वाल्टरगंज चीनी मिल चलाने की मांग को लेकर किसानों ने किया प्रदर्शन

किसानों, नौजवानों के साथ छल कर रही है भाजपा सरकार-सुमन सिंह

श्रवण कुमार

बस्ती। मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज पदाधिकारी बड़े-बड़े दावा करते हैं कि सरकार ने गन्ना मूल्य का भुगतान किसानों को त्वरित रूप से कर दिया है। लेकिन उनकी बातें हवा-हवाई उस समय लगती हैं, जब अपने गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए किसान रौद्र रूप धारण करने लगते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर किसानों ने भूख हड़ताल का रास्ता चुन लिया था। किसानों का कहना था कि जब तक उनके खातों में गन्ना मूल्य भुगतान नहीं आता, वे उठने वाले नहीं हैं। उसके बाद सरकार ने चीनी मिलों को 3066 करोड़ रुपये का सॉफ्ट लोन जारी किया और 2619 करोड़ रुपये की धनराशि किसानों के खाते में पहुंची, जिसमें 80 करोड़ रुपये शामली चीनी मिल के लिए अकेले जारी किए गए।

इसी जीत को ध्यान में रखते हुए बस्ती जिले के वाल्टरगंज चीनी मिल के खिलाफ आसपास के सैकड़ों किसान सड़क पर उतर आए और करोड़ो के बकाया भुगतान को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। गुस्साए किसान बस्ती स्थित पटेल चौराहे के निकट अयोध्या-राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहुंच गए और राज्य महिला आयोग सदस्य सुमन सिंह के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया। जाम का आलम यह था कि घंटों तक आवागमन बाधित रहा। किसान जाम स्थल पर जिलाधिकारी राजशेखर को बुलाने की जिद पर अड़े रहे। बाद में वरिष्ठ अफसरों से वार्ता और आश्वासन के बाद धरना समाप्त किया गया।

जाम के दौरान सुमन सिंह ने कहा कि बीजेपी सरकार में किसान, नौजवान, व्यापारी सभी घोर उपेक्षा के शिकार है। वाल्टरगंज चीनी मिल बंद होने से जहां श्रमिकों का परिवार भुखमरी का शिकार है। वहीं किसानों को गन्ना बेचने में असुविधा हो रही है और उनका बकाया भुगतान भी नहीं हो पा रहा है। भाजपा सराकर के किसानों की आय दो गुनी करने का वायदा बड़ा धोखा है।

बताते चलें कि वाल्टरगंज शुगर मिल बंद होने से किसानों की समस्याएं कई गुना बढ़ चुकी हैं। उसके बाद भी गन्ना मूल्य भुगतान न होने से उनकी परेशानियां कई गुना और बढ़ चुकी हैं। किसानों पर बढ़ते अत्याचार एवं करारी महंगाई की मार के विरोध में हजारों किसानों ने भाजपा सरकार के प्रति आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य राम प्रकाश चौधरी, बृजेश मिश्र, आज्ञाराम चौधरी, सुभाष चौधरी, जयराम पांडे, राकेश राजभर समेत सैकड़ों किसान नेता घंटो डटे रहे और वाल्टरगंज चीनी मिल शीघ्र चलाये जाने की मांग भी की।

असफल साबित हो रहे गन्ना किसान सुरेश राणा

योगी सरकार ने जैसे ही गन्ना विभाग की जिम्मेदारी सुरेश राणा को दी, वैसे ही गन्ना किसानों में खुशी की लहर तेजी से दौड़ पड़ी थी। किसानों को भरोसा था कि गन्ना किसानों का दर्द सुरेश राणा बखूबी समझते हैं। बताते चलें कि राणा खुद गन्ना किसान हैं और गन्ना मूल्य समेत भुगतान के मुद्दे पर सरकार की सड़क पर जबरदस्त मुखालफत कर चुके हैं। बागपत के चौधरी रमेश कहते हैं कि सुरेश राणा गन्ना किसानों की मदद में पूरी तरह से फेल हो चुके हैं। अब वह सरकार में हैं तो मलाई खाने के चक्कर में पड़े रहते हैं।