बीजेपी के लिए आसान नहीं है पांचों राज्य के विधानसभा चुनाव

 

लखनऊ। पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव ने देश का सियासी पारा चढ़ा रखा है। जिन राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं उनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम हैं। इनमें से तीन राज्यों में बीजेपी की सरकार है, जहां कांग्रेस वापसी के लिये हाथ−पैर मार रही है। इसमें मध्य प्रदेश की 230, राजस्थान की 200 और छत्तीसगढ़ की 90 सीटें शामिल हैं। इनमें राजस्थान ही एक ऐसा राज्य है, जहां भाजपा की सत्ता में वापसी मुश्किल मानी जा रही है। राजस्थान में साल 1993 से अदल−बदलकर सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी को बहुमत नहीं भी मिला तो वह सबसे बड़ी पार्टी बन कर जरूर उभरती दिख रही है।

शीर्ष नेतृत्व लोकसभा चुनाव से पूर्व कहीं भी हार का मुंह नहीं देखना चाहता है। तीन राज्यों के विधान सभा चुनावों को अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है। मोदी को यही से घेरने की रणनीति बनाई जा रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष में जो भी यहां जीतेगा, वह अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के मैदान में सिकंदर की तरह उतरेगा। चुनाव भले ही तीन राज्यों का हो, लेकिन यहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के राज्य सरकारों के कामकाज की जगह मोदी और उनकी सरकार की चर्चा सबसे अधिक कर रहे है। बीजेपी लगातार 15 सालों से मध्यप्रदेश की सत्ता पर काबिज है। कांग्रेस ने कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया का चेहरा आगे कर बीजेपी को चुनौती पेश की है। ऐसे में दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच जुबानी जंग भी तेज होती जा ही है।

वहीं राजस्थान के सियासी माहौल ने बीजेपी नेताओं के दिलों की धड़कने बढ़ा रखी हैं। वहां की सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान राज्य में अपने पार्टी विरोधियों को लगातार हासिये पर डाले रखा तो, दिल्ली के नेताओं को भी कभी खास तवज्जो नहीं दी। इन चुनावों में राहुल गांधी यहां तक कहते फिर रहे हैं कि अगर राफेल विवाद मामले की जांच होती है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जेल जाएंगे। राहुल गांधी ही मोदी और बीजेपी पर हमला नहीं कर रहे हैं। उनको भी उन्हीं की भाषा में बीजेपी द्वारा जबाव दिया जा रहा है। राहुल के ऊपर मानहानि तक का केस दर्ज हो चुका है।

मध्य प्रदेश के सीएम ने ट्वीट में कहा था कि वह राहुल गांधी पर मानहानि केस करने जा रहे हैं। इसके बाद राहुल गांधी की तरफ से सफाई सामने आ गई, लेकिन कार्तिकेय ने राहुल के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करा ही दिया। राहुल के ऊपर बीजेपी वाले तो हमलावर हैं ही उन्हें अपना ‘घर’ भी संभालना पड़ रहा है। कांग्रेस की मध्य प्रदेश में वापसी की सुगबुगाहट ने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ जैसे नेताओं के बीच खाई पैदा कर दी है। हद तो तब हो गई जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के दौरान मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच तीखी कहासुनी हो गई।

इसी बीच राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नेताओं के बीच दल−बदल का दौर जारी है। बीते दिनों आप नेता नेहा बग्गा बीजेपी में शामिल हुई थीं और कई बीजेपी नेता कांग्रेस के खेमे में शामिल हुए थे। इसके बाद से लगातार नेता यहां पार्टी बदल रहे हैं। भाजपा के विधायक संजय शर्मा और पूर्व विधायक कमलापत आर्य इन्दौर में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में कांग्रेस में शामिल हो गये।

 

चुनाव आयोग के लिये नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ में विधान सभा चुनाव कराना कभी आसान नहीं रहा है। इस बार भी नक्सली चुनाव का माहौल खराब करने में लगे हैं। छत्तीसगढ़ की 90 सीटों के लिए दो चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण में राज्य के नक्सल प्रभावित 12 विधानसभा सीटों पर 12 नवंबर को वोट डाले जाएंगे, जबकि 78 सीटों पर 20 नवंबर को मतदान होगा। वोटों की गिनती 11 दिसंबर को होगी। इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही मुख्य मुकाबला माना जा रहा है, हालांकि अजीत जोगी की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जकांछ) और मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच हुए गठबंधन ने इस मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। हालांकि 15 साल के मुख्यमंत्री पद पर आसीन रमन सिंह इस बार भी अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए कोई कोर−कसर छोड़ते नहीं दिख रहे हैं। इस बार बीजेपी, कांग्रेस और जकांछ−बसपा गठबंधन के अलावा आम आदमी पार्टी ने भी सभी 90 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, सपा, जेडीयू, स्वाभिमान मंच, सीपीआईएम सहित अन्य क्षेत्रीय दल भी अलग अलग सीटों से चुनावी मैदान में हैं। छत्तीसगढ़ की कुल 90 में से 31 सीटें अनुसूचित जनजाति, 10 अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं।

बात तेलंगाना की करें तो मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस गठबंधन के तहत 119 विधान सभा सीटों में से 95 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस ने बाकी की 24 सीट तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) और महागठबंधन के अन्य घटक दलों के लिए छोड़ी है। तेलंगाना की 119 सदस्यीय विधानसभा के लिए 7 दिसंबर को चुनाव होने हैं। सीट बंटवारे के समझौते के तहत, कांग्रेस ने टीडीपी को 14 सीट और बाकी दस सीट तेलंगाना जन समिति (टीजीएस) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) को देने का फैसला किया है।

इसी बीच टीडीपी सुप्रीमो और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चन्द्रबाबू नायडू ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से दिल्ली स्थित उनके आवास पर मुलाकात की है। मुलाकात में ही दोनों नेताओं ने आगामी लोकसभा और विधान सभा के चुनाव साथ लड़ने का फैसला किया। इस मुलाकात के बाद ही दोनों पार्टियों के बीच तेलंगाना में सात दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन और सीट बंटवारे का ऐलान किया गया था। यहां बीजेपी का कोई भी विधायक नहीं है। सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने वर्ष 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में 63 सीटें जीती थीं। कांग्रेस 26, जबकि भाजपा ने पांच सीटें जीती थीं।

मिजोरम में क्षेत्रीय पार्टियां विधानसभा चुनाव से पूर्व एकजुट होकर सत्ता का युद्ध लड़ने जा रही है। पूर्वोत्तर के 40 सीटों वाले इस छोटे से राज्य में क्षेत्रीय पार्टियों के मैदान में आने से मुकाबले के दिलचस्प होने के आसार बढ़ गए हैं। पीपुल्स रिप्रजेंटेशन ऑर आइडेंडिटी एंड स्टेट और मिजोरम, सेव मुजोरम फ्रंट एंड ऑपरेशन मिजोरम ने चुनाव से पहले गठबंधन किया है। इसके साथ ही जोराम राष्ट्रवादी पार्टी और जोराम एक्सोदस मूवमेंट ने राज्य के सत्ता के समीकरणों को बदलने के लिए एकसाथ आए हैं जब से मिजोरम की स्थापना हुई है।