सीएम आदित्यनाथ के लिए क्राइम है बड़ी चुनौती

विराट शर्मा

लखनऊ। सत्ता में आने के कुछ दिनों पहले तक भारतीय जनता पार्टी अखिलेश सरकार को कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक घेर रही थी। वर्तमान में सूबे में बीजेपी की सरकार है और योगी आदित्यनाथ सूबे के वजीर-ए-आला हैं। सार्वजनिक मंचों से कई बार मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि हमारी सरकार क्राइम पर जीरों टोलेरेंस रहेगी। लेकिन प्रदेश में आए दिन हो रही ताबड़तोड़ वारदातों ने उनके मुंह को बंद कर रखा है। साथ ही विपक्ष को भी सरकार को घेरने का मुद्दा मिल गया है।

सूत्रों का कहना है कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव की तरह योगी सरकार भी फिसड्डी साबित हो रही है। अगर यही हाल रहा तो यूपी सरकार को तगड़ा झटका लग सकता है। सीएम योगी ने 100 दिन के बाद सरकार का रिपोर्ट कार्ड जारी जरूर किया और कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने का वायदा किया था। लेकिन वर्तमान में जो स्थिति है, उससे योगी की परेशानी बढ़ सकती है। बताते चलें कि अभी कुछ माह पहले तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूपी की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। अब सूबे में बीजेपी की सरकार है तो वह अपराध नियंत्रण में फेल साबित हो रहे हैं। अपराधियों पर सरकार का खौफ नहीं दिख रहा है। रेप, हत्या, डकैती, लूट, आदि की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही है।

पुलिस के एक अधिकारी कहते हैं कि कानून का राज इकबाल पर चलता है। सूबे में पुलिस का इकबाल पूरी तरह से खत्म हो चुका है, इसलिए ऐसी घटनाएं हो रही हैं। यूपी में जब बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला था तो लोगों को लगा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पटरी पर आएगी। क्राइम कंट्रोल नहीं होने से लोगों का यह विश्वास टूटता जा रहा है। वहीं बीएसपी के एक नेता कहते हैं कि यूपी में वर्ष 2007 से 2012 तक बसपा की सरकार थी और पुलिस अधिकारियों पर पूर्व सीएम का खौफ था, इसलिए उनके राज में शासन बहुत बढिय़ा चलता था। वह कहते हैं कि बसपा शासन में बड़े से बड़े अपराधी को मार गिराया जाता था।

आखिर क्यों नहीं हो रहा क्राइम कंट्रोल ?   

पुलिस की अक्षमता राजनीतिकरण व पूर्व सरकारों के प्रिय उच्च अधिकारियों पर निर्भरता के कारण योगी सरकार अपराधियों को नियंत्रण में नहीं कर पा रही है। लोग दबी जुबान यह कहते लगे हैं कि बीजेपी को वोट देकर बहुत गलत किया। यह पार्टी साम्प्रदायिकता के आधार पर पूरे देश में भगवा फहराना चाहती है। जनता को अफसोस यही है कि वर्तमान में भाजपा की सरकार है फिर भी अपराधों पर क्यों नहीं नियंत्रण हो रहा है। लगभग 450 आईपीएस आईएस के इतने बड़े कैडर में से 20 से 30 मुख्य संवेदनशील पदों के लिए ये सरकार कर्मशील एवं निष्ठावान अधिकारी नहीं तैनात कर पा रही है। हाल के दिनों में सहारनपुर एवं गोरखपुर में भाजपा सांसद , विधायकों द्वारा उच्च पुलिस अधिकारियों के साथ की गयी अभद्रता एवं सरकारी कार्य में हस्तक्षेप और उन पर कोई कानूनी कार्रवाई न करने देना जैसी घटनाओं ने भी पुलिस का मनोबल तोड़ा है।

तेज तर्रार अधिकारी क्यों हैं साइड लाइन ?  

अपराधों पर पुलिस एवं सिस्टम का सूचना तंत्र क्यों कमजोर होता जा रहा है। अमिताभ ठाकुर जैस तेज तर्रार पुलिस अधिकारी को क्यों साइड लाइन कर दिया गया है। सेटिंग वालों को जिलों, थानों में क्यों तैनाती दी जा रही है। जिसका असर व्यवस्था पर पड़ रहा है। अपराधों की रोकथााम के लिए पुलिस को अपने सूचना तंत्र को और ज्यादा मजबूत करने की जरूरत है।