बेटी भी हो सकती है बुढ़ापे की लाठी

  • लखनऊ महोत्सव नाट्य रंग उत्सव: दूसरा दिवस
  • नुक्कड़ नाटक ‘जिम्मेदार कौन!’ ने किया जागरूक

नया लुक संवाददाता
लखनऊ। बेटे को लेकर मुहावरा या पर्यायवाची ‘बुढ़ापे की लाठी’ है। पर इस मिथक को तोड़ता इसी शीर्षक का नाटक इसे तोड़कर यह साबित करता है कि बेटी भी मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा बन सकती है। लखनऊ महोत्सव के तहत थियेटर एवं फिल्म वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा उ.प्र.संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से गोमतीनगर अकादमी परिसर में कल से प्रारम्भ पांच दिवसीय लखनऊ महोत्सव नाट्य रंग उत्सव के दूसरी शाम आज दिव्य सांस्कृतिक शैक्षिक एवं सामाजिक संस्थान के कलाकारों ने संजय त्रिपाठी गोपाल के लिखे और निर्देशित किये इस मौलिक नाटक का मंचन किया।
रूढ़ियों को तोड़ने के लिए प्रेरित करते इस नाटक में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का संदेश भी समाहित किया गया है। साथ ही यह भी कि वंश का नामा रोशन करने में अब बेटियां भी किसी से कम नहीं। रामखेलावन एक गरीब फेरी वाला है वह बेटियों को बोझ समझता है किन्तु, उसकी बेटियां आरती और पूजा दोनो बहुत होनहार और पढ़ाई में तेज हैं। कष्ट सहकर और ट्यूशन व अन्य काम करके वह अपनी पढ़ाई करती हैं और अपनी मेहनत के बल पर भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में चयनित हो जाती हैं। विपिन प्रियंका प्रोडक्शन, ज्वाइन हैण्ड्स फाउण्डेशन के सहयोग से मंचित नाटक में आर्यन मिश्र, संदीप आदि का सहयोग रहा। मुख्य अतिथि के रूप में अतुल करन और एसोसिएशन के संरक्षक राजवीर रतन व अनिल मिश्र गुरुजी ने कलाकारों का हौसला बढ़ाया। आभार सचिव दबीर सिद्दीक़ी ने व्यक्त किया।


नाटक में बेटियों की भूमिका में आरती गुप्ता व चारू शुक्ला ने प्रभावित किया तो अन्य भूमिकाओं में लक्ष्मी निगम, रश्मि रावत, अनामिका शुक्ला, अजयकुमार धीमान, सचिन सिंह, ध्रुव तिवारी अभिनव रावत, टी.सुनील त्रिवेदी, सपना, अश्विनी के संग ही पिता रामखेलावन की भूमिका में स्वयं निर्देशक ने बेहतर साथ निभाया। मंच पाश्र्व के कार्यों में आनन्द शर्मा, संतोषकुमार समायर, विनय वर्मा, रश्मि त्रिपाठी, अजय कुमार, आदित्यकुमार लिप्टन, संदीप बाजपेयी, ममता पाण्डेय व विजयपाल सिंह ने योगदान दिया। इसके अतिरिक्त हरि सुघा सोशल रिफार्म फाउण्डेशन के कलाकारों ने मनमोहन सिंह व ट्विंकल श्रीवास्तव के निर्देशन में वर्तमान सामाजिक विसंगतियों पर नुक्क्ड़ नाटक ‘ जिम्मेदार कौन!’ का मंचन करते हुए दर्शकों को जागरूक किया।