नशे में धुत्त डॉक्टर के इंजेक्शन लगाते ही मरीज की हुई मौत

  • परिजनों ने किया हंगामा तो भाग खड़े हुए डॉक्टर
  • परिसर स्थित चिकित्सक आवास पर हर जगह बिखरे मिले दारू के बोतल

लाल बाबू गौतम

देवरिया। कक्षा पांच के हिंदी पाठ्य पुस्तक में एक गद्य पाठ था- अंधेर नगरी-चौपट राजा। पढ़ने में बड़ा मजा आता था, कारण वहां अंधेरगर्दी ही पढ़ने को मिल रही थी। बाल मन ने तभी शिक्षक से सवाल कर बैठा था- गुरुजी क्या ऐसा आम जीवन में भी होता है तो गुरुजी का जवाब था- बड़े हो जाओगे तो कभी-कभी तुम्हें दिखाई देगा, लेकिन तुम कुछ कर नहीं पाओगे। यह किस्सा कल आधी रात को याद आ गया, जब खबर मिली कि डॉक्टर से इंजेक्शन लगाते ही मरीज की मौत हो गई तो सहसा लगा कि गम्भीर मरीज होगा, तो हो सकता है। लेकिन गौरी बाजार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात तो अंधेर नगरी चौपट राजा वाली कहानी की तरह ही था।

यूं तो सूबे के स्वास्थ्य मंत्री विभागीय मंत्री से ज्यादा सरकार के प्रवक्ता नजर आते हैं, वह प्रमाणित भी जगह-जगह होने लगा है। पीएचसी पर तैनात डॉक्टरों ने हॉस्पिटल को मयखाना में तब्दील कर दिया है, लेकिन वहां किसी जिम्मेदार की नजर है कि पड़ती ही नहीं। गौरीबाजार के राम प्रवेश कहते हैं कि सीएमओ से वहां शिकायत करना मतलब किसी दीवार में अपना सिर पटक देना। मैंने एक बार शिकायत करने की हिम्मत जुटाई थी, उन्होंने मुझे डांट-फटकार कर भगा दिया। कुछ दिन बाद खबर आई कि साहब कमीशनबाजी में धुरंधर हैं।

वहीं सपा नेता शाकिर अली कहते हैं कि विभागीय मंत्री के पास इतनी फुरसत कहां है, जो वो सीएमओ को ताकीद कर सकें कि हर हाल में सप्ताह में एक दिन अस्पतालों का दौरा करें और जांच पड़ताल करें। वह या तो सरकार की चाटुकारिता में व्यस्त रहते हैं या फिर विभागीय जोड़-घटाने में। वहीं बसपा के अभय नाथ त्रिपाठी कहते हैं कहते हैं कि योगी सरकार की इससे बड़ी मूर्खता क्या होगी कि उसने अनुभवहीन शख्स को स्वास्थ्य जैसा बड़ा महकमा सौंप दिया।

बात कल आधी रात की है। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के गौरी बाजार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर द्वारा लगाए गए इंजेक्शन से महिला की मौत हो गई। महिला की मौत होते ही पीएचसी पर लोगों का हंगामा शुरू हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि डॉक्टर के बेडरूम में अंग्रेजी शराब और ग्लास मिले हैं। पूरा कमरा दारू को बोतल और सिगरेट के डिब्बे से अटा पड़ा था। पीएचसी पर तैनात डॉक्टर नशे में धुत रहते हैं और नशे में धुत होकर वह रात में लोगों का इलाज करते हैं।

यह घटना भी शराब के नशे में हुई है। उन्होंने महिला को इंजेक्शन लगा दिया और इंजेक्शन लगने के थोड़ी देर बाद ही महिला की मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर हर रोज शराब के नशे में यहां इलाज करते हैं और मरीज इसका विरोध करते हैं तो उन्हें गाली देकर भगा देते हैं। यह प्रक्रिया जोरों से चल रही है लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। यहां पर तैनात दोनों डॉक्टर अपनी मनमानी हर रोज करते हैं, जिसके कारण गरीब महिला,किसान, मजदूरों की बीमारी घटने के बजाय बढ़ जाती है और आए दिन मौतें होती रहती है। लेकिन योगी सरकार के जिम्मेदार अधिकारी इस पर कार्रवाई करने से कतराते रहते हैं। देखना यह है कि इस महिला की मौत के बाद योगी सरकार के अधिकारी सोते रहते हैं कि इस पर कार्रवाई भी करते हैं।

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में बतौर विशेष सचिव तैनात डॉ. नीरज शुक्ला कहते हैं कि इस तरह की घटना की जानकारी मुझे आपसे मिली है। मैं तत्काल इसकी जांच कराऊंगा और दोषी डॉक्टर को उसकी सजा निश्चित तौर पर मिलेगी। वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं गौरी बाजार के ओम प्रकाश शुक्ल सरकार से दरख्वास्त करते हैं कि सरकार अपने तंत्र से इस तरह छोटे-छोटे अस्पतालों का निरीक्षण जरूर करवाए। वह कहते हैं कि जब जूनियर अफसरों में दिल से बड़े अफसरों का डर खत्म हो जाता है तो वह तानाशाही पर उतर आते हैं। य़ह घटना कुछ उसी तानाशाही का परिणाम है।