सुरक्षा बनी चुनौती: बेकाबू दरिन्दे और नतमस्तक पुलिस

तमाम दावों के बावजूद नहीं थम रही हैवानियत

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ए.अहमद सौदागर
लखनऊ। देश व प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा चुनौती बनती जा रही है। देश की राजधानी दिल्ली में चलती बस में गैंगरेप के बाद निर्भया हत्याकांड, राजधानी लखनऊ में सीएम आवास से चंद कदमों की दूरी पर गैंगरेप के बाद छात्रा की हुई हत्या और मोहनलालगंज के बलसिंह खेड़ा में दरिन्दगी की शिकार हुई महिला हत्याकांड के बाद श्रीनगर कठुआ गैंगरेप हत्याकांड, उन्नाव गैंगरेप कांड के बाद गुजरात के सूरत में रेप के बाद मासूम बच्ची की बेरहमी से हुई हत्याकांड जैसी गंभीर घटनाओं ने एक बार निर्भयाकांड की तरह इलाकाई लोगों को ही नहीं बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
वैसे तो देश व प्रदेश की बेटियों की हिफाजत के लिए बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओं के नारे सिलसिलेवार गूंज रहे हैं,लेकिन इन्हीं आवाजों के बीच बहू-बेटियां दरिन्दों की शिकार बन रही हैं। हाल में हुईं ये घिनौनी घटनाएं फिलहाल सबको हिलाकर रख दिया है। बेखौफ हैवानों ने देश व प्रदेश में लगातार कई संगीन वारदातों को अंजाम देकर सरकार व पुलिस-प्रशासन के इकबाल पर सवाल खड़ा कर दिया है।

देश-प्रदेश में महिला सुरक्षा के दावे फेल,रोकने में नाकाम जुबानी जंग जारी?
देश प्रदेश में अपराध चरम पर है। हर दूसरे दिन कहीं न कहीं पर महिलाएं व लड़कियां हैवानों की शिकार बन रही हैं और पुलिस-प्रशासन दरिन्दों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रही है। कठुआ, उन्नाव,सूरत व कानपुर में हुई घटना ही नहीं इससे पूर्व में भी देश-प्रदेश की कई बेटियां बेकाबू दरिन्दों की निवाला बन चुकी हैं।  बीते 16 दिसंबर 2012 और दिन रविवार को चलती बस में बलिया निवासी निर्भया के साथ बेखौफ दरिन्दों ने दरिन्दगी कर मौत की नींद सुला दिया था।  17 जुलाई 2014 को राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र के बलसिंह खेड़ा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में बेरहम वहशियों ने एक महिला के साथ रेप का मारा डाला था। 15 फरवरी 2016 को जानकीपुरम निवासी 12वीं की छात्रा की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई और उसका शव सीएम आवास व डीजीपी कार्यालय के बीच घने जंगल में पड़ा मिला था।
यही नहीं दस जून 2011 को सूबे के लखीमपुर खीरी के निघासन थाना परिसर में एक किशोरी की हत्या कर शव को पेड़ में लटका दिया गया। राज खुलने के बाद सामने आया कि किशोरी की जान किसी आम आदमी नहीं बल्कि एक सिपाही ने दुष्कर्म में नाकाम होने पर मौत के घाट उतार दिया था।
11 जून 2014 को हमीरपुर जिले के सुमेरपुर थाने की हवालात में बंद अपने पति से मिलने गई महिला के साथ थाने में तैनात दरोगा और तीन सिपाहियों ने गैंगरेप किया। ये तो बानगी भर है और भी इससे पहले कई बहू-बेटियां हैवानों की शिकार बन चुकी हैं।
हत्यारों की भेंट चढ़ी निर्भया हो या फिर दरिन्दगी की शिकार हुईं अन्य महिलाएं व लड़कियां आम लड़की थीं,लेकिन जो भी सत्ता रही उसे पाठ पढ़ा गईं,लेकिन कहावत नहीं बल्कि हकीकत है कि चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात। वारदात के बाद पीएम से लेकर सीएम तथा पुलिस-प्रशासन की नींदे टूटी और सकते में आकर दावे किए कि अब किसी भी सूरत में बेटियों के साथ वारदात को अंजाम देने वाले दरिन्दे नहीं बच सकते। लिहाजा वारदातों के दो-चार दिनों तक संसद से लेकर सड़कों तक शोर हुआ, लेकिन मामला जस का तस रहा। नतीजतन आज भी बेखौफ हैवानों का कहर बरकरार है,जो थम नहीं रहा है।

सुरक्षा के दावे फेल: हैवानों के निशाने पर महिलाएं
अब कठुआ कांड व उन्नाव गैंपरेप कांड के बाद एक बार फिर देश-प्रदेश की सियासत गरमाती जा रही है। इस घटना ने पुराने ज मों को ताजा कर दिया। पुलिस-प्रशासन ने इस तरह की घटनाओं को की रोकथाम के लिए वैसे तो कई बार कवायदें शुरू की लेकिन बेखौफ दरिन्दों के आगे बेअसर होकर रह गई।
यही नहीं अतंर्राष्ट्रीय दिवस हो या फिर महिलाओं व लड़कियों के साथ हुई घटना के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर जगह-जगह शोर होते हैं और इस दौरान उनका हर कोई हिमायती बनकर खड़ा रहता है,लेकिन चंद दिनों बाद विरोध जताने वालों की भी आवाजें दब जाती हैं। फिलहाल कठुआ और उन्नाव कांड के बाद यूपी की महिलाएं व लड़कियां सहम गईं। वहीं उन्नाव गैंगरेप पीडि़ता ने पुलिस के पास जाकर न्याय की गुहार लगाई थी जो पुलिस ने अनसुनी कर दी थी। वहीं पुलिस अफसर भी तरह-तरह की बयानबाजी करने में लगे रहते हैं,लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर महिलाओं के साथ होने वाली यह वारदात थमेगी कैसे? बहू-बेटियां कब बेखौफ होकर सड़क पर चल सकेंगी? वहीं पुलिस ने तो दस्तावेजों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई तरह की योजाएं तैयार करने का दावा करती-फिरती है,लेकिन बेखौफ हत्यारों व हैवानों के आगे ढाक के तीन पात साबित होकर रह जाती है।