ये हैं कालभैरव को प्रसन्न करने के 12 आसान उपाय

ब्रह्मर्षि श्रीराम व्यास

लखनऊ। आज भैरव अष्टमी है। अगहन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालभैरव अष्टमी मनाई जाती है। पुराणों में वर्णन है कि इस दिन भगवान काल भैरव का जन्म हुआ था। शिव पुराण के अनुसार कालभैरव को भगवान शिव का अवतार माना जाता है, ये भगवान शंकर के दूसरे रूप हैं। इनकी पूजा से घर में नकारत्मक ऊर्जा, जादू-टोने, भूत-प्रेत आदि का भय नहीं रहता। आज के दिन कई रूपों वाले भगवान भैरव के किसी भी एक रूप का दर्शन, पूजन और भजन करने से कई कष्ट दूर हो जाते हैं। लेकिन आम इंसान के लिए भगवान भैरव का पूजन करना सहज नहीं माना जाता। कहते हैं कि भैरव तंत्र के प्रमुख देवता हैं, इसलिए हर तांत्रिक भगवान भोलेनाथ के इस विग्रह की पूजा करता है। आज भैरव अष्टमी को आम इंसान किस तरह पूजा करे कि भगवान भैरव उनकी हर मनोकामना पूरी करें। तांत्रिक पूजा में भैरो पूजा का बहुत महत्व है। माता वैष्णो देवी की पूजा तो बिना भैरव दर्शन के अपूर्ण मानी जाती है। शत्रु विनाश तथा रोगों से बचने के लिए यह पूजा आवश्यक है। राहु की महादशा में भैरो पूजा अति आवश्यक है। राजनीति में सफलता के लिए बंगलामुखी उपासना के साथ यदि भैरव पूजा भी तांत्रिक विधि से की जाय तो बहुत शीघ्र बड़ी सफलता मिलती है। जो लोग बहुत भयभीत रहते हैं या जिनका आत्मबल कमजोर होता है उनको विधिवत भैरव पूजा करनी चाहिए ताकि उनका जीवन निर्भय हो सके।

भैरव जयंती के दिन इनकी उपासना करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। हम यहां आपको कुल 11 ऐसे आसान उपाय बता रहे हैं जिससे आप भगवान भैरव को प्रसन्न कर सकते हैं।

पहला उपाय-

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद कुश के आसन पर बैठ जाएं। सामने भगवान कालभैरव की प्रतिमा स्थापित करें व पंचोपचार से विधिवत पूजा करें। इसके बाद रूद्राक्ष की माला से नीचे लिखे मंत्र की कम से कम पांच माला जाप करें तथा भैरव महाराज से सुख-संपत्ति के लिए प्रार्थना करें।

मंत्र- ‘ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:’

दूसरा उपाय-

भैरव अष्टमी पर किसी ऐसे भैरव मंदिर में जाएं, जहां कम ही लोग जाते हों। अपूज्य भैरव की पूजा से भैरवनाथ विशेष प्रसन्न होते हैं। वहां जाकर सिंदूर व तेल से भैरव प्रतिमा को चोला चढ़ाएं। इसके बाद नारियल, पुए, जलेबी आदि का भोग लगाएं। मन लगाकर पूजा करें। बाद में जलेबी आदि का प्रसाद बांट दें।

तीसरा उपाय-

कालभैरव अष्टमी को एक रोटी लें और अपनी तर्जनी और मध्यमा अंगुली से तेल में डुबोकर लाइन खींचें। यह रोटी किसी भी दो रंग वाले कुत्ते को खिलाएं। इस क्रम को जारी रखें, लेकिन सिर्फ रविवार, बुधवार व गुरुवार। हफ्ते के यही तीन दिन भैरवनाथ के माने गए हैं।

चौथा उपाय-

कालभैरव को प्रसन्न करने का यह सबसे आसान उपाय हैं। भगवान की विधि-विधान से पूजा करें और नीचे लिखे किसी भी एक मंत्र का जाप कम से कम 11 माला अवश्य करें।

ॐ कालभैरवाय नम:।

ॐ भयहरणं च भैरव:।

ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।

ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्

पांचवा उपाय-

कालभैरव अष्टमी की सुबह भगवान कालभैरव की उपासना करें और शाम के समय सरसों के तेल का दीपक लगाकर समस्याओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।

छठा उपाय-

21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। साथ ही, एकमुखी रुद्राक्ष भी अर्पण करें। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

सातवां उपाय-

अगर आप कर्ज से परेशान हैं तो कालभैरव अष्टमी की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव की पूजा करें। उन्हें बिल्व पत्र अर्पित करें। भगवान शिव के सामने आसन लगाकर रुद्राक्ष की माला लेकर इस मंत्र का जाप करें।

मंत्र- ॐ ऋणमुक्तेश्वराय नम:

आठवां उपाय-

इस दिन पहले उड़द की दाल के पकौड़े सरसों के तेल में बनाएं और रात भर उन्हें ढंककर रखें। सुबह जल्दी उठकर सुबह छह से सात बजे के बीच बिना किसी से कुछ बोलें घर से निकलें और कुत्तों को खिला दें।

नौवां उपाय-

सवा किलो जलेबी भगवान भैरवनाथ को चढ़ाएं और बाद में गरीबों को प्रसाद के रूप में बांट दें तथा पांच नींबू भैरवजी को चढ़ाएं और किसी कोढ़ी, भिखारी को काला कंबल दान करें।

दसवां उपाय-

इस दिन सरसो के तेल में पापड़, पकौड़े, पुए जैसे पकवान तलें और गरीब बस्ती में जाकर बांट दें। घर के पास स्थित किसी भैरव मंदिर में गुलाब, चंदन और गुगल की खुशबूदार 33 अगरबत्ती जलाएं।

ग्यारहवां उपाय-

सवा सौ ग्राम काले तिल, सवा सौ ग्राम काले उड़द, सवा 11 रुपए, सवा मीटर काले कपड़े में पोटली बनाकर भैरवनाथ के मंदिर में कालभैरव अष्टमी पर चढ़ाएं।

बारहवां उपाय-

सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान कालभैरव के मंदिर जाएं और इमरती का भोग लगाएं। बाद में यह इमरती दान कर दें। ऐसा करने से भगवान कालभैरव प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा किसी शिव मंदिर में जाएं और भगवान शिव का जल से अभिषेक करें और उन्हें काले तिल अर्पण करें। इसके बाद मंदिर में कुछ देर बैठकर मन ही मन में ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।