सीबीआई मामलाः डीजी के पद को वर्मा ने कहा- नो! दिया इस्तीफा

  • सरकार ने एक दिन पहले ही उन्हें बनाया था महानिदेशक अग्निशमन
  • सरकार को इस्तीफा सौंप भ्रष्टाचार का आरोप मढ़ा आलोक ने

नई दिल्ली। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक पद से हटाये गये आलोक वर्मा ने अग्निशमन सेवा के महानिदेशक का पद संभालने से इंकार करते हुए आज इस्तीफा दे दिया। सीबीआई निदेशक की चयन संबंधी समिति ने वर्मा को बुधवार रात उनके पद से हटाने का निर्णय लिया था जिसके बाद सरकार ने उन्हें अग्नि शमन सेवा, सिविल डिफेंस और होम गार्डस का महानिदेशक नियुक्त किया था।

देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि भ्रष्टाचार और ड्यूटी में कोताही बरतने के आरोप में इसके प्रमुख वर्मा को गुरुवार को पद से हटा दिया गया। सरकार ने उच्चतम न्यायालय द्वारा दो दिन पूर्व बहाल किये गये आलोक को उनके पद से हटाकर अग्नि शमन सेवा और होम गार्ड्स का महानिदेशक बना दिया है।

विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री, लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के नेता खडगे तथा उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के प्रतिनिधि न्यायमूर्ति अर्जन कुमार सिकरी की यहां बैठक हुई, जिसमें वर्मा को निदेशक के पद से हटाने का निर्णय लिया। सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय 2:1 के बहुमत के आधार पर किया गया। मोदी और न्यायमूर्ति सिकरी जहां वर्मा को हटाने के पक्ष में थे, वहीं श्री खडगे ने इसका विरोध किया और अंतत: बहुमत के फैसले के आधार पर श्री वर्मा को हटाने का निर्णय लिया गया।

उन्होंने नई जिम्मेदारी संभालने से इंकार कर दिया और कार्मिक मंत्रालय के सचिव को भेजे गये इस्तीफे में कहा कि उन्हें आज से ही सेवानिवृत माना जाये। उन्होंने कहा है कि चयन समिति ने निर्णय लेने से पहले उन्हें केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त की रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। उन्होंने कहा कि स्वभाविक न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचायी गयी और समूची प्रक्रिया को उलट दिया गया जिससे कि उन्हें सीबीआई निदेशक के पद से हटाया जा सके। वर्मा ने यह भी लिखा है कि बुधवार को लिया गया निर्णय उनके कामकाज के बारे में तो संकेत देता ही है लेकिन साथ ही यह इस बात का भी सबूत बनेगा कि कोई भी सरकार सीवीसी के माध्यम से एक संस्थान के तौर पर सीबीआई के साथ किस तरह का व्यवहार करेगी। यह सामूहिक आत्मचिंतन का क्षण है।

केन्द्रीय जांच एजेन्सी के पूर्व निदेशक ने कहा है कि वह 31 जुलाई 2017 को ही सेवा निवृत हो गये होते और वह केवल सीबीआई निदेशक के पद पर 31 जनवरी 2019 तक के लिए नियुक्त किये गये थे। उन्हें यह जिम्मेदारी इस निश्चति अवधि के लिए मिली थी। अग्नि शमन सेवा , सिविल डिफेंस और होम गार्डस के महानिदेशक के पद की सेवा निवृति की जो आयु है वह उसे पहले ही पार कर चुके हैं। अत: उन्हें आज से ही सेवा निवृत माना जाये।

आलोक के हटाते ही भड़के खड़गे

केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी के नेताओं और मंत्रियों ने सीबीआई के निदेशक पद से आलोक वर्मा को हटाने पर असहमति जताने को लेकर लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे की तीखी आलोचना की है। बताते चलें कि खडगे ने 20 जनवरी 2017 को वर्मा की सीबीआई के महानिदेशक के पद पर नियुक्ति का यह कहते हुए विरोध किया था कि उन्हें जांच एजेंसी में काम का अनुभव नहीं है। उन्होंने सरकार से दूसरे अधिकारी रूपक कुमार दत्ता के नाम पर विचार करने का अनुरोध किया था जो उस समय गृह मंत्रालय में विशेष सचिव थे। अब वह वर्मा को इस पद से हटाये जाने का विरोध कर रहे हैं।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि वास्तव में मल्लिकार्जुन खडगे अद्भुत व्यक्तित्व के स्वामी हैं। जब चयन समिति ने आलोक वर्मा को सीबीआई प्रमुख नियुक्त किया, तो उन्होंने असहमति जतायी। अब, जब वर्मा को उसी चयन समिति ने हटा दिया है, तो उन्होंने उस पर भी असहमति जतायी है।

बीजेपी के एक अन्य नेता एवं केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने भी श्री वर्मा की नियुक्ति और उन्हें पद से हटाये जाने, दोनों ही मौकों पर श्री खडगे की ओर से असहमति जताने के लिए उनकी तीखी निंदा की है। उन्होंने ट्वीट किया कि वर्मा की सीबीआई प्रमुख के तौर पर नियुक्ति और हटाये जाने दोनों ही परिस्थितयों में विरोध से साबित होता है कि कांग्रेस दिमाग का इस्तेमाल किये बिना के किसी भी चीज का विरोध करती है। कुछ समय तो अपनी ही विश्वसनीयता की कीमत पर।