चिंता छोड़िए, अब सोचने से भी दर्द होगा कम…

नया लुक संवाददाता
मानव शरीर में नसें बिजली की तारों की तरह आपस में जुड़ी होती हैं, जो किसी भी हिस्से में दर्द या फिर चोट का संदेश तुरंत मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। शरीर के सभी हिस्सों में फैली इन नसों के क्षतिग्रस्त होने, रक्त का संचरण बाधित होने या फिर नस के फटने के कारण दर्द होता है।

जिसे दर्द होता है बस वही बता सकता है कि दर्द होता क्या है। विशेषज्ञ कहते हैं आप जितना अधिक अपने दर्द के बारे में सोचेंगे दर्द उतनी अधिक शिद्दत से महसूस होगा और आप इससे अधिक परेशान होंगे। अपने नजरिए में थोड़ा-सा सकारात्मक बदलाव लाकर आप दर्द के अहसास को निश्चित रूप से कम कर सकते हैं। कुछ विशेष तकनीकें भी अपनाई जा सकती हैं जैसे- ध्यान, मेडिटेशन, लॉफ्टर थेरेपी, सम्मोहन चिकित्सा आदि। इन तकनीकों से दर्द के प्रति सोच व प्रतिक्रिया में निश्चित रूप से एक सकारात्मक बदलाव आता है और इसकी तीव्रता कम होती है।

क्यों होता है दर्द…
मानव शरीर में नसें बिजली की तारों की तरह आपस में जुड़ी होती हैं, जो किसी भी हिस्से में दर्द या फिर चोट का संदेश तुरंत मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। संक्रमण, शरीर में कोई खास बीमारी व उसका उपचार, शारीरिक चोट जैसे कटना और हड्डी व मांसपेशियों का क्षतिग्रस्त होना शरीर के ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। शरीर के सभी हिस्सों में फैली इन नसों के क्षतिग्रस्त होने, रक्त का संचरण बाधित होने या फिर नस के फटने के कारण दर्द होता है। अधिकतर दर्द ऊतकों के नष्ट या क्षतिग्रस्त होने की वजह से होता है, जो आपको दर्द, टीस या धुकधुक के रूप में महसूस होता है। दर्द की तीव्रता अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग हो सकती है।

ऐसा कर आप दर्द पर पा सकते हैं काबू…
अपने दर्द को किसी ऐसी मशीन पर केंद्रित करने की कोशिश करें जिसे आप नियंत्रित कर सकते हों। अब आप उस मशीन की गति को कम करने की कल्पना करें। इससे दर्द की अनुभूति कम हो जाएगी वर्ग पहेली, सुडोकू जैसे ध्यान बंटाने वाले खेल खेलें। कोई रोचक किताब पढ़ें। अपने परिवार व मित्रों के साथ समय बिताएं। इससे आपका ध्यान दर्द से हट जाएगा। कहीं दूर चले जाएं और खुले आकाश के नीचे हाथ फैला कर ब्रह्मांड से सकारात्मक शक्तियां लेना अनुभव करें और उसे स्वयं में आत्मसात करें। प्रकृति के करीब यूं भी दर्द का एहसास कम होगा। शुरुआत में यह उपाय करना मुश्किल लगें या ऐसा लगे कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, लेकिन हार न मानें। कभी-कभी दर्द से ध्यान हटाना मुश्किल हो जाता है और अगर आप इस बारे में सोचना बंद ही नहीं करेंगे तो कोई उपाय या तकनीक काम नहीं कर पाएगी।

इसके अलावा यह भी होते हैं कारगर…
कल्पनाशीलताः इसके सावधानीपूर्वक उपयोग से व्यक्ति में कई फायदेमंद शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक परिवर्तन लाए जा सकते हैं। इसमें व्यक्ति को ऐसे स्थान पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा जाता है, जहां दर्द न हो यानी दर्द से ध्यान हटाकर कहीं और लगाने की कोशिश की जाती है।

सोचने का तरीकाः किसी खास स्थिति को लेकर आपके सोचने और रिएक्ट करने का ढंग आपके लिए उस स्थिति को बेहतर या बदतर बनाता है। यदि आप सोचेंगे कि मैं दर्द से बेहाल हूं, मेरा दर्द लगातार बढ़ता जा रहा है तो दर्द भी आपको पूरे दम-खम के साथ सालता रहता है।

दर्द कम करने के उपाय मन में ही सोचे
यदि आप सोचें कि गहरी-गहरी सांसे लेने से मेरा दर्द कम होगा और गहरी सांसें लेने लगें तो धीरे-धीरे दर्द के अहसास और तीव्रता में निश्चित तौर पर कमी आएगी। वैज्ञानिक अनुसंधानों ने भी इस बात को साबित किया है कि यदि आप अपने मस्तिष्क को दर्द के प्रति अलग ढंग से प्रतिक्रिया करने की ट्रेनिंग देते हैं और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं तो दर्द के प्रभाव निश्चित रूप से घट जाते हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि केवल 9 घंटे मस्तिष्क की इस प्रकार की ट्रेनिंग (कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी) से पुराने पीठ दर्द और अकड़न में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

सम्मोहन चिकित्साः कभी-कभी सम्मोहन चिकित्सा का इस्तेमाल दर्द से ध्यान हटाने के लिए भी किया जाता है। व्यक्ति को सम्मोहन की अवस्था में लाकर उसे सकारात्मक सुझाव दिए जाते हैं। दर्द से निपटने के तरीकों को उसकी मनोचेतना में डाला जाता है ताकि सम्मोहन से बाहर आकर भी व्यक्ति दर्द के प्रभाव को कम महसूस करे। ध्यान व योग द्वारा भी दर्द से ध्यान हटाया जा सकता है। स्वयं को सुझाव देना (ऑटो सजेशन थेरेपी) भी कारगर होती है।

कुछ उपाय कर सकते हैं स्वंय: जीवनशैली में बदलाव लाएं। पोषक भोजन खाएं, विशेषकर ऐसा भोजन, जो कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर हो। शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। नियमित रूप से एक्सरसाइज और योग करें। शरीर का पॉश्चर ठीक रखें। गलत पॉश्चर कमर दर्द का प्रमुख कारण है। शरीर का भार कम रखें और कमर के आसपास चर्बी न बढ़ने दें।