दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन  सम्पन्न हुआ

अरुण वर्मा
काठमाण्डू(नेपाल)। नेपाल के रूपनदेही स्थित लुम्बनी में चल रहे दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का दिन सोमवार को नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के उद्बोधन के साथ समाप्त हो गया। जानकारी के अनुसार दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन भगवान बुद्ध की जन्म स्थली लुम्बिनी में होना गर्व की बात है। उक्त बातें बुद्ध जयन्ती के अवसर पर लुम्बिनी में आयोजित दो दिवसीय 2562वा अन्तरतष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन के समापन अवसर पर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि 24 देशो से आये हुए बौद्ध अनुयायियों को सम्बोधित करते हुए कही।उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से पूरे विश्व मे भगवान बुद्ध के उपदेशों का प्रचार होगा। प्रधानमंत्री श्री ओली ने उपस्थित अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय से लुम्बिनी को विश्व शांति केंद्र के रूप में स्थापित करने की अपील करते हुए कहा कि विश्व को अंधकार से प्रकाश की ओर लेन वाले पथ-प्रदर्शक गौतम बुद्ध सदैव से मानव समुदाय के लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं। गौतम बुद्ध का जीवन समुदाय के प्रति सेवा, दया तथा त्याग का उदाहरण रहा है। उन्होंने मानव के दुःखों के निवारण हेतु अभिजात्य जीवन का त्याग कर कष्टकारी संन्यासी का जीवन व्यतीत किया। महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं से विश्व जगत का परिचय कराने के उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का आयोजन किया गया था।
इससे पूर्व सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे रेल मंत्रालय भारत सरकार के प्रोफेसर अरविंद आलोक ने कहा कि भारत-नेपाल दोनो देशो की संस्कृतियों में बहुत मेल है ,और भारत-नेपाल दोनो मैत्री देश है।इस अन्तरतष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन से भारत-नेपाल के संबंधों में मजबूती आएगी।
लुम्बिनी विकास कोष के उपाध्यक्ष भिक्षु मैतैय पुत्त ने सम्मेलन में आये हुए अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित कर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन के समापन की घोषणा की। इस अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में 24 देशों के अनुयायियों ने हिस्सा लिया तथा 15 देशों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया एव 31 कार्यपत्र प्रस्तुत किये गए।