शाबास मेरे शेर! एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का जज्बा

नया लुक टीम

नई दिल्ली। खेल दिवस से एक दिन पहले भारतीय खिलाड़ियों ने एशियाई खेलों में इतिहास रच दिया आठ सौ मीटर की दौड़ में हरियाणा के मनजीत सिंह में गोल्ड जीता तो जींस अनजान सर ने चांदी पर कब्जा जमा लिया बताते चलें कि 67 साल बाद यह पहला मौका है जब एक ही स्पर्धा में दो पदक भारत के हाल आए हैं। कल की इस जीत से आज खेल दिवस पर हर भारतीय खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

टीम इंडिया इस बार पूरे गांव में प्रदर्शन ऐसा कि हर किसी का सीना गर्व से चौड़ा हो चुका है। इस बार टीम इंडिया ने इस प्रतिस्पर्धा में कुल नौ पदक जीते हैं।साथ ही एशियाड में पदकों का अर्धशतक लगा लिया है। एशियाड में पहली बार ऐसा हुआ है जब पहली बार शामिल कुराश में पिंकी ने रजत और मालप्रभा ने कांस्य पदक पर कब्जा जमा लिया। इसके अलावा टेबल टेनिस में भारत की पुरुष टीम ने एशिया का पहला पदक जीता। वहीं भारत की बैडमिंटन सिंधु ने हार के बाद भी जीत इतिहास रच दिया। कल फाइनल में हार के बावजूद रजत पदक जीतकर इतिहास रचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी हैं, जिन्होंने 36 साल बाद कोई पदक जीता है। इसके पहले साल 1982 में मोदी ने पुरुष एकल का जीता था।

हालांकि दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी ताई यूजिंग के खिलाफ भारतीय खिलाड़ी पीवी सिंधु का प्रदर्शन एक बार फिर निराशाजनक 34 मिनट में मुकाबला हार बैठे जानकारों का कहना है कि पीवी सिंधु पहले से ही उनके नाम से डरी हुई थी इसलिए वह हार गई तीसरी वरीयता प्राप्त इस मैच में काफी दबाव में थी और उनके पास विपक्षी खिलाड़ी के लिए दमदार सेट लगाने का कोई विकल्प नहीं था।

वहीं भारत के मनजीत सिंह ने क्या रणनीति के तहत जान झोंक दिया और पहला स्वर्ण पदक जीत लिया। मंगलवार को 800 मीटर दौड़ में मनजीत में आखिरी 200 मीटर तक पांचवें स्थान पर थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी रफ्तार बढ़ाई और पहले नंबर पर पहुंच गया। कांटे की इस दौड़ में उन्होंने हम वतन स्टार प्ले जींस अनजान शहर के अब्दुल्ला अबू बकर को पछाड़कर यह पदक अपने नाम कर लिया। दसवें दिन भारत का एकमात्र स्वर्ण पदक था

कौन है मंजीत

एशियाड के दसवें दिन सोना जीतने वाले मनजीत के पास कोई नौकरी नहीं थी। वह बेरोजगार हैं, उन्होंने बेरोजगारी का जीवन जीते हुए भी बड़े मन से यह तैयारी की और आज सोना जीतकर उन्होंने देश का मान बढ़ाया है।