नहीं रहे दो राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके एनडी तिवारी

  • जाते-जाते एक और रिकार्ड बना गए नारायण दत्त तिवारी
  • दिल्ली के एक निजी अस्पताल में आज दोपहर बाद ली अंतिम सांसें
  • आंध्र के राज्यपाल रहते हुए एक सेक्स स्कैंडल में उछला था उनका नाम
  • पत्नी सुशीला के पुत्र हक मुकदमे के समय भी लगातार सुर्खियों में थे तिवारी

राणा विजय कुमार/प्रमुख संवाददाता

नई दिल्ली। यूपी-उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्र में कई बार काबीना मंत्री रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता एनडी तिवारी का गुरुवार दोपहर बाद करीब 2.20 बजे निधन हो गया। बेहद बुजुर्ग नेता तिवारी पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी उनके निधन पर निधन पर शोक जताया है। संयोग ही है कि एनडी तिवारी की सांसें उसी दिन थमी जिस दिन उन्हें लोग जन्म दिन की बधाइयां दे रहे थे और समर्थक उनका जन्म दिन मनाने की तैयारी कर रहे थे।

बताते चलें कि साल 1952 में पहली बार विधायक बने एनडी तिवारी वर्ष 1976 में यूपी के मुख्यमंत्री थे। वह पांच बार यूपी में विधायक रहे और तीन बार एकल उत्तर प्रदेश के सीएम की कुर्सी कब्जाई। साल 1980 में वह पहली बार लोकसभा पहुंचे और इंदिरा गांधी सरकार में उन्हें योजना मंत्रालय का कार्यभार मिला था। केंद्र में उनके काम-काज को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने बाद की सरकारों में उन्हें वित्त और विदेश जैसे कई बड़े मंत्रालयों को दिया था। वरिष्ठ पत्रकारों की मानें तो खांटी कांग्रेसी एनडी तिवारी, राजीव गांधी की मौत के बाद प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे थे, लेकिन नैनीताल लोकसभा से चुनाव हारने के बाद वह पीएम नहीं बन सके और किस्मत पीवी नरसिम्हाराव के पास पहुंच गई। लोकतांत्रिक देश की सबसे बड़ी कुर्सी के इतने करीब होने के बावजूद फिसलने की वजह से वह कांग्रेस से अलग हो गए थे लेकिन बाद में सोनिया गांधी के आने के बाद फिर से कांग्रेस में वापस आ गए।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलते दिग्गज कांग्रेसी तिवारी

नवम्बर 2000 में जब उत्तराखंड राज्य का गठन के बाद साल 2002 में ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बन गए। किसी भी राजनेता के खाते में दो राज्यों के मुख्यमंत्री बनने का रिकार्ड नहीं है। इस मामले में एनडी तिवारी इकलौते राजनेता हैं। साल 2007 में उत्तराखंड हारने के बाद कांग्रेसी आलाकमान ने उन्हें आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बना दिया, जहां से उनके करियर को पूर्ण विराम लगा। साल 2009 में एनडी तिवारी एक सेक्स स्कैंडल में फंस गए। एक तेलगू चैनल ने तीन लड़कियों के साथ उनकी तस्वीर दिखाई, जिसके बाद उन्हें राज्यपाल पद से इस्तीफा देना पड़ा।

मूलतः उत्तराखंड के निवासी थे एनडी तिवारी

18 अक्टूबर 1925 को अखंड उत्तर प्रदेश के नैनीताल से सटे बलूटी गांव में उनका जन्म हुआ था। अब यह गांव उत्तराखंड के नैनीताल जिले में है। उनके पिता पूर्णानंद तिवारी वन विभाग में अधिकारी थे। तिवारी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए, एलएलबी की पढ़ाई की थी। वह अपने पीछे एक पत्नी सुशीला और पुत्र रोहित तिवारी को छोड़ गए हैं। हालांकि राजनीति में वह अपने पुत्र रोहित को कहीं स्थापित नहीं कर पाए। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह से नजदीकियों की वजह से सपा सरकार में रोहित तिवारी परिवहन निगम के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए थे।

ऐसा है एनडी तिवारी का राजनीतिक जीवन

साल 1952 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से विधानसभा सदस्य बनने के बाद दोबार 1957, 1969, 1974, 1977, 1985, 1989 और 1991 में विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए। 1976 से अप्रैल 1977, तीन अगस्त 1984 से 10 मार्च 1985 और 11 मार्च 1985 से 24 सितंबर 1985 और 25 जून 1988 से चार दिसंबर 1989 तक वह देश के सबसे बड़े सूबे यूपी के मुख्यमंत्री रहे। हालांकि दिसंबर 1985 से 1988 तक वह राज्यसभा के सदस्य रहे।

वर्ष 1969, 1970, 1971-1975 तक उप्र मंत्रिमंडल में मंत्री रहने के बाद वर्ष 1977-79 और 1989-91 तक विधानसभा में नेता विरोधी दल की कुर्सी उन्होंने बखूबी संभाली थी। जून 1980 से अगस्त 1984 तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में पहली बार मंत्री रहे। सितंबर 1985 से जून 1988 तक केंद्र में उद्योग, वाणिज्य, विदेश और वित्त मंत्री रहे। जनवरी 1985 से मार्च 1985 तक विधान परिषद सदस्य रहे। नवंबर 1988 से जनवरी 1990 तक विधान परिषद सदस्य रहे। वर्ष 1994 में अध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस कमेटी। वर्ष 1995-96 में अध्यक्ष आल इंडिया इंदिरा कांग्रेस तिवारी, वर्ष 2002 से 2007 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। करियर के अंत में वह 22 अगस्त 2007 से 26 दिसंबर 2009 तक आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे।

प्रसन्नमुद्रा में मीडिया के बातचीत करते थे एनडी तिवारी