हवन, कन्या पूजन का क्या है है शुभ मुहुर्त…और आप जानिए कन्याओं के पूजन की विधि और फल

ज्योतिषाचार्य प्रदीप तिवारी

लखनऊ। जिस तरह नवरात्रि में नौ दिनों तक व्रत करने का विधान सनातन परम्परा व शास्त्रों में वर्णित है, उसी तरह कन्या पूजन और हवन का विधान भी वेद-शास्त्रों में विधिवत बताया गया है। शक्ति पूजा से जुड़े यज्ञाचार्यों का कहना है कि जिस तरह साधक व्रत करने से पहले उचित मुहूर्त में घट स्थापित करता है उसी तरह कन्या पूजन और हवन के लिए भी विशेष मुहूर्त की जरूरत होती है।  यदि आप सही मुहूर्त में घट स्थापना, कन्या पूजन और हवन करते हैं तो नौ दुर्गा आपके जीवन में नव खुशियां भर देती हैं।

इस बार 10 अक्टूबर से हुए शुरू नवरात्रि के आखिरी दो तिथियों (अष्टमी और नवमी) में कन्या पूजन की परम्परा जारी है। इन दोनों दिनों में कन्याओं को हलवा, पूरी और चने का भोग लगाने के साथ-साथ उन्हें वस्त्र और फलों का उपहार और लाल चुनरी उड़ाना भी शुभ माना जाता है। लेकिन यह सारा काम शुभ मुहूर्त में हो तो विशेष फलकारी हो जाता है।

मान्यता है कि अष्टमी और नवमी को मां की पूजा और हवन करने से मां हर मनोकामना पूरी करती है। शुभ मुहूर्त में ऐसा करने से साल भर घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। जो श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक व्रत नहीं रख पाते हैं वो भी अष्‍टमी का व्रत रखते हैं और कन्या पूजन करते हैं। अष्टमी और नवमी दोनों दिन आप चाहे तो विशेष पूजा के जरिए मां दुर्गा से अपने घर के लिए सौभाग्य और सुख की कामना पूजा कर सकते हैं।

गौरतलब है कि दोनों ही दिन पूजा का शुभ मुहूर्त लंबे समय तक है। खासकर नवमी तिथि में इस बार तीन अच्छे मुहूर्त हैं। पहला ब्रह्म मुहूर्त रात्रि दो बजे से प्रातः 5.58 बजे तक। उसके कुछ देर बाद अमृत मुहूर्त लग जाएगा जो सुबह आठ बजे तक होगा। यानी सुबह 6 बजकर 29 मिनट से 7 बजकर 54 मिनट तक का काल अमृत काल होगा। उसके बाद पूर्वान्ह 11.26 से दोपहर 12.30 बजे तक अभिजीत मुहूर्त (संकल्प लेकर घट स्थापना करने वाले व्रतियों के लिए हवन का यह सबसे उचित मुहूर्त) तक होगा। इसके अलावा सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर तीन बजकर तीन मिनट तक मुहुर्त रहेगा। इसके बाद पारण दशमी तिथि तीन बजकर चार मिनट पर आ जाएगी और व्रती गुरुवार को ही पारण कर सकेंगे।

कब और कैसे करें पारणपारण के लिए तीन बजकर चार मिनट से लेकर गोधूलि बेला से पहले तक की अवधि शुभ-शुभ है, क्योंकि गोधूलि बेला में सनातन धर्म शास्त्र भोजन करने की अनुमति नहीं देते हैं, इसलिए पारण करने वाले लोग सूर्यास्त के पहले भोजन कर लें। सनद रहे कि किसी भी व्रत का पारण सूर्य डूबने के बाद नहीं किया जाता है। हिंदू वेद-विधानों में रात्रि काल में पारण की कोई विधि दर्ज नहीं है। इसलिए सूर्यास्त के बाद किसी भी कीमत पर पारण न करें। एकादशी का व्रत करने वाले लोगों के लिए कल ही पारण है, क्योंकि अगले दिन यानी 19 अक्टूबर, दिन शुक्रवार को दो बजे से एकादशी तिथि प्रारम्भ हो जाएगी।

किन कन्याओं का करें पूजन और क्या मिलता है फल

शास्त्रों में यह भी वर्णित है कि इस दिन ब्राह्मण कन्या पूजन करने से समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। क्षत्रिय कन्या पूजन करने से विषयों पर विजय मिलती है, चाहे वह मुकदमे की हो या फिर शत्रु से। वहीं वैश्य कन्या का इस दिन पूजन करने से धन की प्राप्ति होती है और शूद्र कन्या का पूजन करने से कुल (परिवार) की उन्नति होती है। इसलिए कहा जाता है कि हो सके तो इस दिन चारों वर्णों की कन्याओं का साझा पूजन किया जाए। ख्याल रखें कि कन्या पूजन के लिए दो साल से 10 वर्ष तक की कन्याएं ही पूजन योग्य होती है। यदि आपको किसी कारणवश नौ कन्याएं नहीं मिल पा रही हैं तो महज तीन कन्याओं का पूजन करने से माता सम्पूर्ण मनोकामना पूर्ण कर देती हैं।

कन्या पूजन से पहले ख्याल रखें इन बातों का

अष्टमी और नवमी पूजा के दिन आप जिन कन्यायों को भोजन करा रहे हैं। उन्हें उपहार स्वरूप विद्या की वस्तु पेन, पुस्तक, किताब, पेंसिल,स्कूल बैग आदि जरूर दें। ऐसा करने से आपके घर में सुख-शांति का वास होगा और धन-धान्य की कमी नहीं होगी। भोजन प्रसाद के उपरांत कन्याओं की जरूरत की चीज दान करने से घर में हमेशा लक्ष्मी और सुख शांति का वास होता है। भोजन के बाद उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना न भूले, यह काफी लाजिमी होता है।

कैसे करें पूजनः अष्टमी व नवमी के दिन पूजा से पहले घी के नौ दीपक जलाएं। इन दीयों को स्टील या पीतल की थाली में रखकर 9 घी के दीयों को जला दें। ख्याल रखें कि वह दीपक कोई और न बुझाए उसे अपने आप शांत होने दें। यह आप अष्टमी और नवमी दोनों दिन सुबह- शाम करें। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है और घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए यह अत्यंत आसान उपाय कहा गया है।

श्री सूक्त के पाठ से नहीं आती दरिद्रता

नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन से ही आप श्री सूक्त का पाठ शुरू कर दें, फिर इस पाठ को इच्छानुसार आगे भी जारी रख सकते हैं। कहते हैं कि ऐसा करने से घर में आर्थिक संकट कभी नहीं होता है। अपने किसी भी संकल्प या आर्थिक संकट को दूर करने के लिए आप अष्टमी और नवमी को लाल गुलाब या लाल गुड़हल (अड़हुल) की एक माला चढ़ाएं, इससे घर में धन-धान्य की पूर्ति होती है। नवरात्रि की अष्टमी से इसे प्रारंभ करें और इस उपाय को लगातार 11 या फिर 21 शुक्रवार तक करें। ऐसा करना आपकी आर्थिक स्थिति को अत्यंत संबल प्रदान करेगा।

(लेखक उत्तर प्रदेश के मशहूर ज्योतिषाचार्य हैं, कई चुनावी भविष्यवाणियां सटीक कर चुके हैं)