EXCLUSIVE: बचाकर रखिए इसें क्योंकि दिल है अनमोल

सुनील शर्मा

लखनऊ। छाती के मध्य और बाईं तरफ बसा तथा जीवन के हर पल का संचालन करता दिल कुदरत की अनमोल कृति है। दिल को जीवन के क्रिया-कलापों का केंद्र कहा जाता है। दिल में ही हमारे प्राण बसते हैं। दिल से उर्जित होकर ही रक्त हमारी धमनियों में दौड़ता है और शरीर को जीवन से भर देता है। दिल अगर जरा देर के लिए भी अपना काम बंद कर दे तो हमारे जीवन की लौ ही बुझ जाती है। इसलिए दिल की देखभाल बहुत आवश्यक है। इसके लिए हमें न सिर्फ अपनी दिनचर्या पर ध्यान देने की जरूरत है बल्कि हमेशा सजग रहना भी आवश्यक है क्योंकि विश्व में दिल के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज के हृदयरोग विशेषज्ञ और कॉर्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीएस नारायण कहते हैं कि दिल चूंकि शरीर का मेन अंग है इसलिए इसके साथ कभी भी किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। डॉ. नारायण के अनुसार जैसे ही यह पता चले कि दिल में समस्या आ रही है तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए और बेहतर इलाज कराना चाहिए।

जन्मजात हृदय रोग: डॉ. नारायण बताते हैं कि ऐसे मरीजों की संख्या बहुतायत में ही जिन्हे जन्मजात दिल की बीमारी होती है। ऐसे मरीजों में दिल में छेद, हृदय का धीमी या बहुत तेज गति से चलना आदि जैसी बीमारियां होती हैं। वह कहते हैं कि ऐसे मरीजों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जैसे ही पता चले कि किसी बच्चे को जन्मजात दिल की बीमारी है तो किसी अच्छे अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलकर उसकी सलाह के अनुसार उचित इलाज बहुत आवश्यक है। अगर दिल में छेद है तो उसका समय से इलाज करवाना आवश्यक है।

वह कहते हैं कि अकसर देखा गया है कि लोग जानने के बावजूद दिल के प्रति लापरवाह रहते हैं और समय से इलाज नहीं करवाते, वही बच्चे के बड़े होने पर जब लाइलाज हो जाती है तो डॉक्टर के पास भागते हैं। ऐसा बिल्कुल न करें।

रुमेटिक हृदय रोग : रुमेटिक हृदय रोग जिसे आम बोलचाल में आमवात ज्वर कहते हैं, एक ऐसी अवस्था है, जिसमें हृदय के वाल्व एक बीमारी की प्रक्रिया से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

यह प्रक्रिया स्ट्रेप्टोकोकल बैक्टीरिया के कारण गले के संक्रमण से शुरू होती है। यदि इसका इलाज नहीं किया जाये तो गले का यह संक्रमण रुमेटिक बुखार में बदल जाता है। बार-बार के रुमेटिक बुखार से ही रुमेटिक हृदय रोग विकसित होता है। रुमेटिक बुखार एक सूजने वाली बीमारी है, जो शरीर के, खास कर हृदय, जोड़ों, मस्तिष्क या त्वचा को जोडऩे वाले ऊतकों को प्रभावित करती है। जब रुमेटिक बुखार हृदय को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त करता है, तो उस अवस्था को रुमेटिक हृदय रोग कहा जाता है। हर उम्र के लोग गंभीर रुमेटिक बुखार से पीडि़त हो सकते हैं, लेकिन सामान्य तौर पर यह पांच से 15 वर्ष तक की उम्र के बच्चों में होता है।

इलाज : रुमेटिक हृदय रोग को रोकने का सर्वश्रेष्ठï उपाय रुमेटिक बुखार को रोकना है। गले के संक्रमण के तत्काल और समुचित उपचार से इस रोग को रोका जा सकता है। यदि रुमेटिक बुखार हो, तो लगातार एंटीबायोटिक उपचार से इसके दोबारा आक्रमण को रोका जा सकता है। कोई भी दवा विशेषज्ञ के परामर्श और देख-रेख में ही लेना चाहिए।

डायबिटीज या हाइपरटेंशन : डॉ. नारायण कहते हैं कि ऐसे मरीज जो डायबिटीज या हाइपरटेंशन रोग से पीडि़त हैं उन्हें दिल की समस्या जल्दी हो सकती है। इसके लिए वह कहते हैं कि सबसे पहले जरूरी है कि डायबिटीज और हाइपरटेंशन को उचित ईलाज कर रोका जाए तथा दिनचर्चा को सुधारकर दिल की बीमारियों से बचा जाए।

हार्ट अटैक: डॉ. नारायण बताते हैं कि हार्ट अटैक वह स्थिति होती है जब हृदय में खून का बहाव करने वाली धमनियां या सिरा अचानक ब्लॉक हो जाते हैं, ऐसी स्थिति में हार्ट अटैक होता है। ऐसे में सलाह है कि रोगी को जिसे हार्ट अटैक आया हो एक घंटे या इससे कम समय में किसी अच्छे अस्पताल में लेकर जाएं तथा डॉक्टर की सलाह अनुसार इलाज कराएं।

लक्षणः
बच्चे का दूध न पीना
बच्चे के रोने पर चेहरा नीला पडऩा।
बच्चे की पसली चलना।

इलाज
जल्द से जल्द डॉक्टर से सम्पर्क करें और सलाह अनुसार इलाज करवाएं।

लक्षण
बुखार रहना
सूजे और दर्दयुक्त जोड़ खासकर घुटना, टखना, कोहनी या कलाई
सूजे हुए जोड़ों पर उभार या गांठ
हाथ, पैर या चेहरे की मांसपेशियों की अनियंत्रित गतिविधि
कमजोरी और सांस फूलना

जल्द से जल्द डॉक्टर से सम्पर्क करें और सलाह अनुसार इलाज करवाएं।