हर-हर मोदी, घर-घर मोदी, अब बॉलीवुड पर भी चढ़ा भगवा रंग

ज्ञान प्रकाश
लखनऊ। परेश रावल गुजरात के अहमदाबाद से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं। साल 2014 की मोदी लहर में बहकर वह अहमदाबाद से दिल्ली वाया मुंबई पहुंचे हैं। अब उनकी असली पहचान भी यही है। राष्ट्रवादी पार्टी के अन्य नेताओं की तरह उनके दिल में भी राष्ट्रभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई है, वह अपने बाद की शुरुआत ही ‘भारत माता की जय’ से करते हैं। देखा जाए तो भारत माता एक धारणा है, कल्पना है कि देश के सभी लोगों को नारी शक्ति का आदर करना चाहिए। लेकिन कश्मीर मुद्दे पर अपने बहादुरी भरे जज्बे को दर्शाने के लिए वह ट्वीट करते हैं कि अरुंधति राय को सेना की गाड़ी के आगे बांध देना चाहिए था, बजाए पत्थर चलाने वालों के। यह कैसा नारी आदर्श, य़ह कैसी देशभक्ति…? यह भी माना कि अरुंधति राय से आपकी असहमति हो सकती है, उनके कई मुद्दों पर मैं भी असहमत रहता हूं, लेकिन देश में कई लोग ऐसे हैं जिन्हें न अरुंधति राय पसंद होंगी और न ही परेश रावल। तो क्या इस नापसंदगी की ….वजह से उनके खिलाफ अभद्र टिप्पणी की जाए ?

परेश रावल के बयान से स्त्री जाति जरूर दुखी हुई होगी, क्योंकि ऐसा बयान देकर उन्होंने समाज के एक वर्ग को हिंसा के लिए उकसाने का प्रयत्न किया है। सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को तोल-मोल कर बोलना चाहिए। यानी यह कहा जा सकता है कि परेश रावल ने तोल-मोल कर ही ऐसा ट्वीट किया है। ट्वीट करते समय वह यह भूल गए कि भीड़ को किसी खास समुदाय, वर्ग या जाति के प्रति उकसाना इस समय कितना आसान है? कश्मीर से असम तक, मुजफ्फरनगर से जमशेदपुर तक लोगों के दिल में एक वर्ग विशेष के प्रति विद्वेष पैदा किया जा रहा है। कुछ हद तक वो खुद इसके लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन क्या देश को साम्प्रदायिक आग में झोंका जा सकता है। पुलिस विभाग के एक जिम्मेदार अफसर कहते हैं कि अगर चार से पांच हजार की मुस्लिम बस्ती हो तो कानून का राज नहीं चल सकता। वो अपनी मनमर्जी कर ही लेंगे, क्योंकि उनके फैसले में बच्चे, बूढ़े और महिलाएं भी शामिल रहती हैं। वे चाहते तो अरुंधति राय की जगह उनके जैसे विचार रखने वाले किसी पुरुष का नाम भी लिख सकते थे, लेकिन फिर उससे वह सुख कैसे प्राप्त होता, जो एक महिला को अपमानित करने में मिला होगा। यह अलग बात है कि उनके समर्थन में फिल्म जगत की दो और बड़े गायक सामने आए। एक अभिजीत दूसरे सोनू निगम। अभिजीत भट्टाचार्य ने अरुंधति को गोली मारने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने जेएनयू छात्रसंघ की नेता शेहला रशीद पर आपत्तिजनक ट्वीट कर दिया। उन्हें भाजपा नेताओं पर की गई टिप्पणी इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने शेहला के चरित्र पर ही टिप्पणी कर दी। इसके बाद ट्विटर ने उनका एकाउंट सस्पेंड कर दिया। तो अभिजीत इसका दोष भी अरुंधति और जेएनयू पर मढ़ रहे हैं। अब तक ट्विटर समेत तमाम सोशल नेटवर्किंग साइट्स भाजपा के लिए मुफीद साबित हो रही थीं, तो उसमें उन्हें किसी का हाथ नजर नहीं आया। अभिजीत के ट्विटर एकाउंट के सस्पेंड होने पर मशहूर गायक सोनू निगम को भी बड़ा दुख हुआ। वह कहते हैं कि अरुंधति राय अगर देशविरोधी लेख लिखती हैं, राष्ट्रद्रोही आचरण करती हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई अंजाम दी जा सकती है न कि उनका नाम लेकर भारत की स्त्री जाति पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल। परेश रावल, अभिजीत भट्टाचार्य और सोनू निगम जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों के करोड़ों फॉलोवर होंगे, जो उनके इशारे पर कुछ भी कर गुजरने को तैयार होंगे। इसलिए देश के उन बड़े कलाकारों को भी राजनेताओं की तरह संतुलित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। चाहे वह आमिर खान हो, शाहरुख खान हों या फिर फिल्म निर्माता किरण राव। आप सभी को दर्शकों ने बिना भेदभाव के लोकप्रियता दी है, आपका भी फर्ज है कि आप देश में हिंदू-मुस्लिम विभाजन जैसे शब्दों का प्रयोग न करें।

अभिनेता से सांसद बने परेश रावल ने अपने सिने करियर की शुरुआत साल 1984 में रिलीज हुई फिल्म ‘होली’ से की। इसी फिल्म से आमिर खान ने भी इंडस्ट्री में कदम रखा था। इस फिल्म के बाद परेश रावल को ‘हिफाजत’, ‘दुश्मन का दुश्मन’, ‘लोरी’ और ‘भगवान दादा’ जैसी फिल्मों में काम करने का अवसर मिला। वर्ष 1986 में परेश रावल को राजेंद्र कुमार निर्मित फिल्म ‘नाम’ में काम करने का मौका मिला। संजय दत्त और कुमार गौरव अभिनीत इस फिल्म में वह खलनायक की भूमिका में दिखाई दिए। फिल्म सुपरहिट साबित हुई और वह खलनायक के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गए। ‘नाम’ की सफलता के बाद परेश रावल को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गए, जिनमें ‘मरते दम तक’, ‘सोने पे सुहागा’, ‘खतरों के खिलाड़ी’, ‘राम-लखन’, ‘कब्जा’, ‘इज्जत’ जैसी बड़े बजट की फिल्मेंं शामिल हैं। इन फिल्मों की सफलता के बाद ही परेश रावल ने नई बुलंदियों को छुआ और इंडस्ट्री में खाम मुकाम पर पहुंच गए।

साल 1993 उनके जीवन में बड़ा हिट साबित हुआ, जब उनकी ‘दामिनी’, ‘आदमी’ और ‘मुकाबला’ जैसी सुपरहिट फिल्में रिलीज हुईं। वर्ष 1994 में आई फिल्म ‘सरदार’ में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी वल्लभ भाई पटेल की भूमिका को रूपहले पर्दे पर जीवंत कर दिया। इस फिल्म में अपने दमदार अभिनय से उन्होंने न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बना ली। साल 1997 में प्रदर्शित फिल्म ‘तमन्ना’ भी परेश रावल की महत्वपूर्ण फिल्मों में शुमार की जाती है। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे किन्नर की भूमिका निभाई जो समाज के तमाम विरोध के बावजूद एक अनाथ लड़की का पालन पोषण करता है।

इसके बाद साल 2000 में प्रदर्शित फिल्म ‘हेराफेरी’ आई, जो परेश रावल की सर्वाधिक सफल फिल्म मानी जाती है। प्रियदर्शन निर्देशित इस फिल्म में उन्होंने बाबूराव गणपत राव आप्टे का किरदार निभाया। इस फिल्म में परेश रावल, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी की तिकड़ी ने दर्शकों को हंसाते-हंसाते लोट-पोट कर दिया। इसके बाद उन्होंने अधिकतर फिल्मों में हास्य अभिनेता की भूमिका निभाई। इन फिल्मों में ‘आवारा पागल दीवाना’, ‘हंगामा’, ‘फंटूश’ ‘गरम मसाला’, ‘दीवाने हुए पागल’. ‘मालामाल वीकली’, ‘भागमभाग’, ‘वेलकम’ और ‘अतिथि तुम कब जाओगे’ जैसी फिल्में शामिल हैं।

तीन बार फिल्मफेयर
परेश रावल अब तक तीन बार फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं। सबसे पहले उन्हें साल 1993 में प्रदर्शित फिल्म ‘सर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। इसके बाद 2000 में फिल्म ‘हेराफेरी’ और 2002 में ‘आवारा पागल दीवाना’ के लिए भी उन्हें सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार दिया गया। अब वह प्रद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित कलाकार हैं।

बिकनी गर्ल को बनाया हमसफर
परेश रावल ने मिस इंडिया रह चुकीं स्वरूप संपत से शादी की थी, अब उनके दो बेटे भी हैं। स्वरूप ने साल 1979 में मिस इंडिया का खिताब अपने नाम किया था। स्वरूप भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी रही हैं। स्वरूप ने कॉमेडी टीवी शो ‘ये जो है जिंदगी’ में काम किया था, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था। स्वरूप ने वर्ष 1984 में फिल्म ‘करिश्मा’ में काम किया था। इसमें वो कमल हासन और रीना रॉय के साथ नजर आई थीं। स्वरूप ने फिल्म में बिकनी सीन्स भी दिए थे। इसके अलावा स्वरूप ने ‘नरम-गरम’ (1981), ‘हिम्मतवाला’ (1983), ‘करिश्मा’ (1984) और ‘साथिया’ (2002), सप्तपदी (2013) और ‘की एंड का’ (2016) जैसी फिल्मोंं में काम किया है।