सात दिन से बत्ती गुल, जेई-एसडीओ को नहीं मिलती फुरसत

  • मोबाइल चार्ज करने दूसरे गांव जा रहे हैं फतेहपुर गांव के लोग
  • गोंडा जिले के कर्नलगंज का मामला, एसई मिलते नहीं, जेई काम करते नहीं

आचार्य प्रदीप तिवारी

गोंडा। योगी काबीना के सबसे युवा मंत्री श्रीकांत शर्मा के हाथ जैसे ही ऊर्जा विभाग की कमान मिली, तकरीबन सभी लोगों ने खुले दिल से इस फैसले का इस्तकबाल किया। कारण साफ था, श्रीकांत उत्साही युवा हैं, तेजी से काम निपटाने के लिए चर्चित हैं। उन्होंने विभाग संभालते ही तेजी दिखाई। शक्ति भवन पहुंचकर अफसरों को स्वच्छता की शपथ दिलाई तो विभाग में आंतरिक स्वच्छता लाने के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को ताकीद की। कुछ हद तक वह अपनी मंशा में सफल भी रहे लेकिन विभाग है कि मानता ही नहीं। कहीं भारी-भरकम कमीशन की बात सुर्खियों में आ रही है तो कहीं ट्रांसफार्मर के नाम पर वसूली की खबर चर्चा में आ जाती हैं। इस पर सबसे बड़ी परेशानी तब खड़ी होती है, जब किसी गांव की बत्ती गुल हो जाए।

एक बार किसी कारणवश बिजली कट जाए तो हफ्तों-हफ्तों तक बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाता। ताजा मामला गोंडा जिले के करनलगंज इलाके का है। गांव फतेहपुर मांझा और बसेरिया मौजा समेत चार गांवों की बिजली चार दिनों से गुल है। गांव वालों ने स्थानीय उपकेंद्र पर एसडीओ और जेई से शिकायत की, लेकिन चार दिन से अभी तक बिजली गांव नहीं पहुंची है। लोग मोबाइल चार्ज करने के लिए दूसरे गांवों पर निर्भर हैं। स्थानीय निवासी रामसहाय की माने तो हम लोग जितनी बार शिकायत करते हैं उतनी बार दुत्कार सुनने को मिलती है। कई बार जिले के अधीक्षण अभियंता को फोन लगाने की कोशिश की लेकिन वह न तो फोन उठाते हैं और न दफ्तर जाने पर मिलने की जहमत उठाते हैं। वह कहते हैं कि हम गांव वालों ने मध्यांचल के प्रबंध निदेशक का नम्बर लखनऊ से मंगवाया है, सुना है एमडी साहब फोन भी उठाते हैं और गरीबों की सुनवाई भी करते हैं।

बताते चलें कि वर्तमान में ग्रामीणांचल में गेहूं के फसल की सिंचाई के लिए बिजली की आवश्यकता है। इसके बाद भी बिजली व्यवस्था बुरी तरह से चरमराई हुई है। शहर के उपभोक्ता तो राहत में है, लेकिन ग्रामीणांचल के उपभोक्ताओं में बिजली को लेकर हाहाकर की स्थिति देखने को मिल रही है। बिजली विभाग की लापरवाही के चलते सर्वाधिक परेशान किसान हैं। गेहूं के फसल को सिंचाई की जरूरत है, लेकिन बिजली न होने से ट्यूबेल चल नहीं पा रहे हैं। विभागीय लापरवाही के चलते जहां कहीं भी फाल्ट हो जा रहा है वहां ठीक होने में हफ्तों बीत जा रहे है। यदि बिजली मिल भी रही है तो ठंड के इस मौसम में रात के वक्त सप्लाई दी जा रही है। उस स्थिति में भी किसान सिंचाई नहीं कर पा रहा है।

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी संजय गोयल कहते हैं कि यदि चार दिन से किसी गांव में  बिजली नहीं आ रही है तो इस लापरवाही को माफ नहीं की जाएगी। सम्बंधित एसई से जवाब-तलब किया जाएगा और जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बताते चलें कि योगी सरकार ने 11 अप्रैल को हुई कैबिनेट की दूसरी मीटिंग में गर्मियों के दौरान गांवों में 18 घंटे, तहसीलों में 20 घंटे और जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे बिजली सप्लाई का निर्णय लिया था। सवाल यह कि जब अफसर इसी तरह लापरवाही से काम करें तो लोगों को बिजली कैसे मिल पाएगी। हालांकि बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता का कहना है कि हमारी कोशिश रहती है कि तय मानकों के अनुसार बिजली सप्लाई होती रहे।