हरियाणा ने एक बार फिर बढ़ाया मान, जानिए लखनऊ से क्या है विनेश का रिश्ता

 

मनोज कुमार
लखनऊ। बापू सेहत के लिए तू तो हानिकारक है, गाना सुनकर बाप महावीर फोगाट पर गुस्सा जाहिर करने वालों का भी सीना आज गर्व से तन गया है। हरियाणा समेत पूरे देश के लोग 56 इंच की छाती लिए कह रहे हैं कि- म्हारी छोरी किसी छोरे से कम है के। इसके जायज कारण भी है हरियाणवी पहलवान बजरंग पुनिया के बाद हरियाणवी छोरी विनेश फोगाट ने भी स्वर्ण भारत की झोली में डाल दिया।
फाइनल मुकाबले में जापान की इरी यूकी को चारों खाने चित करने के बाद विनेश ने कहा’ मेरा शुरूके ही ध्यान स्वर्ण पर था। मैंने अच्छी ट्रेनिंग की और भगवान ने मेरा साथ दिया। दिन मेरे लिए अच्छा रहा, मैं रियो ओलंपिक में चोट के बाद और भी ज्यादा मजबूत हुई’।
उनकी जीत पर बधाई देने वालों में देश के दोनों सर्वोच्च हस्तियां शामिल रहीं। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने बधाई देते हुए कहा कि विनेश फोगाट के एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के लिए उन्हें ढेरों बधाई। यह हरियाणा और पूरे देश के लिए गर्व का पल है। वही देश के पीएम नरेंद्र मोदी कहते है कि विनेश फोगाट ने भारत को खुश होने का मौका दिया है। उम्मीद है विनेश की यह क़ामयाबी अन्य एथलीटों को प्रेरणा देगी।
रियो ओलंपिक2016 में घुटने की चोट के कारण क्वार्टर फाइनल में ही सफर छोड़ चुकी विनेश का करियर थमता नजर आ रहा था। लेकिन विनेश ने हार नहीं मानी और शानदार वापसी करते हुए 18 वें एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर सभी के चेहरे पर सुनहरी चमक बिखेर दी। इसके साथ ही विनेश एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली पहली महिला पहलवान का खिताब पा गई।
हरियाणा की 23 वर्षीय इस पहलवान में पिछले रियो ओलंपिक में दिल तोड़ने वाले हार को भुला दिया और सभी भारतीयों के चेहरे पर स्वर्णिम मुस्कान बिखेर दी।
भारतीय पहलवान विनेश ने इस टूर्नामेंट में पिछले रियो में चीनी पहलवान मानसून से हार का हिसाब भी चुकता किया बताते चलें पिछले रियो ओलंपिक में इसी चीनी खिलाड़ी से कुश्ती लड़ते समय विनेश चोटिल हो गई थीं।
लखनऊ से पुराना रहा है रिश्ता
हरियाणा की विनेश फोगाट ने कुश्ती के दांवपेंच लखनऊ से ही सीखे हैं। सरोजिनी नगर स्थित साईं सेंटर में इस पहलवान ने घंटों पसीने बहाये हैं। भारत के लिए गोल्ड जीतने वाली विनेश लखनऊ कई बार आ चुकी है और अपनी तैयारियों में लखनऊ को शामिल करना नहीं भूलतीं।गौरतलब है कि भारत में उत्तर प्रदेश शुरू से ही पहलवानों का गढ़ रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यहां के पहलवान राष्ट्रीय स्तर पर छाप छोड़ने में विफल रहे हैं।