जानिए जायफल ओर जावित्री के लाभदायक प्रयोग

जायफल। मिरिस्टिका वृक्ष के बीज को जायफल कहते हैं। इस वृक्ष का फल छोटी नाशपाती के रूप का 1 इंच से डेढ़ इंच तक लंबा, हल्के लाल या पीले रंग का गूदेदा होता है। परिपक्व होने पर फल दो खंडों में फट जाता है और भीतर सिंदूरी रंग की जावित्री दिखाई देने लगती है। जावित्री के भीतर गुठली होती है, जिसके काष्ठवत् खोल को तोड़ने पर भीतर जायफल प्राप्त होता है।जायफल का वानस्पतिक नाम है जिसे संस्कृत में जातीफल कहते हैं। ये चीन, ताइवान, मलेशिया, ग्रेनाडा, केरल, श्रीलंका और दक्षिणी अमेरिका में खूब पैदा होता है।
जायफल  फाइबर, पोषक तत्व, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनरल्स व एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है लेकिन औषधीय तत्वों से भरपूर जायफल कई बीमारियों को भी दूर करता है। यह अस्थमा, पेट के कीड़े, खांसी, उल्टी, सर्दी-ज़ुकाम, बवासीर आदि में लाभप्रद हैै।

हम सभी जानते हैं कि मनुष्य जीवन का संपूर्ण सुख-दुख, लाभ-हानि, जय-पराजय आदि विषय ग्रहों पर आधारित हैं। ये ग्रह 27 नक्षत्र एवं 12 राशियों पर भ्रमण करते हैं। परिणामस्वरूप ऋतुएं, वर्ष, मास तथा दिन-रात होते हैं। सुख और दुख जीवन के अभिन्न अंग हैं। सुखों का भोग तथा दुखों का निदान मानव जीवन का महत्वपूर्ण भाग है। फलित ज्योतिष सुख-दुख का लेखा-जोखा प्रस्तुत कर मनुष्य का मार्गदर्शन करता है। अनिष्ट ग्रह जब मानव को पीड़ा देते हैं तब वह उनके शमन हेतु उपाय खोजता है। जातक चन्द्रिका, भावप्रकाश, धर्मसिन्धु, प्रश्रमार्ग नारदसंहिता, नारदपुराण एवं ज्योतिष ग्रंथ लाल किताब आदि ने अनिष्ट ग्रह पीड़ा निदान के अनेक उपाय बताए हैं।
जैसे पाश्चात्य ज्योतिष विद्वान शुक्र को कला, प्रेम तथा आकर्षण का प्रतिनिधि ग्रह मानते हैं। यह काम का प्रतीक तथा दैत्य गुरु की उपाधि भारतीय फलित ज्योतिष में पाता है। जायफल, केसर, इलायची, मूली के बीज, हरड़ तथा बहेड़ा का चूर्ण पानी में मिलाकर स्नान करने से शुक्र की कृपा प्राप्त होती है।

फलित ज्योतिष में एक से अधिक ग्रहों की पीड़ा शांत करने के लिए लाजवंती, कूट, वरियार, मालकांगनी, मोथा, सरसों, हल्दी, देवदारू, शरकोंका तथा लौंध के चूर्ण से स्नान करने का निर्देश है।
भारतीय शास्त्रों के अनुसार पन्ना, चावल, गौरोचन, शहद, सोना, जायफल, पीपरमूल से मिश्रित जल से स्नान करने से बुध उत्तम फल देते हैं। नीला वस्त्र, हरा फूल, सोना, पन्ना, मूंग, घी, कांसे के बर्तन, बुध के प्रसिद्ध दान हैं। बुध की कृपा के लिए भगवान गणेश व विष्णु की आराधना तथा उन्हें बुधवार को 108 दूर्वा चढ़ाना चाहिए।
जातक चंद्रिका तथा भाव प्रकाश ग्रंथों में ग्रहों की कृपा प्राप्ति के लिए विशिष्ट औषधि स्नानों का भी विवरण प्राप्त होता है। कनेर, नागरमोथा, देवदारू, केसर, मेनसिल, इलायची तथा महुआ के फूल पानी में डालकर स्नान करने से रवि की शुभता प्राप्त होती है।वेदांत दर्शन में रवि को जगत जीवात्मा कहा जाता है। रवि के बुरे प्रभाव से प्रभावहीनता तथा नेतृत्व गुणों का अभाव होने लगता है।
अंसभव कार्य बनना
ऐसा कार्य जिसके पूरे होने में संदेह हो तो शनिवार को दो जायफल, दो पान के जोड़े में लौंग गाड़कर उसमें थोड़ा सिन्दूर व चमेली का तेल डालकर दक्षिणमुखी वाले हनुमान जी के मन्दिर में चढ़ाने से कार्य सिद्ध हो जाता है। सामथ्र्य के अनुसार हवन भी करना चाहिए।

शत्रु शमन के लिए

अगर आपका शत्रु परेशान कर रहा है और हर कार्य में अड़ंगा डाल रहा है तो शत्रु का नाम लेकर दो जायफल कपूर से जलाकर उसकी राख को नाले में बहा दें। ऐसा करने से शत्रु आपको परेशान करना बन्द कर देता है।

शनि बाधा शान्त के लिए
यदि आपको शनि की साढ़े-साती परेशान कर रही है तो प्रत्येक शनिवार को जायफल को कीकर के पेड़ पर चढ़ायें। यह उपाय कम से कम एक वर्ष तक करने से शनि ग्रह का शुभफल मिलना प्रारम्भ हो जाता है।

दीर्घकालीन योजना हेतु

यदि आपको कोई महत्वपूर्ण योजना बनानी है और उसमें सफलता प्राप्त करनी है। शनिवार के दिन दो जायफल हनुमान जी के मन्दिर में चढ़ायें व उसके बाद पुनः उठा लें। अगले शनिवार को इसका शनि मन्त्र से घी से हवन करें फिर इसकी राख अपने पास रखकर नित्य थोड़ी-थोड़ी जुबान पर रखें व तिलक लगायें। अगले शनिवार को पुनः इसी प्रकार से करें। यह उपाय लगातार 16 शनिवार करने से बड़ी से बड़ा कार्य सम्पन्न हो जाता है।

उल्टी, गैस व अनिद्रा के लिए
उल्टी हो व प्यास लगे तो जायफल का टुकड़ा चूसे। अगर आपको गैस बन रही हो तो जायफल को नींबू के रस में घिसकर चाटें। जायफल का टुकड़ा मुॅह में रखकर चूसने या पानी, घी में घिसकर पलकों पर लगायें। ऐसा करने से अनिद्रा की शिकायत दूर हो जाती है।
अनिद्रा यानि कि रात में नींद न आना हमारी बदलती जीवनशैली की देन है। अगर नींद पूरी नहीं होती है तो दिन भर सिर में भारीपन, शरीर में थकावट और चिड़चिड़ापन महसूस होता है। एक रिसर्च में सामने आया है कि एक चुटकी जायफल लेने से नींद में किसी तरह का कोई खलल नहीं पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है कि जायफल में ट्राइमाइरिसटिन नाम का केमिकल मौजूद होता है जो हमारी मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है और उससे हमें अच्छी नींद आती है।
कमर दर्द व जोड़ों का दर्द
जायफल को पानी में घिसकर तिल के तेल में मिलाकर गर्म करके ठण्डा करें व कमर पर मालिश करें। ऐसा करने से कमर दर्द में राहत मिलेगी। जायफल घिसकर वह पानी या जायफल का तेल जोड़ों पर लगाने से जोड़ों का दर्द ठीक हो जाता है।
गर्भावस्था के दौरान अगर जायफल का उचित मात्रा में इस्तेमाल किया जा रहा है तो ये फायदेमंद साबित होता है। अगर आप कंसीव यानि कि गर्भधारण करने के बारे में सोच रहे हैं तो भी जायफल बहुत काम आता है। लेकिन यदि आप गर्भावस्था के दौरान जायफल का उपयोग कर रहे हैं तो अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

दस्त व मुहांसे

जायफल घिसकर उस पानी का सेंवन करें व नाभि पर लेंप लगाने से दस्त आने बन्द हो जाते है। मुहाॅसे होने पर जायफल को दूध में घिसकर चेहरे पर लेप लगाने से मुहांसे समाप्त हो जाते है।

ये हें जायफल के नुकसान

किसी भी चीज की अति बुरी होती है इसीलिए हर चीज का इस्तेमाल एक सीमा तक ही करना चाहिए। ठीक ऐसा ही जायफल के साथ भी है। अगर आप जायफल का ज्यादा मात्रा में सेवन कर रहे हैं तो ये आपके शरीर पर विपरीत प्रभाव भी डाल सकता है और आपको उल्टी, कमजोरी, चक्कर आना, जी मिचलाना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि अधिक मात्रा में जायफल का उपयोग करने से शरीर पर ठीक उसी तरह का प्रभाव होता है, जैसे किसी मादक यानि कि नशीले पदार्थ का सेवन करने से होता है। खासतौर पर जो लोग गर्म प्रदेशों में रहते हैं, उन्हें जायफल का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।