छोटे कद का बड़ा इंसानः पूरी जमात को पीछे छोड़ दिख रहा सुनहरे पर्दे पर…

असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद, चैन को त्यागो तुम,
संघर्षों का मैदान छोड़ मत भागो तुम।
कुछ किए बिना ही जय-जयकार नहीं होती।
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।।

सोनी सिंह

लखनऊ । सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती..’को जीवन में हूबहू उतार चुके हैं भदोही (उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी के समीप का जिला) के चांद बाबू। कुल 28 इंच लंबे इस इंसान की मांग आज बॉलीवुड में काफी है। भोजपुरी सिनेमा में मिमिक्री की बात हो तो चांद बाबू आज सभी निर्देशकों की पहली पसंद हैं। योगेश राज मिश्र की फिल्म में शूटिंग के सिलसिले में लखनऊ आए चांद बाबू की मुलाकात ‘नया लुक’ संवाददाता से हो जाती है। उनसे बातचीत का सिलसिला शुरू होते ही लोगों का मजमा जुट जाता है, लेकिन उन चंद पलों में वह अपने जीवन की कई सच्ची-कड़वी यादें बयां कर जाते हैं।

आप नहीं जानते होंगे कि लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने वाला यह शख्स कितने तानों, उलाहनाओं और फटकारों से उबर कर अपने एक खास मुकाम की ओर बढ़ रहा है। इतनी परेशानियों के बीच भी वह ‘उपरवाले’ को दोषी नहीं ठहराता। वह आज भी उसका शुक्रगुजार है कि उसने लम्बाई छिन ली तो एक खास हुनर दे दिया। बकौल चांदबाबू, पहले तो हंसाने के लिए मेरी लम्बाई काम आती थी, लेकिन समय ने मुझमें भी हुनर पैदा कर दिया और अब मैं लोगों को हंसाता हूं और खुद हंसता रहता हूं।

लम्बाई- 28 इंच
इरादे- फौलादी
काम-फिल्मों में मिमिक्री
निवास- भदोही

इस निर्दयी दुनिया का डटकर सामना करने का साहस कैसे पैदा हुआ, के सवाल पर उनकी आंखे डबडबा जाती है। वह कहते हैं कि सबसे ज्यादा दुख होता था, जब कोई मेरी मां को कोसता था। मैं ’बौना’ हुआ तो इसमें मेरी मां का दोष कहां है? वह तो एक मां है, जिसके सीने में केवल और केवल अपनी संतान के लिए प्यार होता है। अक्सर मेरे अब्बू (पिताजी) को भी लोग ताने देते थे। लेकिन उन्हें अफसोस नहीं होता था। वह आज आत्मविश्वास के साथ कहता है कि छोटे कद का होना छोटा होना नहीं माना जाता, मेरी सोच बड़ी है, मैं बड़े काम करने का प्रयत्न करता हूं। मैं लम्बे लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ रहा हूं।

मेरी शारीरिक लम्बाई बड़ी न सही सामाजिक लम्बाई एक दिन जरूर बड़ी होगी। वह कहते थे कि बड़ी लम्बाई वाले जितना अपने मां-बाप की सेवा नहीं करते, उससे ज्यादा मेरा चांद करेगा। देखना एक दिन वह तुम सबसे बड़ा आदमी होगा और तुम लोग उसे देखकर उतना बड़ा बनने की कोशिश करोगे। इतना कहते-कहते चांदबाबू के चेहरे पर विजयी मुस्कान थिरकने लगती है। वह कहते हैं कि आज टीवी स्क्रीन पर मेरे मोहल्ले और गांव के लोग मुझे देखकर चिल्ला उठते हैं ये देखो चांद दिख रहा है। मुझे अब खुशी लगती है कि लोग कहते हैं कि चांद मुझे भी बताओ फिल्म में रोल पाने के लिए क्या करना होता है।

वह कहते हैं कि परिवार के किसी सदस्य को नहीं मालूम कि कब मेरा कद बढ़ना थम गया। उनके छोटे कद को लेकर घर वालों ने कभी ज्यादा गौर नहीं किया, लेकिन जब गांव के लोग चिढ़ाने लगे तब अहसास हुआ कि मेरी लम्बाई अब नहीं बढ़ रही है। आपके इस यूनिक कद की जानकारी विश्व रिकार्ड वालों को हुई कि नहीं के जवाब में चांदबाबू कहते हैं कि अभी तक मैंने इसका दावा नहीं कर पाया, लेकिन अब कुछ दिनों में करूंगा, दुनिया का सबसे छोटा आदमी न सही, भारत का सबसे छोटा आदमी मैं निश्चित रूप से हूं। वह कहते हैं कि लोगों के ताने के कारण ही मेरी आगे की पढ़ाई नहीं हो पाई। लोग ताने न देते तो मैं जरूर आगे पढ़ पाता। लेकिन अनपढ़ भी नहीं हूं, मुझे थोड़ा बहुत लिखना-पढ़ना आता है।

काम करते-करते कुछ पढ़ने की प्रैक्टिस करने वाला यह शख्स अखबार के उस पृष्ठ को अपने जीवन में उतारता है। अखबार का वह पन्ना आज भी उसके पास है, उसके उसे ताबीज की तरह पहन चुका है। वह कहता है बादशाह खान अपनी एक फिल्म में कहते हैं-‘ताबीज बनाके पहनू उसे, आयत की तरह मिल जाए कही’। मेरे लिए वह आयत की तरह ही तो है…

मदहोश बेहोश निर्लज्ज अधमरा सा मैं,
कुछ आधी खुलीं, कुछ आधी बंद आंखे,
बंजर सी मेरी उबड़-खाबड़ पथरीली सांसे।।
भिगमंगों, फकीरों जैसे हालात,
पूरी की पूरी दुनिया से जैसे
टूट गया हो सब रिशता, बंधन, नाता,
न अब किसी से यारी,
और न ही किसी से बैर है दिल में,
सब स्वच्छ, निश्चल, धवल, सुन्दर, शाश्वत।।
सनकी पागलों जैसी हरकतें,