राष्ट्रीय स्तर पर योगी की लोकप्रियता

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

सुशासन के योगी मॉडल की चर्चा देश ही नहीं विदेशों तक है। आपदा प्रबंधन से लेकर बुलडोजर तक उनकी प्रशानिक कुशलता को रेखांकित करते हैं। उनका साँस्कृतिक राष्ट्रवाद सम्बन्धी विचार स्पष्ट है। इस पर उनको गर्व है। बिना भेदभाव के योजनाओं के क्रियान्वयन की उन्होंने मिसाल कायम की है। वह गोरखनाथ पीठ के महंत हैं। राजधर्म और सन्यास धर्म का पूरी निष्ठा से पालन करते हैं। नरेंद्र मोदी की तरह उनके जीवन में कोई अवकाश नहीं होता। दिनचर्या में न्यूनतम विश्राम। अठारह घण्टे तक अपने दायित्वों का निर्वाह। उनकी यह छवि उन्हें लोकप्रिय बनाती है। अन्य प्रदेश के लोग जानते हैं कि योगी उनके यहां मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। लेकिन वह योगी जैसे मुख्यमंत्री की अपेक्षा अवश्य करते हैं। योगी आदित्यनाथ के प्रति जनमानस का यह विश्वास है। इसके चलते वह भाजपा के सफल स्टार प्रचारक हैं। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भाजपा का प्रभाव अधिक नहीं रहा है। वहां भी योगी का प्रचार राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने में सहायक होता है। तेलंगाना में योगी का प्रचार ऐसा ही था। यहां भाजपा की नींव मजबूत हुई है।

योगी आदित्यनाथ चुनाव प्रचार में अपनी दोहरी भूमिकाओं का बखूबी निर्वाह करते हैं। मुख्यमंत्री के रूप में वह विकास, ईमानदारी, सुशासन के प्रति प्रदेश की जनता को विश्वास दिलाते हैं। पार्टी नेता के रूप में विपक्ष के हमलों का माकूल जवाब देते हैं। पीठाधीश्वर के रूप में सनातन विरासत का उद्घोष करते हैं। इसमें मानव कल्याण और राष्ट्रीय स्वाभिमान का विचार समाहित रहता है। इन सबका सहज स्वाभिमान प्रभाव होता है। अन्य प्रदेशों में भाजपा की सफ़लता में योगी आदित्यनाथ महत्वपूर्ण योगदान होता है। वह जहां प्रचार करते हैं, वहां भाजपा को लाभ होता है। योगी आदित्यनाथ ने उनतीस  जगहों पर प्रचार किया, इनमें से बाईस सीटों पर भाजपा को जीत हासिल हुई है। उन्होंने करीब सौ उम्मीदवारों के लिए सत्तावन रैलियां की थीं। उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया। यह बताया कि इच्छाशक्ति हो तो यूपी जैसे बीमारू राज्य को भी विकसित बनाया जा सकता है। कानून व्यवस्था को मजबूत बनाया गया। दबंग और माफिया तत्वों के अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाया गया।

मध्यप्रदेश प्रदेश में शिवराजसिंह चौहान ने इस मॉडल पर अमल किया। जबकि राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने तीन सौ वर्ष पुराने मन्दिर पर बुलडोजर चलाया। कांग्रेस का हांथ सनातन विरोधियों के साथ है। योगी ने मध्य प्रदेश में सोलह रैली कर उनतीस प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया था। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी योगी आदित्यनाथ को भारी समर्थन मिला।
तेलंगाना में पिछली बार भाजपा को एक सीट पर संतोष करना पड़ा था। इस बार उसे आठ सीट पर सफ़लता मिली। भाजपा राष्ट्रीय स्तर की आज सबसे बड़ी पार्टी है। इसलिए उसे सभी प्रदेशों के चुनाव गम्भीरता से लड़ने होते हैं। सभी जगह कार्यकर्ता के रूप में मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री को भी चुनाव प्रचार में सहयोग के लिए भेजा जाता है। यह पार्टी की कोई नई परम्परा नहीं है। ऐसा हमेशा होता रहा है। अंतर यह है कि पहले जब भाजपा की सरकार नहीं होती थी, तब इन नेताओं या कार्यकर्ताओं को मीडिया में इतनी सुर्खिया नहीं मिलती थीं। आज इनमें से अनेक लोग केंद्र में मंत्री हैं, विभिन्न प्रदेशों के मुख्यमंत्री हैं,तो चर्चा अधिक होती है।

कहा जा रहा कि भाजपा ने इतने लोंगों को चुनाव में उतार दिया। जबकि कैडर आधारित पार्टी में यह स्वभाविक व्यवस्था होती है। यह भी सच है कि कुछ नेताओं की लोकप्रियता अधिक होती है। मतदाताओं को अपनी बात वह ज्यादा बेहतर ढंग से समझा सकते हैं। इसी आधार पर उनकी चुनाव में उपयोगिता बढ़ जाती है। जो लोग केंद्र या प्रदेश की सत्ता में होते हैं, उनके क्रिया-कलापों का भी प्रभाव चुनाव प्रचार में पड़ता है। जैसे कोई मुख्यमंत्री अपने प्रदेश में सुशासन की स्थापना कर रहा हो, तो उसका चुनाव प्रचार स्वभाविक रूप से प्रभावशाली हो जाता है।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में और फिर विपक्षी नेता के रूप में मायावती,अखिलेश यादव ने भी अपनी पार्टी के लिए अन्य प्रदेशों में धुंआधार प्रचार किया था। लेकिन, इन्हें अन्य राज्यों तक पांव पसारने में सफलता नहीं मिली। इसका कारण था कि ये लोग सुशासन के प्रति विश्वसनीयता नहीं दिखा सके थे। योगी आदित्यनाथ अलग मिसाल बना रहे है। वह उत्तर प्रदेश में भ्र्ष्टाचार मुक्त और विकास पर आधारित शासन की स्थापना करने के प्रति कृत-संकल्पित हैं। इसमें ‘सबका साथ सबका विकास’ की भावना समाहित है। योगी की यह छवि अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित हो रही है।

इसीलिए जब वह किसी अन्य प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए जाते हैं, तो उसका प्रभाव अधिक होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विषय मे कहा जाता है कि वह धुंआधार चुनाव प्रचार के बावजूद सरकारी कार्य को पेंडिंग नहीं रखते। वह इसके लिए भी प्रचार के दौरान ही समय निकाल लेते हैं। यह बात योगी आदित्यनाथ पर भी लागू होती है। विभिन राज्यों में वह स्टार प्रचारक के रूप में शामिल किए जाते हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री पद के सरकारी दायित्व का भी निर्वाह करते चलते हैं। वह दूसरे प्रदेशों में निवेशकों से भी मुलाकात का समय निकाल लेते हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश में निवेश का आमंत्रण देते हैं। चुनाव में अत्यधिक व्यस्तता के बाद भी योगी उत्तर प्रदेश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी निभाते रहे। इसी अवधि में उनके निर्देशन में सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिनसे सुशासन और विकास की यात्रा आगे बढ़ेगी।

 

 

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