व्यंग्यः आर्ट आफ टार्चरिंग

तारकेश कुमार ओझा बाज़ारवाद के मौजूदा दौर में आए तो मानसिक अत्याचार अथवा उत्पीडऩ यानी टार्चरिंग या फिर थोड़े ठेठ

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Exclusive : मात्र मोहजाल नहीं है सम्मोहन

  नया लुक संवाददाता, लखनऊ। कभी कोई व्यक्ति ‘सम्मोहन’ शब्द के बारे में सुनता है तो उसके दिमाग में तुरन्त

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