बैडमिंटन की दुनिया में भारत नया सुपरस्टार

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात में जैसे ही बैडमिंटन के इस सितारे का नाम लिया, कुछ ही देर में यह खबर वेब मीडिया पर ट्रेंड करने लगी। उसके कुछ ही पल बाद खबर आई कि उन्होंने ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज अपने नाम कर लिया। फिर क्या, दुनिया की तमाम मीडिया पर उसका दखल हो गया। यह खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि बैडमिंटन के स्टार शटलर किदांबी श्रीकांत हैं, जिन्होंने खिताबी मुक़ाबले में चीन के चेन लोंग को 22-20, 21-16 के सीधे सीटों में हार का स्वाद चखाया। कुछ दिनों पहले इंडोनेशियाई सुपर सीरीज कब्जाने वाले श्रीकांत का यह लगातार दूसरा खिताब है। इससे पहले उन्होंने बीते 18 जून को जापान के काज़ुमासा सकाई को 21-11, 21-19 से हराकार इंडोनेशियाई सुपर सीरीज का खिताब जीत लिया था।

अभी तक बैडमिंटन की दुनिया में भारत का झंडा साइना नेहवाल और पीवी सिंधु ने ऊंचा किया है लेकिन अब बी साईं प्रणीत, किदांबी श्रीकांत और एचएस प्रणॉय जैसे खिलाडिय़ों ने अपना जलवा बिखेरा है। उनके इस नायाब प्रदर्शन ने भारत को बैडमिंटन की दुनिया में नया सुपरस्टार बना दिया है।

श्रीकांत ने दो साल पहले चाइना ओपन सुपर सीरीज का खिताब जीता था, जिसमें उन्होंने बैडमिंटन के महान खिलाड़ी लिन डैन को हराकर बड़ा उलट फेर किया था। हालांकि बाद में वो अपना फॉर्म बरकऱार नहीं रख पाए और उन्हें कई खिताबी मुकाबलों में करारी हार का सामना करना पड़ा। साल 2016 की रियो ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल से बाहर हुए श्रीकांत चोटिल होने के बाद दो तीन महीने के लिए बैडमिंटन कोर्ट से बाहर रहे।

कोर्ट पर लौटने के बाद श्रीकांत तीन सुपर सीरीज़ के फाइनल में पहुंचे और दो सुपर सीरीज इंडोनेशिया ओपन और ऑस्ट्रेलिया ओपन फतह कर डाला। श्रीकांत ने चोटी के खिलाड़ी सोन वेन वो को लगातार दो प्रतियोगिताओं में हराकर अपना लोहा मनवाया है। रैंकिंग में किदांबी श्रीकांत एक साल के अंदर 40 वें स्थान से चौथे स्थान पर पहुंच गए। वह कहते हैं कि बड़ी सफलता के साथ काफी दबाव भी बढ़ता है। विश्व स्तर पर चुनौती बहुत कड़ी है। अब वो स्थिति नहीं है कि जो चोटी के कुछ ही खिलाड़ी खिताब जीत सकते हैं।

विश्व स्तर पर चुनौती बहुत कड़ी है। अब वो स्थिति नहीं है कि जो चोटी के कुछ ही खिलाड़ी खिताब जीत सकते हैं।
किदांबी श्रीकांत
भारतीय स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी

 

चोट के बाद जबरदस्त कमबैक

श्रीकांत शुरुआत में बेहतर खेले लेकिन फिर चोटिल होने के बाद उनकी रैंकिंग गिरी थी जिसे उन्होंने फिर संभाला है। उन्होंने अपनी आक्रामकता के साथ नई ट्रेनिंग के स्टाइल का संयोजन किया है। पिछली तीन प्रतियोगिता में श्रीकांत, साईं प्रणीत और एचएस प्रणॉय के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला। इसलिए भविष्य में आने वाली प्रतियोगिताओं में भारतीय पुरुष खिलाडिय़ों से काफी उम्मीदें हैं।

इसके अलावा बी साईं प्रणीत ने सिंगापुर ओपन में नंबर एक खिलाड़ी रहे चीन के ली चोंग वे और ओलंपिक के स्वर्ण पदक जीतने वाले चेन लॉन्ग को हराकर वह खिताब अपने नाम किया। इन दो बड़े उलटफेर ने एच एस प्रणॉय को भारतीय टीम का नया सुपरस्टार बना दिया। फिलहाल वह भारतीय बैडमिंटन कोच और पूर्व खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद के साथ कोच मुलयो हेंडोयो के प्रशिक्षण दे रहे हैं।

के. श्रीकांत और साईं प्रणीत ने अपने हाल के कई लंबे मैचों में कोर्ट में अच्छा खेल और स्टेमिना दिखाया है, इसमें इन खिलाडिय़ों ने सही समय पर उपयुक्त शॉट खेलकर अपने खेल में आए निखार का भी प्रदर्शन किया है।

नीचे गिर रहा है नेहवाल और सिंधु का कामयाबी ग्राफ

रियो ओलंपिक खेलों में भारत के लिए रजत पदक हासिल करने वाली पी वी सिंधु के प्रदर्शन में भी काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। भारतीय बैडमिंटन की स्टार साइना नेहवाल ऑस्ट्रिलया ओपन में ज़्यादा कमाल नहीं दिखा सकीं। उनकी विश्व रैंकिंग भी नीचे गिरी है।

युगल वर्ग में पेंच

महिला युगल और मिश्रित युगल के लिए भारतीय खिलाडिय़ों को मलेशियाई कोच ट्रेनिंग दे रहे हैं। युगल में अश्विनी पोनप्पा और ज्वाला गुट्टा की जोड़ी में से ज्वाला गुट्टा के रिटायर होने के बाद अश्विनी के साथ सिक्की रेड्डी की जोड़ी ने उम्मीद जगाई है। जबकि मिश्रित युगल में अश्विनी पोनप्पा के साथ 16 साल के सात्विक साईंराज के अच्छी जोड़ीदार साबित होने की उम्मीद है।

बढ़ रही है बैडमिंटन की लोकप्रियता

रियो ओलम्पिक में पीवी सिंधु को टकटकी लगाए करोड़ों लोगों ने टीवी स्क्रीन पर देखा। उस मैच की लोकप्रियता को देखकर यह कहा जा सकता है कि अब भारत में बैडमिंटन के प्रति भी दीवानगी बनती जा रही है। करोड़ों दर्शकों का आंकड़ा यह साफ बताता है कि बैडमिंटन कितना लोकप्रिय हो रहा है। खिलाडिय़ों को अब बेहतर स्पॉन्सरशिप मिल रही हैं, इससे भी खिलाडिय़ों का मनोबल बढ़ा है।

इंडियन बैडमिंटन लीग ने भी लोगों में खेल की लोकप्रियता बढ़ाई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में चमकने वाले भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जब इंडियन बैडमिंटन लीग में उतरते हैं तो लोग उन्हें देखने के लिए उमड़ते हैं। स्पोट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से मिलने वाली मदद के अलावा पुलेला गोपीचंद ने भी भारतीय बैडमिंटन ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।

भारतीय बैडमिंटन की नई सनसनी समीर वर्मा

हांगकांग ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप के महिला एकल फाइनल में पहुंची भारतीय खिलाड़ी पीवी सिंधु अब किसी परिचय की मोहताज नहीं है, लेकिन टूर्नामेंट के पुरुष सिंगल्स के फाइनल में पहुंचे समीर वर्मा के बारे में बहुत कम लोगों को पता है।

समीर ने सेमीफाइनल में तीसरी वरीयता प्राप्त डेनमार्क के जान ओ जोर्गेनसेन को 21-19, 24-22 से हराकर सनसनी फैला दी थी। हालांकि उनको फाइनल में नग का लोंग एंगस ने 21-14, 10-21 और 21-11 से हरा दिया था।

इस मैच से पहले अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन जगत में समीर का कोई ख़ास नाम नहीं था, लेकिन अचानक विश्व के नंबर तीन खिलाड़ी को हराने की वजह से वह सुर्खियों में आ गए।

विश्व में 43वीं वरीयता प्राप्त समीर इससे पहले किसी सुपर सीरीज टूर्नामेंट के दूसरे दौर से आगे नहीं बढ़े थे। जान ओ जोर्गेनसेन और समीर वर्मा के बीच ये पहला मैच था। मध्यप्रदेश के धार जिले के रहने वाले समीर ने खेल के सारे गुर अपने भाई सौरभ वर्मा से सीखे। सौरभ भी मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। समीर हैदराबाद की पुलेला गोपीचंद अकादमी से  प्रशिक्षण लेकर निकले हैं। समीर ने इसी साल अप्रैल में चंडीगढ़ में हुई नेशनल चैंपियनशिप जीती थी। फाइनल में उन्होंने अपने भाई सौरभ वर्मा को हराया था। सौरभ ने साल 2012 में ये चैंपियनशिप जीती थी।