भाजपा को भारी पड़ सकता है लोकसभा चुनाव

नई दिल्ली। पांच राज्यों में जारी ऐन लोकसभा चुनाव के पहले कर्नाटक के पांच लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी के लिए गले की हड्डी बन सकती है। एक ओर पांचों सीट के रिजल्ट आ रहे थे, दूसरी ओर कांग्रेसी नेता अपनी तकरीर में बीजेपी को केंद्र की सत्ता से बाहर करने की बात कहने लगे थे। कर्नाटक के उपचुनावों के नतीजों से कांग्रेस पांचों राज्य में अपना माहौल बनाना शुरू कर चुकी है। वहीं भाजपा की कोशिश इन राज्यों में अपने काडर व समर्थक वर्ग को एकजुट करने की जारी है। इस उपचुनाव में बीजेपी को अपनी एक लोकसभा सीट बेल्लारी गंवानी पड़ी है। हालांकि, वह शिमोगा सीट बरकरार रखने में सफल रही लेकिन विधानसभा उपचुनाव में भी उसे जजोर का झटका सहना पड़ा है। विपक्षियों ने विधानसभा उप चुनाव में बीजेपी को एक भी सीट भी जीतने का मौका नहीं दिया।

यूपी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी कहते हैं कि जिस तरह से विपक्षी एकता से बीजेपी कर्नाटक में चारों खाने चित्त हो गई, ठीक उसी तरह केंद्र के चुनाव में सभी विपक्षी दल एकजुट होकर इस पार्टी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा देंगे। नतीजों के बाद भाजपा के राज्य के प्रमुख नेता बीएस येदियुरप्पा का यह बयान काफी महत्वपूर्ण है कि नतीजे भाजपा के लिए चेतावनी है। पार्टी को सही दिशा में काम करने की जरूरत है। दरअसल बीते कुछ सालों में विभिन्न राज्यों में हुए उपचुनावों में अधिकांश में नतीजे भाजपा के पक्ष में नहीं रहे हैं।

यूपी बीजेपी के मीडिया पैनलिस्ट और प्रोफेशनल सेल के प्रमुख नेता ओपी मिश्र कहते हैं कि नतीजे दक्षिण के हैं और चुनाव उत्तर में होने जा रहे हैं। दोनों क्षेत्रों की राजनीति व मुद्दे अलग-अलग हैं, हालांकि इनसे भाजपा कार्यकर्ता और ताकत एकजुट होगा। कार्यकर्ता अपनों से नाराज हो सकता है, लेकिन वह अपनी पार्टी की जगह विरोधी पार्टी की जीत बर्दाश्त नहीं कर सकता है।

दूसरी ओर उपचुनावों में जीत से उत्साहित कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने कहा कि वे भाजपा के खिलाफ साल 2019 में चुनाव एकसाथ मिलकर लड़ेंगे। दोनों नेताओं ने चुनावी सफलता का श्रेय कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन की नीतियों को दिया। बताते चलें कि इस गठबंधन ने शनिवार को हुए उपचुनावों में दो लोकसभा सीटों तथा दो विधानसभा सीटों पर कब्जा किया।

कुमारस्वामी कहते हैं कि दोनों पार्टियां आगामी लोकसभा चुनावों में राज्य की सभी 28 सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ेंगी। कुमारस्वामी ने कहा कि हम 2019 का लोकसभा चुनाव एकसाथ मिलकर लड़ेंगे। जैसा कि हमने इस बार किया, हम एकसाथ बैठकर समन्वित तरीके से लोकसभा चुनाव लड़ने की रणनीति बनाएंगे।

कर्नाटक के सीएम कहते हैं कि हमने जनता की भलाई के लिए कई कदम उठाए जो लागू होने के चरण में हैं। अब तक उन तक लाभ नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि हालांकि लोगों को हमारी नीतियां पसंद आई हैं, चाहे वह फसल ऋण माफी हो या सड़क पर रेहड़ी लगाने वालों को वित्तीय मदद हो। वह कहते हैं कि उपचुनावों में दमदार जीत से साफ-साफ संकेत है कि कर्नाटक की जनता ने गठबंधन सरकार की नीतियों को उनकी मंजूरी दी है।

जीत के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बीजेपी पर जमकर गरजे और कहा कि सत्ता की भूखी भाजपा ने विपक्षी दल के रूप में अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। उन्होंने नैतिकता और नीति शास्त्र को नजरअंदाज किया जिसके कारण उन्हें चार जगहों पर हार का सामना करना पड़ा जबकि शिमोगा में उनकी जीत का अंतर बहुत कम हो गया।

गुजरात चुनाव के समय से कांग्रेस हमलावर है और बीजेपी तमाम मुद्दों पर घिरी हुई है। पिछले विधानसभा चुनाव के समय कर्नाटक में कांग्रेस और ज्यादा मुखर थी, क्योंकि इस बार वह अपने दुर्ग में लड़ाई लड़ रही थी। राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी दल एकजुट होकर मोदी सरकार की नीतियों को निशाना बना रहे थे और भाजपा सिर्फ बचाव और जवाबी मुद्रा में दिख रही थी। कर्नाटक में जीत 2019 के चुनावी रण से पहले बीजेपी के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। किसानों-दलितों के मुद्दों, रोजगार और विकास के गुजरात मॉडल को लेकर पार्टी तब और मुखर तरीके से विपक्ष का सामना कर पाएगी।