सिंघम के अवतार में दिखे संतकबीरनगर के एसपी आकाश तोमर

सूरज मिश्र

संतकबीरनगर। करंट की चपेट में आए युवक की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप मढ़ते हुए हंगामा क्या काटा, एसपी पूरे तेवर में आ गए। इसकी चर्चा पूरे जिले में जोर-शोर से हैं। कोई उन्हें रियल सिंघम कह रहा है तो कई लोगों ने उन्हें गरीबों का मसीहा बताना शुरू कर दिया है। एसपी की कार्रवाई भी काबिले-तारीफ थी।

खबरों के मुताबिक गरीब लाचार जरूरतमंद की खबर पाकर मौके पर पहुंचे एसपी आकाश तोमर ने पहले स्थिति को संभालने की भरपूर कोशिश की, फिर धरनारत डॉक्टरों समेत सभी स्वास्थ्य कर्मियों को समझाने-बुझाने का काम किया, लेकिन जब वह नहीं माते तो उन्होंने सख्ती से काम लेते हुए डॉक्टरों और स्वाथ्यकर्मियों को हिरासत में लेकर कोतवाली पहुंचवाया।

मृतक युवक विशाल के परिजनों के हंगामे को नागवार समझ डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मी यूनियन ने इमरजेंसी सेवा को बाधित करते हुए जैसे ही धरना शुरू किया गया वैसे ही जिले की स्वास्थ्य सेवा लडखडाती नजऱ आने लगी। जरूरतमंद मरीज इलाज के अभाव में दर-दर भटकने लगे, क्योकि जरूरतमंद गरीब मरीज़ों के पास इतने पैसे नही थे कि वो निजी चिकित्सक के क्लीनिक पर जाकर अपना इलाज करा सके। इन सबके दौरान उनकी कार्यप्रणाली को देख अस्पताल परिसर में मौजूद मरीज और उनके परिजनों ने जहां उन्हें हीरो की उपाधि दी।

वहीं मृतक के परिजनों ने उन्हें रियल सिंघम के नाम से नवाजा। एसपी की इस कार्रवाई के बाद डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मी सकते में दिखे, क्योंकि बरसों बाद उनके आंदोलन और धरने को विफल करने वाला कोई पहला पुलिस अफसर सामने आया। एसपी की इस कार्यवाई से डरे सहमे डॉक्टर जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों में छिपते नजऱ आए। वहीं उपस्थित लोगों का कहना है कि इस तरह से अफसर यदि सख्ती दिखाएंगे तो निश्चित तौर पर सरकारी अस्पताल की लापरवाही रुकेगी।