चारा घोटाला: फिर टला लालू पर फैसला, कल सुनाई जाएगी सजा

रांची। झारखंड की राजधानी रांची की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने चारा घोटाले मामले में फैसला गुरुवार को भी नहीं सुनाया। अब कोर्ट कल यानी शुक्रवार को सुनाई जाएगी।

चारा घोटाले मामले में 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, आर के राणा, जगदीश शर्मा एवं तीन वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारियों समेत 16 लोगों को दोषी ठहराया था।

एक नजर चर्चित चारा घोटाला पर
950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख 27 हजार रुपये की अवैध निकासी का ये मामला 1996 में सामने आया था। इसमें जानवरों के चारा, दवाएं और पशुपालन से जुड़े उपकरणों के पैसे में गड़बड़ी की गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के मामले लालू प्रसाद यादव समेत तीन राजनीतिज्ञों, तीन आईएएस अधिकारियों के अलावा पशुपालन विभाग के तत्कालीन अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद, मोबाइल पशु चिकित्साधिकारी सुबीर भट्टाचार्य एवं आठ चारा आपूर्तिकर्ताओं सुशील कुमार झा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय कुमार अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी तथा त्रिपुरारी मोहन प्रसाद को सजा सुनाई।
अदालत ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, बिहार विधानसभा की लोक लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत समेत छह लोगों को भारी राहत दी थी एवं निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया था।
होटवार जेल में रह चुके लालू यादव का संख्या 3 के साथ खास रिश्ता है। इस बार उन्हें होटवार जेल में कैदी नंबर 3351 मिला है, जबकि इससे पहले जब वह 30 सितंबर, 2013 को चारा घोटाला मामले में होटवार जेल गए थे, तब उन्हें कैदी नंबर 3312 मिला था। इतना ही नहीं चारा घोटाले में उन्हें संख्या 3 सबसे ज्यादा परेशान कर रही है। 2013 में जब वह होटवार जेल आए थे उस दिन 30 तारीख थी। आज दूसरी बार 23 दिसंबर को जेल गए हैं। सबसे अहम बात कि जिस दिन उन्हें सजा सुनाया जाएगा, वह दिन भी 3 जनवरी होगी।
इस मामले की जांच के दौरान ही सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव के हाथ होने के सबूत पाए थे। इसके बाद 17 जून 1997 को जांच एजेंसी ने बिहार के राज्यपाल के खिलाफ कार्रवाई की इजाजत मांगी। लेकिन इसी दिन इस मामले से ही जुड़े एक बिजनेसमैन हरीश खंडेलवाल की लाश रेलवे ट्रैक पर पाई गई। राज्यपाल ने सीबीआई को इजाजत दे दी थी जांच एजेंसी ने बिहार सरकार के पांच बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें रामराज राम, फूलचंद सिंह, बेक जुलियस, के. अरुमुगम, महेश प्रसाद शामिल थे।
23 जून 1997 में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव सहित 55 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। इसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रदेव प्रसाद वर्मा का भी नाम था।
इसके बाद लालू और जगन्नाथ मिश्रा ने अग्रिम जमानत की गुहार लगाई। कोर्ट ने जगन्नाथ की अर्जी तो मंजूर कर ली लेकिन लालू को अग्रिम जमानत नहीं मिल पाई। 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी लालू की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी थी।
बिहार पुलिस ने इसी दिन बिहार के सबसे ताकतवर मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार कर लिया जिसे पूरे राज्य में तूफान सा खड़ा हो गया। लालू प्रसाद यादव के खिलाफ बिहार में असंतोष बढ़ने लगा था। उनकी पार्टी जनता दल के अंदर से भी उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग होने लगी। इसी बीच लालू प्रसाद यादव ने मास्टर स्ट्रोक खेला और जनता दल के लगभग सभी विधायकों को लेकर नई पार्टी राष्ट्रीय जनता दल बना लिया। हालांकि इसके बाद भी लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया। 28 जुलाई 1997 को राबड़ी देवी ने कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्थन से विश्वासमत हासिल कर लिया।
करीब 135 दिन हिरासत में रहने के बाद लालू यादव 12 दिसंबर 1997 जेल से बाहर आ गए। लेकिन 28 अक्टूबर 1998 को उन्हें चारा घोटाले के ही एक दूसरे मामले में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। 5 अप्रैल 2000 को उन्हें आय से अधिक संपत्ति के मामले में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। 28 नवंबर 2000 को लालू यादव ने चारा घोटाला के और मामले में ही एक दिन के लिए जेल गए। साल 2000 में लालू यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा से पुलिस ने कई बार पूछताछ की। साल 2007 में अदालत 58 पूर्व अधिकारियों और आपूर्ति से जुड़े लोगों को 5 से 6 साल की कैद की सजा सुना दी।
इसके बाद एक मार्च 2012 को सीबीआई ने पटना कोर्ट में लालू यादव, जगन्नाथ मिश्रा सहित 32 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। आज यानी 23 दिसंबर 2017 को लालू यादव को इसी मामले से जुड़े एख और केस में अदालत ने दोषी करार दिया है। जबकि जगन्नाथ मिश्रा सहित 17 लोगों कों बरी कर दिया है। फैसला आने के बाद उनको तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया है।