रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से केजीएमयू में मचा हाहाकार

  • एमएलबी भट्ट के कार्यकाल में हड़ताल से जूझ रहा है केजीएमयू
  • डॉक्टरों की समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है
  • पहले भी लगते रहे हैं केजीएमयू प्रशासन पर अनेदखी के आरोप

नया लुक संवाददाता,लखनऊ। राजधानी लखनऊ के प्रसिद्ध किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के करीब 800 रेजिडेंटर डॉक्टर  मंगलवार सुबह आठ बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल का ऐलान करने वाले सभी डाक्टर पीजीआई की तर्ज पर वेतन मांग रहे हैं। केजीएमयू में रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से हाहाकार मच गया है। इमरजेंसी सेवाएं वरिष्ठ चिकित्सकों के हवाले आ गई हैं। हड़ताल से करीब 20 हजार मरीज प्रभावित है।
आपको बता दें कि भर्ती मरीजों की अहम जिम्मेदारी रेजीडेंट डॉक्टरों की ही होती है। उनके हड़ताल पर जाने से मरीज बेहाल हो रहे हैं। इमरजेंसी सेवाएं सीनियर डॉक्टरों के जिम्मेदारी पर आ गई हैं। वीसी एमएलबी भट्ट के कार्यकाल में लगातार डॉक्टरों की हड़तालें हो रही हैं। डॉक्टरों की समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है। फिलहाल मरीज बेहाल हैं।


केजीएमयू रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन का आरोप है कि हड़ताल के बारे में पहले ही सूचना दी गई थी, लेकिन केजीएमयू प्रशासन बात करने आगे नहीं आया। एसोसिएशन के मुताबिक, हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवाएं बाधित नहीं होंगी। इसके बावजूद 4500 बेड वाले केजीएमयू में मरीजों की जांन सांसत में पड़नी तय है। बता दें कि प्रशासन ने डॉक्टरों को बातचीत के लिए बुलाया लेकिन केजीएमयू के वीसी एमएलबी भट्ट के साथ उनकी वार्ता सफल नहीं हो सकी जिससे सभी डॉक्टर परिसर के ही कलाम सेंटर पर जाकर बैठ गए। हालांकि केजीएमयू प्रशासन एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर हडताल खत्म करने में जुटा है।


रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. गणेश चन्द्र यादव ने बताया कि सोमवार को पूरा दिन इस मसले पर केजीएमयू प्रशासन की ओर से कोई पहल न होने पर मंगलवार से कार्य बहिष्कार का फैसला लिया गया है। एसोसिएशन के महामंत्री डॉ. नीरज कुमार मिश्रा ने बताया कि रेजिडेंट डॉक्टर दस दिन से काली पट्टी बांधकर काम करते हुए सांकेतिक विरोध जता रहे थे। इसके बाद भी केजीएमयू प्रशासन अनदेखी करता रहा।