शेरवुड के ‘लाल’ ने कर दिया कमाल, अब सड़कों पर दौड़ेगा सोलर ई-रिक्शा

रत्नेश कुमार

बाराबंकी। सोलर पॉवर गाड़ी से भला कोई 300 किग्रा. सामान लेकर चल सकता है। आपको शायद हैरानी हो, पर ये कारनामा कर दिखाया है राजधानी से सटे बाराबंकी के शेरवुड इंजीनियरिंग कॉलेज के कुछ इंजीनियरों ने। जी हां, उन्होंने ऐसा उत्कृष्ट उत्पाद बनाया है जो सोलर पॉवर मिलते ही सड़कों पर दौड़ने लगेगी। उसके लिए न तो डीजल-पेट्रोल की आवश्कयकता है और न ही किसी अन्य रिसोर्स की। बताते चलें कि डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों ने जहां आम लोगों की कमर तोड़ कर रखी है। वहीं बच्चे सौर उर्जा से चलने वाली ई-रिक्शा बनाकर एक कदम आगे निकल चुके हैं।

क्या है इसकी खासियत

12 वोल्ट की चार बैटरियों से लैस यह ई-रिक्शा करीब 300 किग्रा का वजन लेकर 35 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सड़क पर फर्राटा भर सकती है। सीमित संसाधनों के बजाय असीमित ऊर्जा से चलने वाली यह गाड़ी केवल फॉग के समय धोखा दे सकती है, अन्यथा की स्थिति में यह उतनी ही तेजी से काम करेगी। बारिश के दिनों में यह तीन दिनों तक साथ देती है।

कैसे तैयार की डिवाइस

सोलर बेस्ट पॉवर जनरेशन और स्टोरेज सिस्टम का कॉम्बो बनाकर इंजीनियरों ने उसे छोटे से ई-रिक्शा में बड़ी बखूबी से सेट कर दिया। इंजीनियरों ने इस डिवाइस को इतना शक्तिशाली बनाया कि वह करीब 300 किग्रा भार के साथ 35 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से सड़कों पर फर्राटा भर सकती है। प्रोजेक्ट से जुड़े छात्र पुनीत कुमार कहते हैं कि इसमें इस्तेमाल की गई बैटरी की कीमत सामान्य बैटरी जैसी ही है। ऐसा नहीं है कि इसमें कोई स्पेशल या हाईपॉवर की बैटरी प्रयोग की गई है।

कैसे काम करता है यह रिक्शा

शेरवुड इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र तौसीफ अहमद बताते हैं कि सूर्य के निकलते ही इस रिक्शे को आप सड़क पर उतार सकते हैं। ऐसा नहीं है कि एक-आध घंटा इसकी चार्जिंग के लिए इंतजार करना पड़ेगा। सोलर पैनल सीधे छत पर होने की वजह से बैटरी तेजी से चार्ज होती है और उतनी ही तेजी से ऊर्जा का उत्पादन भी करती है। कॉलेज के चेयरमैन इं. केबी लाल कहते हैं कि छात्रों ने उत्कृष्ट डिवाइस का निर्माण किया है। यह बैटरीचलित ई-रिक्शा के मुकाबले सस्ता पड़ेगा और इसमें बार-बार चार्जिंग की आवश्यकता भी महसूस नहीं होगी।

प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, कार्बन उत्सर्जन जैसी कई समस्याओं से आज दुनिया जूझ रही है। शायद इसीलिए आज नेचुरल एनर्जी को प्राथमिकता दी जा रही है। अब जो चीज डिमांड में होगी उसमें दिन-ब-दिन इनोवेशन भी होंगे। कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया शेरवुड इंजीनियरिंग कॉलेज, बाराबंकी के युवा इंजीनियरों ने। उन्होंने अपने नए इनोवेशन से ऐसा धमाल मचाया कि आप जानकर भौचक रह जाएंगे।

शेरवुड के चेयरमैन ई. केपी लाल (फाइल फोटो)

होनहार बिरवान के होत चिकने पातः ई. केबी लाल

कहते हैं न बच्चों में जब हुनर हो तो वो कभी न कभी लोगों के सामने आ ही जाता है। इन बच्चों ने ऐसा कमाल दिखाया जिसे देखकर सबकी आंखें खुली की खुली रह गईं। सबकी जुबां से सिर्फ एक ही बात निकल रही है- लाजवाब।

बढ़ावा देने के लिए शासन में रखेंगे बातः सिंह

अरविंद कुमार सिंह, निदेशक नेडा

उत्तर प्रदेश अतिरिक्त ऊर्जा विभाग (नेडा) के निदेशक अरविंद सिंह कहते हैं कि ट्रेनों के संचालन में ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए केंद्र गैर-पारंपरिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए रेलवे सोलर ट्रेन चलाने जा रही है। इन युवाओं के मॉडल को सड़क पर उतारने के लिए शासन में बात की जाएगी। हालांकि नेडा में सोलर से चलने वाले ऐसे किसी मॉड्यूल पर काम नहीं चल रहा है। आपसे जानकारी मिली है तो टीम भेजेंगे और देखने के बाद परिवहन विभाग से बात की जाएगी।

प्रोत्साहन के लिए बना रहे हैं नीति

भुवनेश कुमार, प्राविधिक शिक्षा सचिव, उत्तर प्रदेश

प्राविधिक शिक्षा सचिव भुवनेश कुमार कहते हैं कि अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) के दीक्षांत समारोह में सीएम ने घोषणा की थी कि युवाओं का जो मॉडल जनहित में उपयोगी होगा, उसके लिए नीति बनाई जाएगी और उन्हें प्रमोट किया जाएगा। हमारी पूरी टीम इस पर काम कर रही है।

औसत घर के बच्चों का है कमालः डॉ. अजीत

शेरवुड इंजीनियरिंग कॉलेज के डायरेक्यर डॉ. अजीत कहते हैं कि ई-रिक्शा का ईजाद करने वाले सभी बच्चे पूर्वांचल के औसत परिवारों से हैं। कॉलेज के सुंदर वातावरण ने इनके व्यक्तित्व का निर्माण किया और ये इतना बड़ा कारनामा करने में सफल रहे।

कुछ ऐसा ही गजब कारनामा कर दिखाया था इंजीनियर नवीन ने…

सोलर पावर के प्रति दुनिया भर के लोगों में जागरूकता के लिए भारतीय मूल के इंजीनियर नवीन ने सोलर से चलने वाली टुक-टुक नामक गाड़ी से भारत से ब्रिटेन पहुंच गए हैं। 6200 मील यानी करीब 9987 किमी की यात्रा उन्होंने सात महीने में पूरी की। वे अपने सफर के दौरान जहां भी रुके, लोग उनके साथ सेल्फी लेने के लिए जमा हो जाते थे। पेशे से ऑटो इंजीनियर नवीन का कहना है कि ऐसा वाहन बनाने का आइडिया उनको तब आया, जब वे वर्षों पहले भारत में एक ट्रैफिक जाम में फंसे थे।

इसकी शुरुआत उन्होंने फरवरी में बैंगलुरु से आरंभ की थी। 35 वर्षीय नवीन ने इलेक्ट्रिक और सोलर पॉवर से चलने वाले यातायात साधनों के प्रति लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। वे अब ऑस्ट्रेलिया के नागरिक हैं। टुक-टुक को उन्होंने खुद डिजाइन किया जिसमें एक बेड, पैसेंजर सीट, सोलर पॉवर से चलने वाला कूकर और अलमारी भी बनी हुई है। अपनी यात्रा के दौरान वे इरान, तुर्की, बुल्गारिया, सर्बिया, ऑस्ट्रिया, स्व‍िटजरलैंड, जर्मनी और फ्रांस से गुजरे।