संतकबीर नगर का वह धाम जहां पांडव, माता कुंती से लेकर बुद्ध तक किए हैं दर्शन

माना जाता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में शक्ति पूजा के साथ ही शिव पूजन का भी प्रचलन था। इसीलिए यहां पर स्वयंभू शिवलिंगों की बेहद समृद्ध थाती है। यह भी मान्यता है कि पांडवों ने भी माता कुंती के साथ यहां से गुजरते हुए शिवलिंग की आराधना की थी, जिसे आज तामेश्वर नाथ धाम के नाम से जाना जाता है। चलिए आज हम आपको बता रहे हैं संतकबीरनगर के शिव मंदिरों के बारे में। नया लुक के लिए खलीलाबाद से सूरज मिश्रा की रिपोर्ट…

खलीलाबाद। जिला मुख्यालय से महज छह किलोमीटर की दूरी पर खलीलाबाद धनघटा मार्ग पर भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग तामेश्वरनाथ के रूप में मौजूद है।बेहद प्राचीन यह शिव धाम द्वापर युग का माना जाता है। मान्यता है कि 13 वर्षों के वनवास के समय अपने पुत्रों की मंगल कामना के लिए पांडवों की माता कुंती ने भगवान शिव की पूजा की थी। जनश्रुति यह भी है कि बुद्धत्व की खोज में जब कपिलवस्तु के राजकुमार सिद्धार्थ ने अपना महल छोड़ा था तो यहीं उन्होंने पहला यात्री निवास किया था और यही उन्होंने अपने कुंतल केशों का मुंडन कराकर बुद्धत्व की ओर पहला कदम बढ़ाया था।
बीच में यह मंदिर एक टीले के रूप में रह गया था, जहां कालांतर में इसका पुनरोदय हुआ और राजा बांसी ने इसका पुनरुद्धार कराया। आज इस मंदिर पर भक्तों की भीड़ हर सोमवार, हर महीने की तेरस और महाशिवरात्रि में उमड़ती रहती है। हर साल सावन के महीने में जलाभिषेक करने वाले भक्तों की कतार यहां पर प्रति जन विश्वास को प्रकट करती है।

तामेश्वरनाथ का शिवलिंग

धनघटा का दानी नाथ शिव धाम

धनघटा के स्वयंभू शिवलिंग दानी नाथ के नाम से बहुचर्चित है। माना जाता है कि लगभग ढाई सौ साल पहले शरीर की पावन धारा धनघटा के पास से होकर बहती थी और तभी शिव धाम सहयोगी धारा के जल से अभिसिंचित होता था। आज ही सरयू धारा के अवशेष के रूप में ढोढवा ताल मौजूद है, जो इस जनश्रुति की सच्चाई पर मोहर लगाता है।

हैसर बाजार का हैहयहेश्वर धाम

जनपद की दक्षिणी सीमा पर तहसील क्षेत्र धनघटा के ब्लॉक मुख्यालय हैसर बाजार में है। ईश्वर नाथ का विशाल शिव धाम है जनपद का सबसे विशाल शिवलिंग होने का गौरव समेटे इस मंदिर के रामायण कालीन होने की जनश्रुति है। मान्यता है कि हैहय नरेश सहस्त्रबाहु से सीता स्वयंवर के समय मिथिला जाते हुए इस शिवलिंग का जलाभिषेक कर आराधना किया था। आसपास के क्षेत्र में इस शिवालय और इस शिव धाम की बेहद मान्यता है। विश्वास है कि आर्तभाव से की गई प्रार्थना जरूर सुनी जाती है। जनपद के दक्षिणांचल में इस शिव धाम की जबरदस्त मान्यता है। सावन और फागुन माह में कांवर लेकर शिवभक्त यहां सरयू के जल से अभिषेक करते हैं।

हरिहरपुर का सिद्धेश्वरनाथ धाम

हरिहरपुर के पास सिद्धेश्वर नाथ धाम बेहद चर्चित स्थल माना जाता है। यहां के स्वयंभू शिवलिंग को बेहद जागृत माना जाता है। कभी अस्पष्ट दर्शन देने वाले सिद्धेश्वर नाथ के शिवलिंग के धीरे-धीरे क्षीण होते जाने की चर्चा आसपास के भक्तों में है और मान्यता तो यह भी है कि अगर यही हाल रहा तो यह शिवलिंग बहुत जल्द लुप्त हो जाएगा। शिवलिंग के क्षीण होते जाने को लेकर लोग तरह-तरह की आशंका जताते भी सुने जाते हैं

मोहम्मदपुर में  कुबेरनाथ धाम

पौली ब्लाक से सटे मोहम्मदपुर गांव में कुबेरनाथ के नाम से शिवलिंग बहुत पूजित है। मान्यता है कि यहां की हाजिरी से लोगों का दुख दरिद्र नष्ट हो जाता है। मान्यता है कि यह शिवलिंग भी अति प्राचीन है और पूर्व काल में स्त्रियों की धारा यहीं से होकर बहती थी, इसके प्रणाम के रूप में मंदिर के बगल का कुंड और नाला भक्तजन दिखाते है।