यूपी पहुंचकर तीसरे मोर्च की पेशबंदी में सफल हुए तेजस्वी

  • अखिलेश ने कहा- देश को अगला मिलेगा प्रधानमंत्री यूपी से
  • तेजस्वी की हुंकार- पीएम मोदी को हटाना चाहती है देश की जनता

आशीष श्रीवास्तव

लखनऊ। बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव कल अपने तूफानी दौरे पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचे। उन्होंने रविवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती से मुलाकात की और अगले दिन सपा मुखिया अखिलेश यादव से मिलने पहुंचे। सपा दफ्तर में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद उन्होंने प्रेस को संबोधित करते हुए केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर जमकर बरसे। कहा कि, इस वक्त केन्द्र सरकार की तरफ से देश में अघोषित इमरजेंसी है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस से अलग होने का साफ संदेश दे चुके गठबंधन को सपोर्ट कर तेजस्वी ने देश में तीसरे मोर्चे के गठन की नींव डाल दी। वरिष्ठ पत्रकार साधुशरण पाठक कहते हैं कि यदि यूपी के गठबंधन के साथ बिहार का महागठबंधन आ गया तो बीजेपी की ‘डेंटिंग’ बड़ी मजबूत हो जाएगी और उनकी गाड़ी सड़क के किनारे नहीं बल्कि सड़क के किनारे गड्ढे में दिखाई देगी।

बिहार के पूर्व डिप्टी सीएमने कहा कि देश में अघोषित इमरजेंसी है। केंद्र सरकार का रवैया तानाशाही वाला है। यूपी में 80 सीटें, 40 सीटें बिहार में और 14 से झारखंड में यह सीटें बीजेपी के पास रही है, हम बिहार में मजबूत हुए हैं और यहां गठबंधन मजबूत हो रहा है। भारी नाराजगी लोगों की इस सरकार के विरोध में है। बीजेपी से कोई खुश नहीं है। उन्होंने केवल सपने दिखाने का काम किया है। तेजस्वी ने कहा कि बिहार में स्पेशल पैकेज को लेकर बड़े ऐलान किए गए थे कि उसे सवा सौ करोड़ रुपये दिया जाएगा, लेकिन हकीकत कुछ और है। वे सपा और बसपा गठबंधन को समर्थन का ऐलान करते हैं।

उन्होंने सपा-बसपा गठबंधन की जमकर सराहना करते हुए कहा कि यूपी और बिहार से बीजेपी का सफाया होगा। ईडी और सीबीआई अब एजेंसियां नहीं रह गई बल्कि बीजेपी की पार्टनर बन गई हैं जो बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए विरोधियों को परेशान करती है। तेजस्वी ने कहा कि देश में जिस प्रकार से नौजवान बेरोजगार हो चुके हैं, नौकरी की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। किसान आत्मदाह करने पर मजबूर है। जो गठबंधन लालू ने कल्पना करने का काम किया था, वह अब जाकर साकार हुआ है।

उन्होंने कहा कि मायावती को भी मैंने कल धन्यवाद दिया था। उन्होंने सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के लिए देश को बचाने का काम किया है। यूपी में फूलपुर और गोरखपुर के उपचुनाव में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री हार गए तो जनता का विश्वास किसके साथ है यह सब देख रहे हैं। इस गठबंधन पर जनता विश्वास करेगी और यह मैसेज केवल यूपी के लिए नहीं पूरे देश के लिए है। बताते चलें कि सपा और बसपा जिन्हें राज्य की धुर विरोधी पार्टी मानी जाती थी उनके एक साथ आने से राज्य में बड़ा सियासी समीकरण बदलने का अनुमान लगाया जा रहा है। बीजेपी ने सपा-बसपा गठबंधन के आड़े हाथों लेते हुए उन पर जोरदार हमला बोला।

अखिलेश बोले- जनता में बड़ा संदेश गया

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तेजस्वी को लखनऊ आकर उनसे और मायावती से मिलने की बधाई दी। उन्होंने कहा कि जनता में सच में बड़ा संदेश गया है कि हम लोग इस गठबंधन को और विस्तार देंगे और मजबूती प्रदान करेंगे। मौजूदा बीजेपी सरकार से पूरे देश की जनता नाराज है। किसान दुखी है। नौजवानों के रोजगार छीन लिए नौकरी का कोई भरोसा नहीं। देश के व्यापारियों को संकट में डाल दिया गया। अखिलेश ने कहा कि यूपी में गठबंधन हुआ है इसकी खुशी पूरे देश में है। दिल्ली से लेकर के कोलकाता तक और पूरे देश में बीजेपी के खिलाफ हर जगह लोग खड़े हैं। बीजेपी की सरकार ने बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से लेकर के मुंबई तक दे दी। हमने कहा था दिल्ली से चले और लखनऊ आए लखनऊ से पटना जाए पटना से रांची जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इसी वजह से इस इलाके की जनता काफी नाराज है।  हम तेजस्वी जी को बहुत-बहुत बधाई देते हैं कि उन्होंने पूरे देश में एक संदेश देने का प्रयास किया।

यूपी को साथ नहीं पसंद है

पत्रकार पद्माकर पांडेय अपने वरिष्ठ साधुशरण से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। वह कहते हैं कि यूपी की जनता गठबंधन पर कभी भरोसा नहीं करती। एक बार जनता दल से दिल टूटने के बाद अब तक बसपा, सपा और अब भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है। भरोसा है कि ऐसा ही कुछ इस बार भी देखने को मिलेगा। बताते चलें कि पिछले साल 29 जनवरी 2017 को लखनऊ के गोमती नगर स्थित एक पांच सितारा होटल में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गले मिले थे और पीपीपी मॉडल यूपी की जनता के सामने पेश किया था। ‘यूपी को साथ पसंद है’ स्लोगन के साथ चले इस गठबंधन को यूपी में करारी हार का सामना करना पड़ा था और 325 के जादुई आंकड़े पर बीजेपी पहुंच गई थी।