सावधान! स्मार्ट फोन के ज्यादा लती हैं तो आप भी हो जाएंगे इस खतरनाक बीमारी के शिकार

इस डिजिटल युग में, अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है पूर्ण संयम, यानी प्रौद्योगिकी का हल्का फुल्का उपयोग होना चाहिए। इलेक्ट्रानिक कर्फ्यू का मतलब है सोने से 30 मिनट पहले किसी भी इलेक्ट्रानिक गैजेट का उपयोग न करना। पूरे दिन के लिए सप्ताह में एक बार सोशल मीडिया के इस्तेमाल से बचें।

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। यदि आप ज्यादा समय तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए हैं। अधिक समय तक फोन पर लगे रहने से मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ रहा है और उनमें अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिस्और्डर (एडीएचडी) के लक्षण उत्पन्न हो रहे हैं। एक पत्रिका में प्रकाशित एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि अक्सर डिजिटल मीडिया उपयोग करने वालों में एडीएचडी के लक्षण लगभग 10 प्रतिशत अधिक होने का जोखिम दिखाई दे रहा है। लड़कियों के मुकाबले लड़कों में यह जोखिम अधिक है और उन किशोरों में भी अधिक मिला जिन्हें पहले कभी डिप्रेशन रह चुका है।

उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन के उपयोग से संबंधित बीमारियों का एक नया स्पेक्ट्रम भी चिकित्सा पेशे के नोटिस में आया है। शोध की मानें तो कुछ दिन में यह बीमारी महामारी का रूप धारण कर लेगी और 10 साल में सर्वाधिक हो जाएगी। एडीएचडी के कुछ सबसे आम लक्षणों में ध्यान न दे पाना (आसानी से विचलित होना, व्यवस्थित होने में कठिनाई होना या चीजों को याद रखने में कठिनाई होना), अति सक्रियता (शांत होकर बैठने में कठिनाई) और अचानक से कुछ कर बैठना (संभावित परिणामों को सोचे बिना निर्णय लेना) शामिल हैं।

क्या होता है इसका प्रभाव

एडीएचडी के कारण स्कूल में खराब परफारमेंस सहित किशोरों पर कई अन्य नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। इससे जोखिम भरी गतिविधियों में दिलचस्पी, नशाखोरी और कानूनी समस्याओं में वृद्धि हो सकती है। किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज में लॉरी कार्डियोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. वीएस नारायण कहते हैं कि स्मार्टफोन की बढ़ती लोकप्रियता के चलते युवाओं की नींद पूरी तरह से डिस्टर्ब हो चुकी है। इस कारण वह दिन में भी ठीक से काम नहीं कर पाते हैं धीरे-धीरे दिल की गम्भीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।

सोने से 30 मिनट पहले खुद को करें फोन से दूर

वहीं शहर के युवा न्यूरो एंड साइक्रेटिस्ट डॉ. प्रणब पांडेय कहते हैं कि युवाओं में फेसबुक, इंटरनेट, ट्विटर और ऐसे अन्य एप्लीकेशंस में से एक न एक का आदी होने की प्रवृत्ति आम है। इससे अनिद्रा और नींद टूटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लोग सोने से पहले स्मार्ट फोन के साथ बिस्तर में औसतन 30 से 60 मिनट बिताते हैं। वह कहते हैं कि गैजेट्स के माध्यम से जानकारी की कई अलग-अलग धाराओं तक पहुंच रखने से मस्तिष्क के ग्रे मैटर के घनत्व में कमी आई है, जो संज्ञान के लिए जिम्मेदार है और भावनात्मक नियंत्रण रखता है। इसलिए जरूरी है कि सोने से 30 मिनट पहले खुद को स्मार्ट फोन से दूर रखें, नहीं तो नींद खराब हो जाएगी।