पुलिस के बूटों तले दबा दी जाती है मजलूमों की आवाज

थानेदार को सत्ताधारी विधायक के करीबी होने का है रौब

नरेन्द्र गुप्ता

गोंडा। प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश की कानून व्यवस्था सुधारने के लिए चाहे जितनी ही कोशिशें ही क्यों न कर ले लेकिन यह तो जिले की तरबगंज थाने की पुलिस है साहब ,जो कानून को अपनी जागीर समझते हुये पीड़ितों व मजलूमों की आवाजों को रसूखदारों के इशारों पर अपने बूटों तले रौंद देती है,ऐसा हो भी क्यों नहीं ,एक सत्ताधारी विधायक के खास होने का है जो रौब।जिसके चलते इस थाने में पीड़ितों की आवाजें दबा उन्हें सिसकने पर मजबूर कर दिया जाता है। जिस कड़ी में तजा है यह मामला, जिले के तरबगंज थाना क्षेत्र के बौरिहा गांव के प्रवीण कुमार का गांव के ही विनय प्रताप सिंह, संजय सिंह से घर के सामने आबादी की जमीन को लेकर न्यायालय में मुकदमा चल रहा है।

शुक्रवार को जिसमें दबंग विनय प्रताप सिंह, संजय सिंह और उनके पिता दिन मे जेसीबी तथा मजदूर लेकर पहुंचे और आबादी की जमीन पर जबरन कब्जा करने लगे। तो पीड़ित प्रवीण सिंह ने थाना प्रभारी तरबगंज संजय दूबे से न्याय की गुहार लगाते हुये जमीन पर दबंग आरोपियों द्वारा कब्जे की बात बताई तथा अदालत में चल रहे मुकदमे का हवाला दिया व कागजात दिखाया।इस पर न्याय तो दूर थाना प्रभारी संजय दूबे ने पीड़ित को ही उठाकर लॉकअप में डाल दिया। तथा दिखावे के लिए आरोपी पक्ष के भी एक आदमी को बैठा लिया, लेकिन दबंग आरोपी इधर पुलिस के शह पर कब्जा करते रहे। पीड़ित प्रवीण कुमार को पुलिस ने रात्रि साढ़े आठ बजे के करीब छोड़ा ,लेकिन तबतक दबंग आरोपियों ने विवादित भूमि पर दीवार खड़ी कर जमीन पर कब्जा कर लिया था। जब इसकी सूचना देने पीड़ित फिर थाने पहुंचा तो थाना प्रभारी उसे ने गाली-गलौज करते हुए थाने से भगा दिया।

पीड़ित ने अपनी माता, बेटी आदिती, पुत्र अरनेश तथा भांजी अस्मिता सिंह के साथ अपर पुलिस अधीक्षक महेंद्र कुमार से मिलकर शिकायतीपत्र दिया। दिन के साढ़े एक बजे के करीब घर वापस जाते समय देहात कोतवाली क्षेत्र के बिजली भवानी के पास दबंग आरोपी संजय सिंह, विनय प्रताप सिंह, विनोद सिंह सहित अन्य लोगों ने उन्हें रोककर लाठी-डंडे से पिटाई कर दिया, जिससे छह वर्षीय अस्मिता सिंह की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से भाग गये।वहीं पीड़ित परिजनो ने मुख्य रूप से थाना प्रभारी संजय दूबे के ऊपर आरोप लगाते हुये न्याय की गुहार लगाई है।परिजनो का आरोप है कि,थानाप्रभारी ने कार्रवाई की होती तो अस्मिता आज जिंदा होती।

थाना प्रभारी संजय दूबे का विवादों से पुराना नाता रहा है। कुछ समय पूर्व एक स्थानीय पत्रकार मनोज श्रीवास्तव द्वारा लिखी गई खबर पर दबंगों ने उस पर अवैध असलहों के साथ जान लेवा हमला किया।जिसकी सूचना पर ये विवादित थानेदार ने उसे बड़ी मसक्कत के बाद सिर्फ एनसीआर दर्ज कर किनारा कर लिया,जबकि पीड़ित पत्रकार हफ्ते से ऊपर अस्पताल में भर्ती रहा।और भी ऐसे कई मामले हैं जिसमें पीड़ित थानेदार के रवैये से दुखी हो उच्चाधिकारियों के चौखट पर माथा पटकने पर मजबूर हैं। थानेदार का एक सत्ताधारी पार्टी के विधायक से खास संबंध बताता है,अब ऐसे में थानेदार का ऐसा व्यवहार कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

एएसपी क्या कहते हैं
इस संबंध में जब एएसपी महेन्द्र कुमार से बात की गई तो उन्होने बताया कि घटना की जानकारी है और इसकी जाँच सीओ को दे दी गई है,पर जब थानाध्यक्ष के विवादित कार्यशैली पर बात करने की कोशिश की तो वह बचते हुये नजर आये।