पितृ पक्ष में क्या करें क्या न करें तो होंगे पितर सन्तुष्ट …!

महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पाण्डेय के अनुसार पितृपक्ष 25.09.2018 मंगलवार को प्रातः 07:42 से आरम्भ
इस वर्ष पितृ पक्ष 15 दिन का है। “मध्याह्ने श्राद्धम् समाचरेत”अतः श्राद्ध कार्य कभी भी मध्याह्न में ही करना चाहिए ! इस वर्ष षष्टी तिथि का लोप है, अतः षष्टी तिथि का श्राद्ध पञ्चमी तिथि रविवार को करें।

इस वर्ष पितृ पक्ष के श्राद्ध की तिथियाँ निम्नवत है।

प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध मंगलवार

द्वितीया तिथि श्राद्ध बुधवार

तृतीया तिथि श्राद्ध गुरुवार

चतुर्थी तिथि श्राद्ध शुक्रवार

पञ्चमी तिथि श्राद्ध शनिवार

षष्टी तिथि श्राद्ध रविवार

सप्तमी तिथि श्राद्ध सोमवार

अष्टमी तिथि श्राद्ध मंगलवार

मातृ नवमी श्राद्ध बुधवार

दशमी तिथि श्राद्ध गुरुवार

एकादशी तिथि श्राद्ध शुक्रवार

द्वादशी तिथि श्राद्ध शनिवार

त्रयोदशी तिथि श्राद्ध रविवार

चतुर्दशी तिथि श्राद्ध सोमवार

अमावस्या श्राद्ध व पितृ विसर्जन मंगलवार।

इसी दिन पितृ विसर्जन का पर्व मनाया जाएगा।। बहुत लोग इस बात से भ्रमित रहते है कि मैंने इस वर्ष अपनी कन्या या पुत्र का विवाह आदि मांगलिक कार्य किया है अतः इस वर्ष पितृ पक्ष का जल दान,अन्न दान व पिण्ड दान न करें यह अशुभ है। निर्णय सिंधुकार के कथनानुसार सभी मांगलिक कार्यों में पितृ कार्य उत्तम व आवश्यक माना गया है,  तभी तो हम जनेऊ, विवाह आदि मांगलिक कृत्य करने से पूर्व नान्दीमुख श्राद्ध अवश्य करते हैं। अभिप्रायः यह है कि हमारे यहाँ होने वाले शुभ कार्य मे किसी भी प्रकार का विघ्न न हो। यह पितृ पक्ष वर्ष में 1वार आश्विन कृष्ण पक्ष में पितरों की पूजा हेतु आता है।

कहाँ गया है कि देवताओं की गयी पूजा में कदाचित भूल होने पर देवता क्षमा कर देते हैं, परन्तु पितृ कार्य में न्यूनता व आलस्य प्रमाद करने से पितर असन्तुष्ट हो जातें है, जिससे हमें रोग, शो आदि भोगने पड़ते हैं।शास्त्रों में हर जगह नित्य देखने को मिलता है कि मातृ देवो भव, पितृ देवो भव। अतः माता -पिता के समान कोई देवता नही उनकी संतृप्ती व आशीर्वाद हमें जीवन मे हर प्रकार का सुख देता है। अतः इस भ्रान्ति को मन मस्तिष्क में न पालकर इस पितृ पर्व को हर्षोल्लास पूर्वक मनाना चाहिए ! जिसमें नित्य जल दान व तिथि पर अन्न वस्त्र आदि दान करना चाहिए। जिनके पिता के मृत्यु तिथि ज्ञात न हो उनका श्राद्ध पितृविसर्जन को करें।

विशेष

सिर का मुण्डन पितृ पक्ष के भीतर या तिथि पर नही करना चाहिए ! क्यों कि धर्मसिंधु में यह बात कही गयी है कि पितृ पक्ष में सिर के बाल जो भी गिरते है वो पितरों के मुख में जातें हैं। अतः सिर के वाल पितृ पक्ष आरम्भ होने के 1 दिन पूर्व बनावलें या भूल वश नही बनवा पाते तो पितृ विसर्जन के दिन अपराह्न काल मे बनवावें।
ऐसा करने से पितर सन्तुष्ट होते है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे कुल की वृद्धि व यश कीर्ति लाभ आरोग्यता व मोनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।