुनती है।

सूबे की सरकार पुलिस और जनता के बीच खुला संवाद स्थापित करने की बात करती है, जिससे पुलिस और पब्लिक के बीच एक अच्छा रिश्ता स्थापित हो सके, लेकिन जब पुलिस खुद आबरू से खिलवाड़ करने लगेगी तो ये भरोसा कैसे कायम होगा।

मामला सदर कोतवाली के गड़रियनपुरवा का है, जहां दलित महिला ने एसपी के गनर (एचसीपी) पर रेप का आरोप लगाया है। वहीं पीड़ित एफआईआर के लिए पिछले दो महीनों से चक्कर काटने को मजबूर है, लेकिन पुलिस ने अभी तक कोई भी सुनवाई नहीं की।

मामला मीडिया के पास पहुंचा तो एसपी के गैरमौजूद होने का बहाना बताकर उसे एक बार फिर से लौटा दिया गया। पीड़ित दलित महिला की मानें तो करीब तीन साल पहले एक मामले की शिकायत को लेकर वो एसपी के आवास पर गई थी, जहां गनर बालमुकंद यादव ने उसके प्रार्थना पत्र से उसका नंबर ले कर उससे बातचीत करना शुरू कर दिया।

इसके बाद धीरे-धीरे घर आना-जाना शुरू कर दिया और उसने बेटी को नौकरी दिलाने के नाम पर उसका शारीरिक शोषण करना शुरू कर दिया। पीड़िता की माने तो गनर ने बेटी को नौकरी दिलाने के नाम पर पांच लाख रुपये भी ऐंठे। पिछले दो महीने से एफआईआर दर्ज करने के लिए भटक रही पीड़िता की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं पुलिस से इस मामले में जानकारी की कोशिश की गई तो वह पूरे मामले पर चुप्पी साध गए।