वाह रे सत्ता का इकबालः राजधानी में भाजयुमो नेता की सरेशाम हत्या

  • कांग्रेस नेता हिमांशु ने कहा- लॉ एंड आर्डर में फेल है यूपी सरकार
  • बसपा सुप्रीमो ने कसा तंज- अब पुलिसवाले भी नहीं सुरक्षित

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। अपराध पर लगाम लगाने के उत्तर प्रदेश सरकार के सारे इंतजामात नाकाफी साबित हो रहे हैं। ताजा मामला राजधानी लखनऊ का है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता की अज्ञात हमलावरों ने चाकू गोदकर हत्या कर दी। भाजयुमो नेता प्रत्यूषमणि त्रिपाठी (36) पर कल शाम को बादशाहनगर में हमला हुआ था। सूत्रों का कहना है कि हत्या करने के बाद आरोपी भाजयुमो नेता को बीच सड़क पर फेंक कर भाग निकले। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत ट्रामा सेंटर पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इससे पहले भाजयुमो नेता के घर में घुसकर दस दिन पहले ही हमला हो चुका है। उन्होंने कैसरबाग कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था और सुरक्षा की मांग की थी।

प्रत्यूष के मित्र शैलेंद्र के मुताबिक घटना के बाद उन्होंने पुलिस अफसरों से सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन प्रत्यूष को यह कहकर सुरक्षा नहीं दी गई कि तुम तो हट्टे-कट्टे हो सुरक्षा की क्या जरूरत? इस घटना से पुलिस की घोर लापरवाही भी उजागर हुई है, अगर सुरक्षा मिल जाती तो हत्या भी न होती। शैलेंद्र के अनुसार एक समुदाय के जिन लोगों ने प्रत्यूष के घर पर हमला किया, उन्होंने ही हत्या की। शैलेंद्र के मुताबिक जब वह ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो प्रत्यूष ने लड़खड़ाती आवाज में उन्हें बताया कि घर पर हमला करने वालों ने ही पहले उन्हें पीटा फिर चाकू मार दिया।

पुलिसिया कार्रवाई से नाराज परिजनों ने हत्या के अगले दिन ट्रॉमा सेंटर के प्रवेश द्वार पर जमकर हंगामा किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बुलाने की जिद पर अड़े परिजनों ने नारेबाजी कर एसएसपी कलानिधि नैथानी को बर्खास्त करने की मांग की और बिना गिरफ्तारी के शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। मौके पर पहुंचे एडीजी जोन, आइजी रेंज, डीएम और एसएसपी से भाजपा नेताओं से आधी रात तक नोंक-झोंक होती रही। पुलिस मुकदमा दर्ज कर कुछ संदिग्धों से पूछताछ भी कर रही है। हालांकि कानून मंत्री के ट्रॉमा सेंटर पहुंच कर जल्द गिरफ्तारी के आश्वासन के बाद प्रदर्शन ही बंद हुआ और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। इनके साथ ही भाजपा नगर अध्यक्ष, जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा, महापौर संयुक्ता भाटिया व अन्य वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने डेढ़ घंटे तक परिवारीजनों के साथ ट्रामा के अंदर बातचीत की। इसके बाद ट्रामा के बाहर ही मंत्री और परिवारीजनों ने दो मिनट का मौन रखकर प्रत्यूष को श्रद्धांजलि दी। इसी अफरा-तफरी के बीच मृतक भाजयुमो नेता की पत्नी ने महानगर कोतवाली में तहरीर दी।

जानकारी के अनुसार अमीनाबाद के गगनी तालाब पत्थर वाली गली निवासी प्रत्यूष मणि त्रिपाठी सोमवार देर शाम बाइक से बादशाहनगर गए थे। वहां अज्ञात व्यक्तियों ने चाकू से हमला किया। प्रत्यूष गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गए। हत्यारोपित वार करने के बाद मरणासन्न हालत में सड़क के किनारे छोड़कर भाग गए थे। एक व्यक्ति ने पुलिस को फोन करके हादसे की सूचना दी। सीओ महानगर संतोष सिंह के मुताबिक सूचना मिली कि बादशाहनगर में मेन रोड पर एक युवक घायल अवस्था में पड़ा है। दुर्घटना की आशंका में पुलिस पहुंची तो युवक खून से लथपथ पड़ा था। उसके बाएं कंधे में चाकू मारा गया था। दरोगा अरविंद सिंह अपनी जीप से उसे ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

जेब से मिले परिचयपत्र से प्रत्यूष की पहचान करने के साथ पुलिस ने उन्हें ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। ट्रॉमा सेंटर पहुंचे परिवारीजनों ने सीने पर धारदार हथियार की चोट का निशान देखते हुए हफ्ता भर पुरानी रंजिश में हत्या का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। भाजयुमो नेता की हत्या का पता चलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने कई थानों की पुलिस के साथ पीएसी को ट्रॉमा सेंटर भेजा। कैसरबाग पुलिस की टीम ने प्रत्यूष के घर पहुंचकर परिवारीजनों से जानकारी की। क्षेत्राधिकारी कैसरबाग अमित राय ने बताया कि 25 नवंबर को प्रत्यूष मणि त्रिपाठी का मोहल्ले के कुछ लोगों से विवाद हुआ था।

एक युवती ने प्रत्यूषमणि पर छेड़खानी का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्रत्यूष का कहना था कि युवती ने फेसबुक पर उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। उसे स्वीकार न करने पर अपने भाइयों से हमला कराया। पुलिस ने प्रत्यूष की भी प्राथमिकी दर्ज की थी। परिवारीजनों का कहना है कि हफ्ता भर पहले हमला कर चुके युवकों पर ठोस कार्रवाई न किए जाने के कारण वारदात अंजाम दी गई। मौत की खबर सुनते ही पत्नी सीमा त्रिपाठी बिलखने लगी। परिवारीजनों ने सीमा के साथ उनकी बेटी रुद्राक्षी, बेटे वंश व दो महीने की बच्ची को किसी तरह संभाला। फिलहाल घटना से घर में कोहराम मचा हुआ है।

एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि रात सवा दस बजे के करीब सड़क दुर्घटना की सूचना पर महानगर पुलिस के साथ पीआरवी मौके पर पहुंची थी, जहां प्रत्यूषमणि त्रिपाठी लहूलुहान हालत में पड़े थे, पास में ही उनकी बाइक भी पड़ी थी। उन्हें ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें सीने के पास चाकू मारा गया है।

भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री रह चुके प्रत्युष वर्तमान में उपाध्यक्ष पद पर कार्यरत थे। भाजपा नेता ने अमीनाबाद कोतवाली में एक समुदाय के खिलाफ एफआइआर कराई थी। इसके बाद अज्ञात लोगों ने उनके घर में घुसकर हमला किया था। शिकायत के बावजूद पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप है। घरवालों ने इसी रंजिश के तहत हत्या की आशंका जताई है। उधर पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर एक आरोपित को गिरफ्तार करने का दावा किया है। उधर एसएसपी के मुताबिक प्रत्यूष पर भी एक महिला ने छेड़खानी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, बाद में उन्होंने महिला के भाई पर मुकदमा कराया था।

इंस्पेक्टर महानगर विकास पांडेय बताते हैं कि घटनास्थल के पास प्रत्यूष की बाइक भी खड़ी थी। चश्मदीदों से पूछताछ में पता चला कि प्रत्यूष लहूलुहान हालत में मिले। आशंका है कि उनकी कहीं और पिटाई कर चाकू घोंपकर हत्यारे यहां फेंक गए।

राजधानी लखनऊ में भाजपा के एक और युवा नेता की हत्या का जिक्र करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती कहती हैं कि भाजपा की बढ़ती हुई भीड़तंत्र की उग्र एवं हिंसक स्थिति का शिकार अब स्वयं इनके लोग ही होने लगे है। पहले दलितों, पिछड़ों, मुस्लिम तथा अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को अपनी हिंसा व उग्रता का शिकार बनाने वाले ये अराजक लोग अब अपनी आदतों से मजबूर लगते हैं। ऐसी स्थिति में भी भाजपा की सरकारें सख्त कदम उठाने का अपना कर्तव्य निभाने में पूरी तरह से विफल साबित हो रही हैं।

कांग्रेस सेवादल के पूर्वी जोन संयोजक इ. हिमांशुधर द्विवेदी कहते हैं कि जो सरकार पार्टी अपने कार्यकर्ताओं की रक्षा नहीं कर सकती, वह जनता की सुरक्षा क्या कर पाएगी? पुलिस का इकबाल इतना कमजोर है कि बुलंदशहर में दिन-दहाड़े कोतवाल की हत्या हो जाती है और सरकार कानून-व्यवस्था की दुहाई देती रहती है।  खबर लिखे जाने तक कैसरबाग के थाना प्रभारी धीरेंद्र कुशवाहा को निलम्बित कर दिया है।

अखिलेश ने कहा-राज्य अराजकता के दौर से गुजर रहा है। पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने भी योगी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्‍होंने ट्वीट भी किया था  ‘बुलंदशहर में पुलिस और ग्रामीणों के संघर्ष में स्याना के इंस्‍पेक्‍टर सुबोध कुमार सिंह की मौत का समाचार बेहद दुखद है। भावपूर्ण श्रद्धांजलि। उत्‍तर प्रदेश बीजेपी के शासनकाल में हिंसा और अराजकता के दुर्भाग्यपूर्ण दौर से गुजर रहा है।’