राजधानी में स्कूल कैंपस में बच्चों की सुरक्षा का बड़ा सवाल

  • ब्राइटलैंड घटना के बहाने राजधानी के बच्चों की सुरक्षा की हो व्यापक समीक्षा
  • सतर्कता से ही होगी आपके लाडले-लाडली की सुरक्षा

ए. अहमद सौदागर

लखनऊ। घरवालों की अनदेखी और जरा-सी चूक ने सातवीं की छात्रा के परिवारवालों और समाज में हमेशा सोचने के लिए मजबूर कर दिया। पढ़-लिखकर कुछ बनने की हसरत लेकर छात्रा को उसके माता-पिता ने ब्राइटलैंड कॉलेज में दाखिला कराया। वे आए दिन उसे अच्छे ढंग से पढ़ाई करने के लिए समझाया करते थे। पर लड़की ने किन परिस्थितियों में कक्षा एक के छात्र ऋतिक पर हमला किया, यह सोचने का विषय है। एक नाबालिग लड़की इतना बड़ा कदम कैसे उठा सकती है, यह सवाल हर किसी को बेचैन कर रहा है। सभी के जेहन में यह सवाल तैर रहा है कि क्या ब्राइटलैंड कॉलेज की घटना के बाद राजधानी के स्कूली नौनिहालों की सुरक्षा की समीक्षा होगी?

चिंतन-मंथन की जरूरत

आखिर समाज किधर जा रहा है ? हम खुद को होशियार तो समझते हैं लेकिन अपने बच्चों पर पर्याप्त ध्यान देना शायद जरूरी नहीं समझते। यही प्रमुख कारण है कि आज छात्र-छात्राएं किसी के बहकावे में आकर खुदकुशी कर ले रहे हैं या फिर कोई और भयंकर कदम उठाकर माता-पिता व करीबियों को जिंदगी भर की टीस दे रहे हैं।

जिस तरह ब्राइटलैंड कॉलेज की सातवीं की छात्रा ने कदम उठाया, वह कॉलेज के बच्चों व अभिभावकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। शुरुआती दौर में लड़की के अभिभावक और दूसरे लोग भले ही विरोध जता रहे थे, लेकिन सूत्र बताते हैं कि अब वही लोग कह रहे हैं कि मासूम बच्ची नादानी कर बैठी।

समाज में बच्चों के प्रति जागरूकता जरूरी : एसएसपी

इस बाबत एसएसपी दीपक कुमार का कहना है कि जांच पड़ताल में यही सामने आया कि लड़की नहीं चाहती थी कि वह ऐसी घटना को अंजाम दे पर अनजाने में उससे यह हो गया। उन्होंने अपील की कि सभी अभिभावक अपने बच्चों के प्रति जागरूकता अभियान चलाएं ताकि उनके अंदर कोई ऐसी भावना न पनपने पाए, जो किसी अपराध को अंजाम दे सके।

एसएसपी सवाल उठाते हुए कहते हैं कि जब भी किसी स्कूल या कॉलेज के भीतर छात्र-छात्राएं दाखिल होते हैं, उनके बैग की चेकिंग अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। इस मामले में छात्रा घर से सब्जी काटने वाला चाकू लेकर ब्राइटलैंड स्कूल में आ गई लेकिन किसी ने उसका बैग चेक नहीं किया। अगर बैग चेक होते तो छात्रा चाकू लेकर कैंपस  में न जा पाती।