विवादों के ‘आजम’ बनाम विवाद पुरुष ‘अमर’ कहानी शुरू

लखनऊ से नया लुक के लिए दिनेश त्रिपाठी

जब आजम खान के शब्दों के बाण चलते हैं तो वह बड़े-बड़े नेताओं को भी नहीं छोड़ते। उस समय वह किसी पर भी हमला करने से गुरेज नहीं करते। खुद को मुस्लिमों का सबसे बड़ा हितैषी मानने वाले सपा नेता आजम एक बार फिर ‘चर्चा’ की सियासत कर रहे हैं। खास बात यह है कि अपने विवादित बयानों की वजह से बवाल मचाने वाले आजम पर मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव कोई भी कार्रवाई करने से हमेशा बचते रहे हैं। आज भी आजम समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरा माने जाते हैं। ठीक उन्हीं की तरह अमर सिंह चर्चा का सहारा तो लेते हैं लेकिन कब किसके लिए तान छेड़ दें यह पता नहीं होता। बीजेपी जैसी पार्टी पर भगवा आतंकी की मुहर लगाने वाले अमर सिंह के सुर बिल्कुल बदले हुए हैं। उनकी बातों से लगता है कि ह यूपी के सीएम आदित्यनाथ के बहुत बड़े फैन हो चुके हैं। ‘गोरखपुर के बाबा’ अब उनकी नजर में लौह क्षत्रिय पुरुष हो चुके हैं। वह मोदी के लिए भी तान छेड़ते हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी पर हमला करने से नहीं चूकते। राजनीति के जानकारों का कहना है कि उन्हीं के इशारे पर शिवपाल ने सेक्यूलर मोर्चा का गठन किया है और सपा को कमजोर करने के लिए बीजेपी की डमी बने नाच रहे हैं।

सुर्खियों के आजम, परिस्थितियों के अमर

लखनऊ। अपने तीखे बयानों से हमेशा चर्चा में रहने वाले यूपी के कद्दावर नेता आजम खान आजकल फिर सुर्खियों में हैं। रामपुर जिले में एक कार्यक्रम के दौरान उनका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह भारतीय सेना पर अभद्र टिप्पणी करते नजर आए। वह वीडियो में कह रहे थे कि दहशतगर्द फौज के प्राइवेट पाट्र्स काटकर साथ ले गए। उन्हें हाथ से शिकायत नहीं थी। सिर से नहीं थी। पैर से नहीं थी। जिस्म के जिस हिस्से से उन्हें शिकायत थी, वे उसे काटकर ले गए। यह इतना बड़ा संदेश है, जिस पर पूरे हिंदुस्तान को शर्मिदा होना चाहिए और सोचना चाहिए कि हम दुनिया को क्या मुंह दिखाएंगे?

अब आजम खान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वह समाजवादी कोटे से राज्यसभा सांसद अमर सिंह के चलते सुर्खियों में हैं। अमर सिंह ने उनके ऊपर एक एफआईआर दर्ज कराई है। एफआईआर दर्ज कराने से पहले अमर सिंह अपने विरोधियों खासकर आजम और अखिलेश पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह जया प्रदा को जानते भी नहीं थे। आज़म खान ने कहा था रामपुर में एक नूर है जिसके निपटने के लिए हूर चाहिए। बस, मुलायम सिंह ने मेरे कहने से मात्र एक टिकट दिया। आने वाले चुनाव में अमिताभ, ऐश्वर्या नृत्य नहीं करेंगें तो अखिलेश सेंसर कर देंगे।

वह जोर देकर कहते हैं कि आज़म खान ने एक इंटरव्यू में कहा जब तक इनकी जवान हो रही बेटियों को काटा नहीं जाएगा तब तक देश मे दंगे नहीं रूकेंगें। तेजाब से जलाया नहीं जाएगा तब तक दंगे नहीं रूकेंगें। अखिलेश ने मेरी बेटियों अपनी बहनों की रक्षा के लिए कुछ नहीं कहा। लालू यादव के दोनों बेटों में क्या चल रहा है। सबको मालूम है यदुवंश का नाश आपस मे लड़कर ही होता है। युवा हिन्दू वाहिनी भारत का मैं संरक्षक बना हूं। हिंदुत्व के नाम जो मेरे पास आएगा उसको मेरा समर्थन है। मुझे भी एक मंच चाहिए था, आज़मगढ़ के लालगंज में आज़म खान के खिलाफ मुकदमा लिखाए जाने के बावजूद नहीं दर्ज हुआ। मुकदमा बलराम यादव के कहने पर नहीं हुआ।

क्षत्रिय डीजीपी को नहीं छोड़ा पूर्वांचल के इस ठाकुर ने

योगी आदित्यनाथ ने बाद पूर्वांचल में क्षत्रियों की अगुआई करने वाले अमर सिंह ने डीजीपी ओपी सिंह को भी नहीं बख्शा। उन्होंने डीजीपी पर बरसते हुए कहा कि डीजीपी धर्म निरपेक्ष हैं, लेकिन मेरा मुकदमा दर्ज नहीं हो रहा है। अलीगढ़ में एक वर्ग की ओर से मुकदमा लिखाया जाता है उनके पास लाहौर,रावलपिंडी है, हम कहां जाएंगें। डिंपल यादव टीवी पर मेरा चेहरा देखकर टीवी बंद कर देती हैं। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी मेरी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं हो रहा है। सीओ, डीजीपी और अधिकांश पुलिसवाले मुख्यमंत्री की बात नहीं सुनते हैं। डीजीपी शायद शिथिल आदमी होंगें, लेकिन योगी लौह पुरुष हैं। मैं एफआईआर के लिए हर कानूनी लड़ाई लड़ूंगा।

पुलिस ने कहा कि गोमती नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। सिंह ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘मैंने अपनी बेटियों पर तेजाब फेंकने की धमकी देने के मामले में आजम खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए गोमती नगर पुलिस थाने में प्रार्थना-पत्र दिया था।’’ सिंह ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी (सपा) नेता ने एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में उन पर और उनकी 17 वर्षीय जुड़वां बेटियों पर तेजाब फेंकने की धमकी दी थी।

सिंह 30 अगस्त को रामपुर गए थे और खान से कहा था कि उनकी ‘बलि’ ले लें लेकिन उनकी बेटियों को छोड़ दें। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की पुष्टि की है। पुलिस ने कहा कि सिंह के प्रार्थना-पत्र पर आजम खान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें धारा 153ए, 295ए और 506 शामिल हैं।

सीएम की शान में जमकर कसीदे गढ़े
सीएम योगी लौहपुरूष हैं। मैं क्षत्रिय हूं और मठ क्षत्रियों का है। सीएम मजबूत हैं लेकिन शायद डीजीपी की पकड़ ढीली है। मुसलमानों को और पंडितों को गोली मारती है। यूपी के डीजीपी ओपी सिंह सुधर जाएं या विभाग को सुधार दें। आज़म खान के खिलाफ दी गई तहरीर स्वीकृत हो गई है। आज़म से हम विधिक लड़ाई लड़ रहे हैं। मोदी जी हार जाएंगे तो गुजरात चले जाएंगे बुआ,बबुआ सत्ता में आयेंगे तो एससीएसटी एक्ट सवर्णों पर बजेगा।

आजम के विवादित बयान

इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किये जाने पर आजम खान कहते हैं कि सवाल अकबर और औरंगजेब का नहीं है। किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज का नाम बदला गया, पूरी दुनिया मे इसका विरोध हुआ, लेकिन नाम किंग जार्ज ही रहा।  मुसलमानों की मैज्योरिटी होने के बाद भी रामपुर को मुस्तफाबाद नहीं कहा गया। मुसलमान खुले दिल के थे, जो राम और मुस्तफा में फर्क नहीं करते थे।उन्होंने कहा कि नाम ऐसी चीज है, जो दिलों पर लिखी होती है। मुझे लगता है कि सरकार का अगला कदम ये होगा, कि मुसलमान अपने नाम भी बदलें। बीजेपी हमारी बात माने। 10 करोड़ नौजवानों को नौकरी दे या ताजमहल गिराकर शिव मंदिर बनाए। सपा नेता के नाते हम कह रहे हैं शिव मंदिर बनाए। बाबरी मस्जिद गिराई जा सकती है, क्योंकि उसकी कोई कीमत नहीं थी। ताजमहल से करोड़ों रुपये की कमाई होती है।

दादरी हत्याकांड पर विवादित बयान देने वाले आजम खान ने कहा कि हिम्मत है तो बीफ बेचने वाले होटलों को बाबरी मस्जिद की तरह तोड़ दो। आजम खान ने एक समुदाय विशेष पर टिप्पणी करते हुए कहा कि गोभक्त आज के बाद किसी भी होटल के मेन्यू में बीफ की कीमत न लिखने दें। अगर ऐसा होता है तो सभी पांच सितारा होटलों को तोड़ दिया जाए जैसे बाबरी मस्जिद को तोड़ा गया था।

वर्ष 2013 में आजम ने कारगिल युद्ध पर विवादित बयान देते हुए कहा था कि कारगिल की पहाडिय़ों पर फतह करने वालों सेना के जवान हिंदू नहीं मुस्लिम थे। आजम के इस बयान को लेकर काफी विवाद हुआ था, लेकिन आजम अपने बयान पर कायम रहे।

उन्होंने पीएम मोदी को लेकर विवादित बयान दिया था। कहा था कि कुत्ते के बच्चे के बड़े भाई हमें तुम्हारा गम नहीं चाहिए। दरअसल मोदी ने एक इंटरव्यू में एक विदेशी मैग्जीन के एक सवाल के जवाब में कहा था कि अगर आपकी कार के नीचे कुत्ते का बच्चा भी आता है तो दुख होता है। आजम ने मोदी के कुत्ते वाले बयान को मुस्लिमों से जोड़ते हुए ये विवादित बयान दिया था।

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में आजम ने भड़काऊ बयाने देते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा था कि 302 का अपराधी गुंडा नंबर वन शाह यूपी में दशहत फैलाने आया है। बाद में जब इस बयान खूब हंगामा बरपा तो आजम ने कहा कि क्या ऐसे अपराधी को भारत रत्न दिलवा दूं। आजम को तीखे बयानों की वजह से वर्ष 2014 में चुनाव आयोग ने नोटिस भी थमा दिया था।

बदांयू के एक कार्यक्रम में उन्होंने महिलाओं के बारे में कई आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कहा है कि गरीब घरों की महिलाएं यार के साथ नहीं जा सकतीं, लिहाजा ज्यादा बच्चे पैदा करती हैं।

भैंस चोरी को लेकर हुए चर्चित

साल 2014 में अपनी भैंसों के चोरी होने की खबरों को लेकर वह सुर्खियों में आए। यूपी की पूरी पुलिस फोर्स उनकी भैंसों को ढूंढने में लग गई और दो दिन के अंदर उनकी भैंसें मिल गई। इसको लेकर देश भर में काफी चर्चा हुई। इस मामले में एक दारोगा और दो कांस्टेबल को लाइन अटैच कर दिया गया था। मुजफ्फरनगर दंगों और प्रदेश में आए दिन आपराधिक घटनाएं होने के बीच भैंसों को ढूंढने में पुलिस की इस कदर मुस्तैदी को लेकर मीडिया ने सरकार की जमकर खिंचाई की थी।

मुजफ्फनगर दंगे में उछला नाम

साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों में आजम का नाम उछला, एक न्यूज चैनल के स्टिंग ऑपरेशन ने अखिलेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया था। स्टिंग में सामने आया था कि पुलिस अफसर पर दबाव डालकर दंगा करने वाले दोषियों को जेल से छुड़वाया गया। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान फुगाना थाने के एसएचओ ने कहा था कि सरकार से जुड़े किसी आजम खान नाम के व्यक्ति  ने फोन कर कहा था कि जो हो रहा है, होने दो।

कौंन हैं आजम

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से की राजनीति की शुरुआत करने वाले आजम की पहचान ही विवादित नेता के रूप में की जाती है। साल 1976 में जनता पार्टी ज्वॉइन कर जनता पार्टी में ही रहकर जिला स्तर की राजनीति की। बाद में लोकदल पार्टी से जुड़ गए, लेकिन कुछ ही महीनों बाद दोबारा जनता दल में आ गए। फांसीवाद और राजनीतिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए अलीगढ़, फैजाबाद, उन्नाव और वाराणसी में तीन साल के लिए जेलों में कैद भी रहे।

साल 1989 में आजम उत्तर प्रदेश सरकार में काबीना मंत्री बने और 5 दिसंबर 1989 से 24 जून 1991 तक श्रम, रोजगार, मुस्लिम वक्फ और हज के लिए काम किया। वर्ष 1993 में वो दोबारा विधानसभा का चुनाव जीतकर राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। साल 1994 में आजम खान मॉइनॉरिटी फोरम ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बने और समाजवादी पार्टी से जुड़ गए। 26 नवंबर 1996 से 9 मार्च 2002 तक राज्यसभा सांसद रहे आजम 13 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक उत्तरप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। छह सितंबर 2003 से 13 मई 2007 तक तथा दोबारा 15 मार्च 2012 से 19 मार्च 2017 तक संसदीय मामलों, शहरी विकास, जल आपूर्ति, शहरी रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन के कैबिनेट मंत्री बने।