सावधान! बोतल बंद पानी पीने के आदी हैं तो यह खबर आपके लिए है….

प्रमुख संवाददाता

मुम्बई। भारत समेत दुनिया भर में पानी बिक रहा है। अब आकर्षक प्लास्टिक बोतलों में पानी इस कदर बेचते हैं जैसे उसकी गुणवत्ता दूध से भी ज्यादा हो। पानी बेचने वाली सभी कंपनियां शुद्धता की गारंटी देती हैं, एक अध्ययन की माने तो पानी के 90 प्रतिशत नमूनों में प्लास्टिक के हजारों सूक्ष्म कण पाए गए। मुंबई स्थित भाभा शोध संस्थान की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य से 27 गुना ज्यादा तक घातक रसायन मिलने से बोतलबंद पानी कैंसर का बड़ा कारण बन सकता है। अनुसंधान में पाया गया कि क्लोराइड सामान्य से 21 गुना ज्यादा मात्रा मिली है। इससे आंत, लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचता है। साथ ही सामान्य से 24 गुना ज्यादा क्लोरेट मात्रा की मौजूदगी मिली है। इससे शरीर के सॉफ्ट टिश्यू कड़े होने लगते हैं।

स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क ने अपने अध्ययन में नौ देशों के 11 अलग-अलग ब्रांडों की 259 बोतलों की जांच की गई थी। इनमें भारत ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया और अमेरिका शामिल थे। अध्ययन में एक्वाफिना, एवियन और बिसलेरी का परीक्षण किया गया था। अध्ययन के बाद जारी रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक चेन्नई के बिसलेरी के एक लीटर पानी में प्लास्टिक के 5,000 छोटे-छोटे कण पाए गए थे। इंडोनेशियाई ऐक्वा के सैंपल में यह आंकड़ा 4713 था, जबकि अमेरिका और भारत के ऐक्वाफिना में 1295 प्लास्टिक के कण पाए गए थे। नेस्ले सहित कई दूसरी नामी कंपनियों के पानी में भी इसी तरह की मिलावट मिली थी।

प्लास्टिक बंद करने का गुहार मचा रहे चिकित्सक कहते हैं कि महामारी की तरह बढ़ रहे कैंसर पर काबू करने के लिए यह बहुत जरूरी है, जबकि पानी बेचने वाली कंपनियां कहती हैं कि उनके यहां पानी की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रख जाता है। बोतलबंद पानी के ढक्कन में पॉलिप्रोपिलीन (मजबूत किस्म का प्लास्टिक) का इस्तेमाल होता है। अध्ययन के नमूनों में पाए गए प्लास्टिक कणों में 54 प्रतिशत इसी के थे।

न्यूयॉर्क स्थ‍ित फ्रेडोनिया विश्वविद्यालय की शोधकर्ता शेरी मेसन ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि बोतल बंद पानी में प्लास्टिक के अवशेष मिले होते हैं. यह दावा उन्होंने दुनियाभर से लिए गए बोतल बंद के नमूनों की जांच के बाद किया है. उनकी तरफ से की गई जांच में 93 फीसदी नमूनों में प्लास्टिक के अवशेष मिले। मेसन का दावा है कि प्लास्टिक की बोतल में बंद पानी में पॉलीप्रोपाइलीन, नायलॉन और पॉलीइथाईलीन टेरेपथालेट जैसे अवशेष शामिल होते हैं। इन सभी का इस्तेमाल  बोतल का ढक्कन बनाने में होता है।

भारत में बुरा है पीने के पानी हाल

भारत में पीने के पानी की पैकेजिंग कैसे होती है, इसे लेकर नियमन की व्यवस्था ढीली-ढाली है। देश के हर कोने में हजारों छोटे-बड़े ब्रांडों में पानी बेचने की होड़ लगी है। इनके लिए नियम-कायदे तय करने का काम राज्य और केंद्र स्तर की एजेंसियों का है। उसी के तहत भारतीय मानक ब्‍यूरो (बीआईएस) ने हाल ही में दिल्‍ली के मायापुरी औद्योगिक क्षेत्र में हाईटैक एक्‍वा कंपनी पर छापा मारा। कंपनी अवैध लाइसेंस संख्‍या-सीएम/एल-8726490 के साथ फ्रेशियर ब्रांड के नाम से 20 लीटर क्षमता वाले बोतलबंद पेयजल का निर्माण करती थी। छापे के दौरान कंपनी के परिसर में अवैध लाइसेंस संख्‍या-सीएम/एल-8556592 के साथ पैरी ब्रांड और अवैध लाइसेंस संख्‍या-सीएम/एल-0002500232 के साथ बिस्‍लेरी ब्रांड नाम के 20 लीटर क्षमता वाले कई खाली जार बरामद हुए। बीआईएस के वैध लाइसेंस के बिना बोतलबंद पेयजल का उत्‍पादन बीआईएस कानून 2016 की धारा 17 (3) के तहत यह संज्ञेय अपराध है।