जीवंत जिंदगी जीने के लिए मिला है जीवन:दीपिका पादुकोण

नया लुक टीम, मुंबई। कभी खुद डिप्रेशन में थीं, आज डिप्रेशन से उबरने के टिप्स दे रही हैं। दीपिका पादुकोण बॉलीवुड की उन खूबसूरत अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिनका करियर बड़ी तेजी से चढ़ा, लेकिन एक मुकाम पर जाकर अचानक थम गया। वह डिप्रेशन में चली गईं और काफी दवा, दुआ और काउंसलिंग के बाद डिप्रेशन से ऊपर पाईं। अब दीपिका अपने एनजीओ लाइव लव लाफ फाउंडेशन द्वारा लोगों को डिप्रेशन से उबरने, इससे बचने और मेंटल हेल्थ मजबूत रखने का टिप्स दे रही हैं।

करीब एक दशक पहले ओम शांति ओम फिल्म से अपने करियर की शुरुआत करने वाली दीपिका शुरू के ही 1-2 फिल्मों में काफी बड़ा नाम कमा गईं। लेकिन कुछ दिनों बाद ही उनकी फिल्में पिटने लगी और वह डिप्रेशन में चली गईं। वह कहती हैं कि मैं महसूस करती हूं कि जब आपके मनमुताबिक कोई काम नहीं होता है तो आप हार-जीत की वजह आशा-निराशा में झूलने लगते हैं।

ईमानदारी से कहूं तो वह समय सबके लिए मुश्किल भरा हो जाता है। मेरा भी अनुभव कुछ इसी तरह का है। मानसिक बीमारी में मैं खुद को भूल गई थी और हर काम में हेल्पलेस महसूस कर रही थी। मेरे परिवार के लोगों ने मेरा दुख समझा और मुझे दवाई देना शुरू कर दिया।

वह कहती हैं डिप्रेशन कंधे पर पड़े उस बोझ की तरह होता है जिसे आप खुशी खुशी न ढो सकती हैं। न उसके बोझ से खुद को गौरवान्वित महसूस कर सकती हैं। अब मैं इसीलिए अपने NGO के माध्यम से सब को डिप्रेशन के प्रति जागरुक करती हूँ। मुझे पता चल गया कि जिंदगी बड़ी नाजुक होती है।उसे बड़े करीने से, सावधानी से और चपलता से जीना पड़ता है।

दीपिका कहती हैं कि जो लोग डिप्रेशन के दौर से गुजर रहे होते हैं। वह चाहते हैं कि लोग उनकी मदद करें। उन्हें प्यार दें और उनकी स्थिति को समझें।
इंसान एक निश्चित अवधि तक ही दुखी रहता है। दुख की सीमा बढ़ जाने से वह डिप्रेशन में चला जाता है। डिप्रेशन इंसान से जीने की चाहत छीन लेता है और वह खुदकुशी की ओर खुद को देखने लगता है।

वह कहती हैं कि पुरुषों से कहीं ज्यादा संख्या महिलाओं की है जो डिप्रेशन के दौर से गुजर गुजर रही हैं। कारण पुरुष घर से बाहर जाते हैं। हंसी-ठिठोली करते हैं और अलग-अलग जगह पर मूव करने के कारण उनकी मनस्थिति अलग-अलग हो जाती है। इस कारण भी वह खुद को डिप्रेशन से बचा ले जाते हैं। लेकिन महिलाएं घर में रहती हैं तो बच्चों के चक्कर में परेशान रहती हैं। पति बाहर है, लेट हो रहा है, क्यों नहीं आए जैसे प्रश्नों से परेशान होती हैं। साथ ही शारीरिक परेशानी, आर्थिक परेशानी उन्हें डिप्रेशन की ओर खींच ले जाता है। इसलिए महिलाओं को भी घर से बाहर निकलना चाहिए। पार्कों में जाना चाहिए। आउटिंग करना चाहिए और खुश रहने के तरीके ढूंढने चाहिए। आखिर यह जिंदगी आपकी है। किसी और के लिए अपने आप को आप क्यों परेशान कर रही हैं। जिंदगी बड़ी नाजुक होती है इसे करीने से जीना चाहिए।