दुखदः एक परिवार के अलावा किसी की नहीं हुई कांग्रेस

अमित श्रीवास्तव

लखनऊ। नेहरू-गांधी परिवार पर अक्सर यह आरोप लगते रहे कि कांग्रेस उनकी बपौती है। यह आरोप कभी-कभी सही भी साबित हो जाते हैं। वर्तमान राजनीति के वरिष्ठतम सदस्य रहे नारायण दत्त तिवारी चार बार कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे। उनके संसदीय जीवन की वरिष्ठता का रिकार्ड अब दूसरा शायद ही कोई तोड़ पाने में सफल हो सके। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे तिवारी विदेश, वाणिज्य और वित्त समेत चार विभागों के कैबिनेट मंत्री तथा आंध्रप्रदेश के राज्यपाल रह चुके थे। यूपी की पहली विधानसभा में वर्ष 1952 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनकर आए तिवारी आधा दर्जन से अधिक बार राज्य विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके अलावा यूपी विधान परिषद तथा केंद्र के दोनों सदनों लोकसभा और विधानसभा के सदस्य रहे तिवारी की विद्वता, कर्मठता और मृदुभाषिता से वे लंबे समय तक प्रदेश के जनमानस पर छाए रहे।

गमगीन परिजनों को ढांढस बंधाती काबीना मंत्री और पूर्व कांग्रेस नेता रीता बहुगुणा जोशी

आज जब पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका पार्थिव शरीर लखनऊ पहुंचा तो कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी तो दिखे लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर समेत कांग्रेस के आला पदाधिकारी भी गायब रहे, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी, नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी, बसपा के नम्बर दो नेता सतीश मिश्रा समेत कई वर्तमान और पूर्व मंत्री मौजूद रहे। वहीं सूबे के राज्यपाल रामनाइक, बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन भी विधानभवन उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव भी विधानभवन पहुंचे और अपने राजनीतिक गुरु नारायण दत्त तिवारी को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित से साथ श्रद्धांजलि अर्पित की।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं यूपी उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित करते कांग्रेस के इकलौते नेता प्रमोद तिवारी

पत्नी उज्ज्वला शर्मा और पुत्र रोहित के साथ डॉ. दिनेश शर्मा लेकर आए पार्थिव शरीर

पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का पार्थिव शरीर लेने सूबे के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा लेने गए थे। पूरे सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर को वह जैसे ही लखनऊ एयरपोर्ट लेकर पहुंचे, श्रद्धांजलि देने वालों को तांता लग गया। आश्चर्य रहा कि एक बार के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे तिवारी का पार्थिव शरीर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय नहीं ले जाया गया। हालांकि इस बावत कांग्रेसियों के बड़े नेताओं ने सफाई दी और कहा कि तिवारी के परिजनों से तिवारी जी का पार्थिव शरीर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए कांग्रेस दफ्तर लाने का कई बार आग्रह किया गया, लेकिन उनके परिजनों ने एक न सुनी। हालांकि दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उनके दिल्ली स्थित सरकारी निवास पर जाकर अपने श्रद्धासुमन अर्पित करने की खबर है। सूबे के राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख बतौर सरकारी प्रतिनिधि उनके पार्थिव शरीर को लेकर उत्तराखंड के पंतनगर गए हैं। सूत्रों का कहना है कि अपने निजी पैसे से प्रदेश कार्यालय की जमीन खरीदने में तिवारी ने प्रदेश कार्यालय की मदद की थी।

पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अपने राजनीतिक गुरु को दी श्रद्धांजलि

भूल जाने की पुरानी आदत है कांग्रेसियों की

पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह  राव जैसी शख्सियत को भी कांग्रेसीजन उस समय भूल गए, जब उन्होंने अंतिम सांस ली। देश की बदहाल आर्थिक व्यवस्था को ढर्रे पर लाने वाले प्रधानमंत्री की याद में पूरे देश की आंखे जरूर नम हो गई थीं लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष ने उनके पार्थिव शरीर को एआईसीसी लाना मुनासिब नहीं समझा था।

23 दिसंबर, 2004 को दिल्ली में नरसिम्हा राव का निधन हुआ था। वैसे तो उनकी मौत से काफी पहले ही कांग्रेस उन्हें राजनीतिक रूप से निर्वासित कर चुकी थी, लेकिन लोगों को उम्मीद थी कि शायद मौत के बाद पार्टी उनके प्रति सम्मान दिखाएगी। लेकिन पार्टी मुख्यालय में राव के लिए कोई श्रद्धांजलि सभा तक आयोजित नहीं होने दी गई। कहा जाता है कि केंद्र की यूपीए सरकार ने तुरत-फुरत यह इंतजाम कर दिया कि राव का अंतिम संस्कार दिल्ली की बजाय हैदराबाद में किया जाए। संजय बारू ने अपनी किताब – द एक्सीडंटल प्राइममिनिस्टर – में लिखा है कि राव के बेटे और बेटी उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में ही करना चाहते थे।

आर्थिक उदारीकरण के जनक पीवी नरसिम्हा राव को आज भी याद करती है भारत की जनता

सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने बारू से, जो कि खुद भी आंध्र प्रदेश से ही हैं, उन्हें ऐसा न करने के लिए समझाने को कहा था। बाद में इस काम में शिवराज पाटिल और आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वायएस राजशेखर रेड्डी को लगाया गया। जबकि राव के बेटे ने उनके अंतिम संस्कार का फैसला कांग्रेस पर छोड़ दिया था और लेकिन पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने संजय बारू को फोन करके कहा कि नरसिम्हा राव का अंतिम संस्कार दिल्ली में संभव नहीं है।

जबकि नरसिम्हा राव के कैबिनेट सचिव पीसी अलेक्जेंडर ने अपनी किताब ‘हाफ लॉयन : हाउ पीवी नरसिम्हा राव ट्रांसफॉर्म्ड इंडिया’ में राव के एक कथन का उल्लेख किया है। नरसिम्हा राव का कहना था, ‘जैसे इंजन ट्रेन की बोगियों को खींचता है वैसे ही कांग्रेस के लिए यह जरूरी क्यों है कि वह गांधी-नेहरू परिवार के पीछे-पीछे ही चले?’

पूर्व मुख्यमंत्री और मध्यप्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव की भोपाल में मृत्यु के बाद जब उनके पार्थिव शरीर को लखनऊ लाया गया, तब कांग्रेस के कई दिग्गज उनके सरकारी आवास पर जरूर जुटे लेकिन मॉल एवेन्यू स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर उनका पार्थिव शरीर नहीं लाया गया। यहां भी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेसी नेता फिसड्डी साबित हुए।

यूपी के राज्यपाल रामनाइक ने एक बार खैर-खबर ली थी मध्य प्रदेश के राज्यपाल और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री की (फाइल फोटो)

(लेखक यूपी के पत्रकार हैं, वर्तमान में तमिलनाडु-केरल प्रवास पर है)