गांव का सोना शहर में जाते ही बन गया कोहिनूर

  • निचलौल तहसील के सीमाई क़स्बा पनपा एक राष्ट्रीय स्तर का फुटबॉल खिलाड़ी
  • पिता की राह पर चल सभी को किया अचम्भित
  • एएसआईएससी की तरफ से खेला राष्ट्रीय स्तर का खेल

निचलौल तहसील से अरुण वर्मा की रिपोर्ट
एक कहावत है कि मन मे कुछ करने का जज़्बा व जुनून हो तो मंजिल आसान हो जाया करती है। महाराजगंज जनपद के सबसे पिछड़े क्षेत्र से एक ऐसा ही होनहार खिलाड़ी उभर कर सामने आया है जिसने अपनी कच्ची उम्र में ही अपने पिता की उम्मीदों कायम कर पूरे क्षेत्र के लोगो का सम्मान बढ़ा दिया है।

परिचय:

नाम- सहर्ष सिंह उम्र 15 वर्ष
पिता- उज्जवल सिंह पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी
माता- सुनीता कुंवर ब्यूटीशियन
दादा- स्व. ओमकार भारतीय फिल्मों के संगीतकार

संवाददाता- फुटबॉल खेल में ही आपकी रुचि क्यों है जबकि भारत मे सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट को माना जाता है।
सहर्ष सिंह- यह खेल हमारे पूर्वजों का पसंदीदा खेल रहा है। मेरे पापा भी अपने पढ़ाई के समय इसी खेल को खेला करते थे और उनका भी चयन राष्ट्रीय टीम के लिए हुआ था पर परिस्थियों ने उनका साथ नही दिया। वही मेरे पापा के मामा भी नेपाल के राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी थे।
संवाददाता- अभी आपकी उम्र 15 वर्ष की हुई है अभी आपको पढ़ाई पर ध्यान देनी चाहिए। क्या आप पढ़ाई और खेल को साथ साथ कर सफलता पा सकेंगे।
सहर्ष सिंह- हर युवा की यह पहली इच्छा होती है कि वे अपने देश के लिए कुछ करें। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने भी कम उम्र से क्रिकेट की शुरूआत की थी आज पूरे विश्व को उनपर नाज़ है।
संवाददाता- अबतक के खेल से क्या आपको यह उम्मीद बन रही है कि भविष्य में आपका चयन सीनियर राष्ट्रीय टीम के लिए हो जाएगा।
सहर्ष सिंह- जब मन मे कुछ करने का जज्बा व जुनून ही तो मंजिल अपने आप आसान हो जाय करती है।