‘नया लुक’ की खबर का असर, आरोपी शिक्षक को बीएसए ने किया निलम्बित

  • मंत्री की खासमखास खंड शिक्षा अधिकारी जायसवाल के कारनामे भी अनंत
  • पढ़ाई के अलावा हर कार्य में लिप्त रहते हैं गाजीपुर बलराम के शिक्षक

आनन्द प्रकाश शुक्ल 

लखनऊ। सूबे की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार जिस स्वच्छ छवि और जीरो टॉलरेंस पर काम करने की कोशिश कर रही है, उसकी छवि पर बट्टा लगाने में उसके अधिकारी कर्मचारी उसी तेजी से जुटे हुए हैं। हालांकि सरकार को जैसे ही अधिकारियों/ कर्मचारियों के खिलाफ सबूत हाथ लगते हैं, कार्रवाई से नहीं  चूकती। ताजा मामला राजधानी के पूर्व माध्यमिक विद्यालय गाजीपुर बलराम का है। मामला जब नया लुक ने उच्च अधिकारियों के कान तक पहुंचाया तो दोषी प्रधानाध्यापिका के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हुई।

कल नौ जनवरी को पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सुबह बच्चों से स्कूल की पुताई कराए जाने की  एक खबर वीडियो (विजुअल) सहित ‘नया लुक’ ने प्रकाशित किया था। उसी खबर को संज्ञान  में लेते हुए बाल आयोग की सदस्य प्रीति वर्मा ने तेजी दिखाई और सख्त कार्रवाई के निर्देश लखनऊ के बीएसए डॉ. अमरकांत को दिए। वहीं अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा डॉ. प्रभात कुमार ने खबर को संज्ञान में लेते हुए निदेशक से पूरा मामले में जांच के आदेश दिए और कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अफसरों के एक्शन और बाल आयोग की सदस्य के आदेश को देखने के बादबीएसए डॉ. अमरकांत हरकत में आए और 24 घंटे के अंदर जांच पूर्ण कर डाली। बीएसए की जांच में प्रधानाध्यापक मंजू श्री प्रथम दृष्टया दोषी मिलीं तो उन्हें तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया।

बताते चलें कि ग़ाज़ीपुर बलराम स्कूल की प्रधानाचार्य ने लिखित में भी स्वीकारा था कि बच्चे स्कूल में पढ़ने वाले ही हैं, जो पुताई कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकारा थी कि तीन बच्चों की आयु 14 वर्ष से कम है। प्रधानाध्यापकका कहना है कि ठेकेदार ने बच्चों को काम पर लगाया था जबकि वीडियो में वह स्वयं काम करवाते दिख रही थीं और बता भी रही थीं। इसके अलावा उन्होंने किसी भी ठेकेदार को काम नहीं दिया था। उन्होंने बच्चों को नाम काटने की धमकी देकर कहा था कि कह दो मैम ने पुताई करने को नहीं कहा था।

बड़ा झोलझाल है सरकार के इस विभाग में

पूर्व माध्यमिक विद्यालय ग़ाज़ीपुर बलराम की प्रधानाध्यापिका मंजू श्री पर कार्रवाई करके विभाग भले ही इस कथा की इतिश्री करना चाहे लेकिन इस विभाग की कहानियां अनंत हैं। इससे पहले भी ‘संवाददाता’ इस विभाग पर एक एक्सक्लुसिव खबर लिख चुका है। खबर के अनुसार गाजीपुर बलराम में तैनात अनुदेशक (खेल) सुमित पाल खंड शिक्षा अधिकारी नूतन जायसवाल और प्रधानाध्यापिका मंजू श्री की मिलीभगत से मनमानी पर आमादा है। बताते चलें कि सुमित पाल शिक्षक जैसे पद का दुरुपयोग करते हुए दोहरी कमाई में जुटा हुआ है। वह तनख्वाह तो लेता हैखेल अनुदेशक का लेकिन वह बिना अवकाश लिए रेफरी की भूमिका निभाने राजधानी तथा लखनऊ से बाहर चला जाता है। हालांकि उसकी पोस्टिंग तो पूर्व माध्यमिक विद्यालय ग़ाज़ीपुर बलराम लखनऊ ज़ोन 2 में ही है। लेकिन सेटिंग में माहिर पाल हफ़्तों बाहर रहता है और रिकार्ड रजिस्टर में उसकी छुट्टी एक दिन भी दर्ज नहीं होती।

वापस आने पर विद्यालय की प्रधानाध्यापक पूर्ण सहयोग करती हैं और छुट्टी के दिन के खाली पड़े कॉलम में दस्तखत करवा लेती हैं। इतना ही नहीं डब्ल्यूआरसी ज्योति ने जब यह ख़ामी पकड़ी और खंड शिक्षा अधिकारी नूतन जयसवाल को सूचित किया तो उन्होंने कार्रवाई करने की बजाय उन्हें ही दो बातें सुना दिया। सूत्रों का कहना है कि नूतन जायसवाल और मंजूश्री के इस कारनामे की पूरी खबर लखनऊ के बीएसए डॉ. अमरकान्त को है लेकिन वह‘महाभारत के धृतराष्ट्र’ की भूमिका में खुद को रखते हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारी उसकी निजी कमाई में कुछ हिस्सेदारी निभाती हैं और उसे बाहर जाने की खुली छूट दे रखी है।

बताते चलें कि सुमित पाल कुछ दिन पहले दो दलित बच्चों को खूब बेरहमी से पीट भी चुका है। ख़ून से लथपथ उन बच्चों को दूसरे शिक्षक अस्पताल भी ले गए थे और इस घटना की लिखित शिकायत खण्ड शिक्षा अधिकारी नूतन जायसवाल से की थी। लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और सुमित को अभय दान दे दिया था। देखना यह है कि मंजू श्री के निलम्बन के बाद सुमित अपनी इसी दिनचर्या में रहता है या फिर वह अपनी मूल पोस्टिंग पर कार्य करता है। मो. शाहिद स्टेडियम में प्रतिदिन व्यायाम करने वाले ओपी राठौर कहते हैं कि हॉकी में रेफरी बनने की कीमत एक छोटे से टूर्नामेंट में तकरीबन 20 से 25 हजार मिलती है। बड़ा टूर्नामेंट हो तो यह राशि 40 से 50 हजार रुपये हो जाता है। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा डॉ. प्रभात कुमार कहते हैं कि खबर को संज्ञान में लेते हुए अधिकारियों से पूरी जानकारी मांगी है। जांच में जो भी दोषी मिलेगा उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं बेसिक शिक्षा के निदेशक सर्वेंद्र विक्रम ने दिन भर फोन नहीं उठाया। सूत्रों का कहना है कि निदेशक केवल उन्हीं का फोन उठाते हैं, जिनसे उनका कोई निजी मामला हो, अन्यथा वह ज्यादातर फोन स्वयं से दूर ही रखते हैं।

योगी सरकार के शिक्षा अभियान को उन्हीं के शिक्षक लगा रहे पलीता

यूपी के मुख्यमंत्री भले ही बेसिक शिक्षा विभाग में तेजी लाने की कोशिश कर रहे हों लेकिन उसमें तेजी आती कहीं से दिखाई नहीं देती है। शिक्षा दान करने वाले शिक्षक ज्यादा कमाई के चक्कर में हर तरह के अनुचित कार्य में खुद को झोंके हुए हैं। बात सुमित पाल की करें तो नियुक्ति के बाद इस शख्स ने लखनऊ विश्वविद्यालय से MpEd. की रेग्युलर डिग्री तो ले लेता है लेकिन परीक्षा के लिए भी एक दिन अवकाश नहीं लेता है और खंड शिक्षा अधिकारी तथा प्रधानाध्यापक की मिलीभगत से वह कुछ भी करके नौकरी कर लेता है।

नूतन जायसवाल खुद को बताती हैं मंत्री अनुपमा जायसवाल की खास

सूत्रों का कहना है कि खंड शिक्षा अधिकारी नूतन जायसवाल खुद को बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल की दूर की रिश्तेदार और उनकी गुडबुक में शामिल लेडी बताती हैं। सूत्रों का दावा है कि इसी अहंकार में वह किसी भी अधिकारी की परवाह नहीं करतीं और मनमानी करती रहती हैं।