‘एक साथ चुनाव’ पर कहीं समर्थन, कहीं विरोध तो कहीं चुप्पी

नया लुक संवाददाता, नई दिल्ली। एक बार फिर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर बहस छिड़ गई है। लेकिन राजनीतिक दल लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने के मुद्दे पर बंटे हुए दिख रहे हैं। चार राजनीतिक दल जहां इस विचार के समर्थन में हैं, वहीं नौ इसके खिलाफ हैं। हालांकि सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस विषय पर विधि आयोग की ओर से आयोजित परामर्श प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।
विधि आयोग ने इस विषय पर चर्चा के लिए परामर्श प्रक्रिया की एक बैठक भी बुलाई लेकिन इसमें दोनों मुख्य दल बीजेपी और कांग्रेस ने हिस्सा ही नहीं लिया। एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर दो दिवसीय कार्यक्रम के अंत में एनडीए के सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के अलावा, AIADMK, सपा और टीआरएस ने इस विचार का समर्थन किया है। आयोग ने इस मुद्दे पर विचार रखने के लिए 7 राष्ट्रीय और 59 क्षेत्रीय दलों को न्यौता दिया था।


बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को समाजवादी पार्टी (एसपी), जेडीयू और तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) का साथ मिला है। वहीं डीएमके ने इसे संविधान के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ बताया है। सपा का प्रतिनिधित्व राम गोपाल यादव ने किया। सपा ने इस विचार का समर्थन किया। हालांकि उन्होंने साफ किया कि पहला एक साथ चुनाव 2019 में होना चाहिए जब 16वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होग। अगर 2019 में एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की बीजेपी सरकार का कार्यकाल छोटा हो जाएगा।