मानवता छूटी पीछे अब राजनीति के निशाने पर बुलंदशहर

अच्युतानंद पाठक ‘आजाद’

खंडहर बचे हुए हैं, इमारत नहीं रही,

अच्छा हुआ कि सर पे कोई छत नहीं रही।

हमको पता नहीं था हमें अब पता चला,

इस मुल्क में हमारी हुकूमत नहीं रही।

दुष्यंत कुमार की ये लाइनें इमरजेंसी के दिनों में  लिखी गई थीं। लेकिन यूपी में नेताओं के लिए यह दिन तो आए दिन आते रहते हैं। एक दिन पहले पश्चिमी यूपी में उग्र भीड़ ने गौकशी के आरोप में एक इंसपेक्टर और युवक को मौत के घाट उतार दिया तो उस पर भी सियासत शुरू हो गई। हालांकि बुलंदशहर के जिलाधिकारी अनुज शर्मा ने जिले में धारा-144 लगाकर राजनेताओं के आने पर प्रतिबंध लगा दिया है, ताकि लोग जुट न सकें।

यूपी के पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांग कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर कहते हैं कि यह विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस और बजरंग दल की साजिश है। सरकार ने इन संगठनों पर कोई लगाम नहीं लगाया है। मैं इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं और सरकार से मांग करता हूं कि उच्च स्तरीय जांच करके दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दे।

सीपीआई (एम) के नेता प्रकाश करात ने बुलंदशहर की घटना पर कहा कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुनियोजित तरीके से हुआ। वहां पहले भी चुनाव से पहले इस तरह की गोकशी की घटनाएं प्रकाश में आई हैं। सभी को याद होगा कि मुजफ्फरनगर में लोकसभा चुनाव से पहले 2013 में कैसे दंगे हुए थे।

वहीं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कहते हैं कि यूपी अराजकता की आग में झुलस रहा है, जबकि पूरी सरकार दूसरे राज्यों में वोट मांगने में व्यस्त है। भाजपा इन हालातों से बेखबर रोम के बादशाह नीरो की तरह बंशी बजा रहे हैं। जनता डर और दशहत में है, प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। यूपी में अपराधियों के हौंसले इतने बुलन्द हैं कि वह पुलिस पर हमला करने से भी नहीं चूक रहे हैं। बुलंदशहर में स्याना थाने के इंस्पेक्टर की हत्या जिस निर्ममता से की गई उससे स्पष्ट है कि बीजेपी सरकार की कोई प्रतिष्ठा नहीं रह गई है। पुलिस का मनोबल बुरी तरह गिर गया है। कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब राजधानी लखनऊ सहित अन्य जिलों में हत्या, लूट, बलात्कार की घटनाएं न घटती हों।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर कहते हैं कि बुलंदशहर के चिगरावटी में जिस प्रकार आक्रोशित भीड़ ने सुनियोजित तरीके से कर्तव्यनिष्ठ जांबाज पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और एक युवक की हत्या की,  इससे यह प्रमाणित होता है कि बीजेपी और उसके आनुसांगिक संगठन जिस अराजक समाज की स्थापना करना चाहते थे वह चरम पर है। इसका जीता जागता सबूत प्रशासन द्वारा प्राथमिक जांच में ही सामने आया, जब इस जघन्य घटना को अंजाम देने वाले सारे के सारे लोग विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, भाजपा युवा मोर्चा जैसे संगठनों से जुड़े हुए लोग निकले जो अलग-अलग स्तर पर उक्त संगठनों के महत्वपूर्ण पदस्थ लोग हैं।

राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत  चौधरी कहते हैं कि बीजेपी शासन काल में प्रदेश अराजकता की भेंट चढ गया है। प्रदेश में कानून ही शेष है और व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। उन्होंने मृतक पुलिस निरीक्षक के परिजनों को एक करोड रुपये का मुआवजा देने व दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुये घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने मानवता को शर्मसार किया है। भाजपा के सहयोगी संगठनों द्वारा गौवंश की रक्षा के नाम पर देश में जगह-जगह कानून को अपने हाथ में लिया जा रहा है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश दीक्षित ने कहा कि संघ, विहिप और भाजपा की साजिश है। बुलंदशहर की हिंसा और इंस्पेक्टर की हत्या में अल्पसंख्यकों के विशाल किंतु शांतिपूर्ण सम्मेलन से बौखलाई ताकतों से साजिश रची गई थी । योगी राज में गौ गुंडों के हौंसले बुलंद है। इसके साथ ही साथ उन्होंने मांग कि गौरक्षा के नाम पर बने हथियारबंद दस्तों से पूरे प्रदेश के अमन और चैन खतरे में है। उन्होंने तत्काल ऐसे लोगों पर कार्रवाई किए जाने के साथ-साथ इनको प्रतिबंधित किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सूबे के सीएम राजस्थान में मंदिर बनवा रहे है, गृह मंत्रालय उनके पास है और प्रदेश में आये दिन सांप्रदायिक तनाव पैदा हो रहा है इसका मतलब पूरे प्रदेश में गौगुंडों का राज है, जिनको सरकार और संघ का अपरोक्ष समर्थन मिला हुआ है।

वहीं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती कहती हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख नगर बुलंदशहर में भीड़ हिंसा के दौरान जबरदस्त अराजकता रही। दो लोगों की हत्या के लिए भाजपा सरकार की गलत व लापरवाह नीतियां ही जिम्मेदार हैं। प्रदेश भाजपा के शासन में विकास के लिए तरस रहा है। प्रदेश में कायम जंगलराज की वजह से ही अब कानून के रखवाले ही बलि चढ़ रहे हैं। यह अत्यंत दुख की बात है। मायावती ने कहा कि अब वक्त का गया है कि प्रदेश को भीड़तंत्र के हिंसा व अराजकता की भेंट चढ़ने से रोका जाए और इसके लिए गंभीर प्रयास किए जाएं। प्रदेश व देश में कानून-व्यवस्था का राज स्थापित करने के लिए पूरी ईमानदारी से काम करने की जरूरत है, ताकि देश के संविधान व लोकतंत्र को भीड़तंत्र की भेंट चढ़ने से रोका जा सके।