बस्ती लोकसभा में अब वापस दिखने लगा है हरीश का असर

राहुल शुक्ल

बस्ती। स्थानीय सांसद हरीश द्विवेदी का नाम एक बार फिर जिले में लोगों की जुबां पर आने लगा है। ‘नया लुक’ संवाददाता ने आज बस्ती जिले की तीन विधानसभाओं का भ्रमण किया और लोगों की प्रतिक्रियाएं लीं। रुधौली विधानसभा क्षेत्र के महुआर ग्राम निवासी परिक्रमा उपाध्याय कहते हैं कि हमारे स्थानीय विधायक जहां कहेंगे, वहीं वोट दिया जाएगा। उन्होंने साफ लहजे में यह तो नहीं कहा कि वह सांसद हरीश को वोट करेंगे, लेकिन उन्होंने यह जरूर बता दिया कि उनका मत कहां जाएगा?

नया लुक संवाददाता जब रुधौली विधानसभा क्षेत्र के मधवापुर गांव पहुंचता है तो वहां एडवोकेट प्रेमशंकर उपाध्याय से मुलाकात होती है, उन्होंने बड़े सहज लहजे में बताया कि राजकिशोर जैसा नेता पूरे मंडल में कहीं नहीं हैं। रामप्रसाद चौधरी पिछड़ों के सर्वमान्य नेता हैं, वहीं हरीश ने जिले के लिए काम किया है। वोट के एक-दो दिन पहले पूरा घराना एक जगह जुटेगा, तभी निर्णय किया जाएगा कि वोट किसे दिया जाए। वहीं खड़े वैद्यानंद उपाध्याय कहते हैं कि यह इलाका पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी का कोर वोटर रहा है, इसलिए लगता है लोग मोदी के नाम पर ही सही हरीश को वोट करेंगे।

  • त्रिकोणीय होती जा रही है यहां की जंग
  • राजकिशोर और रामप्रसाद भी रेस में भाग रहे सरपट

वहीं कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र के विजय कुमार कहते हैं कि राजकिशोर को वोट करने के लिए जनता ने पूरी तैयारी कर ली है। वह कहते हैं कि राजकिशोर जनता की आवाज सीधे सुनते हैं और तुरंत उसका निस्तारण करा देते हैं, जबकि हरीश द्विवेदी के साथ ऐसा नहीं है। पास खड़े भैंसा चौबे के मुन्ना चतुर्वेदी जवाब देते हैं कि हरीश ने जिले के लिए कई बड़े काम किए हैं, इसलिए आप लोग भले वोट न दें, लेकिन हमारे जैसे सैकड़ों युवा हरीश के पीछे खड़े नजर आएंगे। राजनीति के जानकर राजीव द्विवेदी कहते हैं कि पिछले पांच बरसों के दौरान हरीश द्विवेदी की लोकसभा में उपस्थिति 86 प्रतिशत रही। इस दौरान उन्होंने 33 डिबेट में हिस्सा लिया है और 314 प्रश्न सदन में पूछे हैं।

वहीं बस्ती विधानसभा के पीके वर्मा रामप्रसाद की बात करते हैं तो उन्हीं के घराने के मनोज और हेमंत वर्मा राजकिशोर के पक्ष में मतदान की अपील करते हैं। लेकिन उनके पिता ज्ञान वर्मा और चाचा प्रेम चौधरी मोदी के नाम पर वोट डालने की राय व्यक्त करने लगते हैं। कुल मिलाकर अभी लड़ाई में हरीश का पलड़ा भारी है और उन्हें राजकिशोर से कड़ी टक्कर मिलती नजर आ रही है।

बताते चलें कि उत्तर प्रदेश की बस्ती लोकसभा सीट से इस वक्त बीजेपी नेता हरीशचन्द्र द्विवेदी सांसद हैं। भाजपा ने सीट सपा को 33562 वोटों के अंतर से हराकर अपने नाम की थी। बस्ती, यूपी के पुराने शहरों में से एक है, इसका नाम वशिष्ठ मुनि के नाम पर रखा गया है। इस जिले को अति पिछड़ा अनुदान निधि के तहत के विशेष सहायता मिलती है, यहां की औसत साक्षरता दर 56.56% है। इस लोकसभा क्षेत्र में पांच सीटें आती हैं (हर्रैया, बस्ती सदर, रुधौली, महादेवा और कप्तानगंज), जिसमें महादेवा की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।

अस्तित्त्व में आने के बाद से 2004 तक बस्ती की लोकसभा सीट भी अनुसूचित जाती के लिए आरक्षित थी लेकिन 2004 में परिसीमन के बाद यह सामन्य श्रेणी में आ गई। कांग्रेस नेता रामशंकर लाल यहां के पहले सांसद थे, 1967 और 1971 के चुनाव जीतकर कांग्रेस ने इस सीट पर लगातार तीन बार कब्ज़ा किया था, 1977 के लोकसभा चुनाव में भारतीय लोकदल ने यहां पहली बार जीत दर्ज की थी। 1980 और 1984 में यहां कांग्रेस का राज था लेकिन 1989 में यहां जनता दल ने बाजी मारी।

साल 1991 के चुनाव में पहली बार भाजपा ने यहां से जीत दर्ज की और उसके बाद 1996, 1998 और 1999 में यहां भाजपा का ही वर्चस्व रहा और श्रीराम चौहान यहां से तीन बार सांसद बने लेकिन साल 2004 में बहुजन समाज पार्टी ने बीजेपी के विजय रथ को रोक दिया और यहां से भारी जीत दर्ज की, साल 2009 में भी यहां हाथी का ही जादू बरकरार रहा लेकिन साल 2014 में ये सीट फिर से भाजपा के खाते में आ गई और हरीश चन्द्र द्विवेदी यहां से सांसद चुने गए। इस सीट पर नंबर दो पर SP के ब्रजकिशोर सिंह डिम्पल, नंबर 3 पर BSP के रामप्रसाद चौधरी और नंबर-4 पर कांग्रेस थी। इस बार कांग्रेस के सिम्बल पंजे पर जहां सपा के पूर्व काबीना मंत्री राजकिशोर मैदान में हैं, वहीं गठबंधन की ओर से बसपा के चुनाव चिन्ह ‘हाथी’ को लेकर रामप्रसाद अपनी चुनावी बैतरनी पार करने की जुगत में हैं। साल 2014 में यहां पर 1787476 मतदाताओं ने अपने मतों का इस्तेमाल किया था, जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 53 प्रतिशत और महिला मतदाताओं की संख्या 46 प्रतिशत थी। बताते चलें बस्ती की 84 प्रतिशत आबादी हिंदू और 14 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिमों की है।

2011 की जनगणना के अनुसार बस्ती की आबादी 24.6 लाख है और उत्तर प्रदेश की 31वां सबसे घनी आबादी वाला जिला है। क्षेत्रफल के आधार पर यह 26वां सबसे छोटा जिला है। 24.6 लाख की आबादी में 12.6 लाख (51%) पुरुष  और 12.1 लाख (49%) महिलाएं हैं। जातिगत आधार पर 79 फीसदी आबादी सामान्य वर्ग से जुड़े हैं जबकि  21%  आबादी अनुसूचित जाति के लोग रहते हैं। धर्म आधारित जनगणना के आधार पर 85 फीसदी हिंदू आबादी और 14.81 फीसदी आबादी मुस्लिम समाज की रहती है। लिंगानुपात के मामले में प्रति हजार पुरुषों में 963 महिलाएं हैं जबकि सामान्य वर्ग में लिंगानुपात 965 है। साक्षरता के मामले में बस्ती की 67% आबादी साक्षर है जिसमें 78% पुरुष और 56% महिलाएं शामिल हैं।

रुधौली विधानसभा सीट पर भी बीजेपी का कब्जा है, यहां से संजय प्रताप जयसवाल ने बसपा के राजेंद्र प्रसाद चौधरी को 21,805 मतों के अंतर से हराया था। पिछले विधानसभा चुनाव में बस्ती सदर से भी बीजेपी ने जीत हासिल की थी। दयाराम चौधरी ने 42,594 मतों के अंतर से जीत हासिल करते हुए सपा के महेंद्र यादव को हराया था। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित महादेवा विधानसभा से बीजेपी के रविकुमार सोनकर ने बसपा के दूधराम को 25,884 मतों के अंतर से हराया था।